Mothers day : वो 5 मां जिन्होंने पिता की भी भूमिका निभाकर बेटों को बनाया IAS

नई दिल्ली। मां...। दुनिया की वो सबसे ताकतवर इंसान है जो ठान ले तो बच्चों की तकदीर बदल सकती है। उन्हें रंक से राजा बना सकती है। बच्चों की ​किस्मत में लिखी कांटों भरी राह में फूल बिछा सकती है। कभी भरपेट भोजन को तरसने वाले बच्चों को भी अफसर बना सकती है। हर साल मई के दूसरे रविवार को दुनियाभर में विश्व मातृ दिवस मनाया जाता है। वर्ष 2020 का मदर्स डे 10 मई को है। इस मौके पर जानिए पांच ऐसी मांओं की प्रेरणादायक कहानी जिन्होंने पति की मौत के बाद बेटे के लिए पिता की भी भूमिका निभाई। उसे खूब पढ़ाया-लिखाया। काबिल बनाया और आईएएस बनाकर ही मानीं।

1. आईएएस वरुण बरनवाल (varun baranwal ias)

1. आईएएस वरुण बरनवाल (varun baranwal ias)

आईएएस वरुण बरनवाल का बचपन बेहद गरीबी में बीता। ये महाराष्ट्र के पालघर जिले के बोइसार में पैदा हुए। इनके पिता साइकिल का पंक्चर बनाने का काम करते थे। वर्ष 2006 में दसवीं की परीक्षा के तीन दिन बाद हार्ट अटैक से पिता का निधन हो गया। परिवार चलाने के लिए वरुण बरनवाल ने पिता की साइकिल की दुकान का काम संभाला। रिजल्ट आया तो स्कूल में दसवीं टॉपर रहे। वरुण बरनवाल ने परिवार चलाने के लिए पिता की दुकान में ही जिंदगी खपा देने की ठानी तो मां ने इतना कहा कि 'पिता की मौत हो गई तो क्या हुआ मैं हूं ना'। तुम पढ़ाई जारी रखो। नतीजा यह रहा कि वर्ष 2013 की यूपीएससी परीक्षा में वरुण बरनवाल ने 32वीं रैंक हासिल की। वर्तमान में आईएएस हैं।

2. आईएएस मोहित बुंदस (mohit bundus ias)

2. आईएएस मोहित बुंदस (mohit bundus ias)

मध्य प्रदेश के कैडर के आईएएस मोहित बुंदस की कामयाबी की कहानी भी मां के हाथों लिखी गई है। महज 10 साल की उम्र में पिता की मौत हो गई। उनसे पहले मोहित के बड़े भाई की एक्सीडेंट में जान चली गई। पति व बेटे की मौत के बाद मोहित की मां ने न केवल खुद को संभाला बल्कि बेटे को भी आगे बढ़ने ​की हिम्मत दी। छतरपुर के कलेक्टर रहते हुए मोहित बुंदस अक्सर अपने सफलता और मां के संघर्ष की कहानी लोगों को खुद बता चुके हैं। राजस्थान के जयपुर निवासी मोहित मानते हैं कि मां की बदौलत वे महज 21 साल की उम्र में आईपीएस बन गए थे। 18 दिसंबर 2006 से 24 अगस्त 2011 तक झारखंड कैडर में आइपीएस रहे, मगर मां की इच्छा थी कि बेटा आईएएस बने। वर्ष 2011 में आईएएस बनकर मां का यह ख्वाब भी पूरा कर दिया।यह भी पढ़ें :

3. आईएएस राजेन्द्र भारूड़ (rajendra bharud ias )

3. आईएएस राजेन्द्र भारूड़ (rajendra bharud ias )

आईएएस राजेन्द्र भारूड़ का जन्म 7 जनवरी 1988 को महाराष्ट्र के धुले जिले के सामोडा में हुआ। इन्होंने कभी अपने पिता को नहीं देखा। मां के पेट में थे तब ही पिता की मौत हो गई थी। महाराष्ट्र के आदिवासी भील समाज से ताल्लुक रखने वाले राजेन्द्र भारूड़ की मां कमलाबाई के सामने परिवार पालने के लिए कोई रोजगार नहीं मिला तो उन्होंने शराब बेचने शुरू किया और बेटे राजेन्द्र को पढ़ने-लिखने का अवसर दिया। तमाम मुश्किल हालात के बावजूद राजेन्द्र मन लगाकर पढ़ाई करते रहे। बारहवीं कक्षा 90 प्रतिशत और दसवीं 95 प्रतिशत अंक से उत्तीर्ण ​की। वर्ष 2011 में कॉलेज के बेस्ट स्टूडेंट चुने गए। उसी दौरान आईएएस बनने की दिशा में कदम बढ़ाया और यूपीएससी का फार्म भरा। पहले ही प्रयास में यूपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण कर ली। 2013 बैच के आईएएस अफसर डॉ. राजेन्द्र भारूड़ वर्तमान में महाराष्ट्र के नंदूरबार के जिला कलेक्टर हैं।

4.आईएएस रमेश घोलप (ramesh gholap ias)

4.आईएएस रमेश घोलप (ramesh gholap ias)

आईएएस रमेश घोलप का जन्म महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के महागांव में हुआ। पिता पंक्चर बनाने की दुकान चलाया करते थे और मां आस-पास के गांवों में चूड़ियां बेचती थीं। इनका सपना था अफसर बनने का, मगर 12वीं कक्षा में थे तब पिता की मौत हो गई। इसके बाद मां ने बेटे को अपना ख्वाब पूरा करने के लिए पढ़ाई नहीं छोड़नी दी। बेटे को 12वीं के बाद डिप्लोमा करवाया तो बेटा शिक्षक की नौकरी लग गया, मगर मां चाहती थी कि बेटा अफसर ही बने। उन्होंने बेटे रमेश घोलप को हिम्मत बंधाई। वर्ष 2010 में यूपीएससी की परीक्षा दी। पहले प्रयास में फेल हुए तो फिर मां ने साथ दिया और मेहनत करते रहने की नसीहत दी। नतीजा यह रहा कि वर्ष 2012 में रमेश घोलप ने 287वीं रैंक के साथ झारखंड कैडर के आईएएस अफसर बन गए।

 5. आईएएस के एलमबावत (k elambahavath ias)

5. आईएएस के एलमबावत (k elambahavath ias)

वर्ष 1982 में तमिलनाडु के जिले थनजावूर के छोटे से गांव चोलागनगूडिक्कडू में एक लड़के का जन्म हुआ। नाम रखा गया के. एलमबावत। वर्तमान में ये आईएएस हैं। गरीबी में जिंदगी गुजारने वाले के एलमबावत के आईएएस बनने में मां का सबसे बड़ा योगदान रहा। वर्ष 1997 में पिता की मौत के बाद आर्थिक तंगी के कारण के एलमबावत को 12वीं में पढ़ाई छोड़नी पड़ी, मगर मां व तीन बड़ी बहनें इनकी ताकत बनीं। वे खुद खेतों में काम करती रहीं। के एलमबावत की पढ़ाई फिर से शुरू करवाई। ​इस बार इन्होंने लॉन्ग दूरस्थ शिक्षा प्रणाली से बाहरवीं पास की। फिर मद्रास यूनिवर्सिटी से हिस्ट्री में बीए किया। वर्ष 2016 में 117वीं रैंक हासिल कर आईएएस अफसर बने।

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