CM Himanta Biswa Sarma Profile: 'पूर्वोत्तर के चाणक्य' से 'असम के मामा' तक का सफर
Himanta Biswa Sarma Profile: आज लगातार तीसरी बार असम में भाजपा की सरकार बनी हो तो वहीं लगातार दूसरी बार हिमंता बिस्वा सरमा राज्य के सीएम पद पर काबिज हुए हैं। आपको बता दें कि हिमंता बिस्वा सरमा ने 12 मई 2026 को गुवाहाटी के खानापारा स्थित वेटरनरी कॉलेज मैदान में आयोजित एक भव्य समारोह में दूसरी बार असम के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए ने 2026 के असम विधानसभा चुनावों में ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए 126 में से 102 सीटें जीती हैं, जिसमें अकेले बीजेपी ने 80 सीटों पर कब्जा किया है। आइए एक नजर डालते हैं बिस्वा के अब तक के राजनीतिक सफर पर।

हिमंता बिस्वा सरमा: 'पूर्वोत्तर के चाणक्य' से 'असम के मामा' तक का सफर
छात्र राजनीति से शुरुआत
हिमंता बिस्वा सरमा का राजनीतिक सफर गुवाहाटी की गलियों से शुरू हुआ. उन्होंने मात्र 10-12 साल की उम्र में छात्र राजनीति में कदम रख दिया था. कॉटन कॉलेज में पढ़ाई के दौरान वह तीन बार छात्र संघ के महासचिव चुने गए, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है. उनकी वाकपटुता और नेतृत्व क्षमता के कारण उन्हें शुरुआती दिनों में 'चाइल्ड वंडर' (बाल कलाकार) कहा जाता था।
कांग्रेस में लंबा कार्यकाल और बगावत
उन्होंने मुख्यधारा की राजनीति की शुरुआत कांग्रेस से की और लंबे समय तक तरुण गोगोई सरकार में सबसे प्रभावशाली मंत्रियों में से एक रहे, हालांकि, 2014-15 के दौरान पार्टी हाईकमान के साथ मतभेदों और नेतृत्व के मुद्दों के कारण उन्होंने कांग्रेस छोड़ने का फैसला किया, कहा जाता है कि जब वे अपनी शिकायत लेकर दिल्ली गए, तो राहुल गांधी ने उन्हें गंभीरता से नहीं लिया, जिसके बाद वे अगस्त 2015 में बीजेपी में शामिल हो गए।

बीजेपी के 'संकटमोचक' और पूर्वोत्तर के किंगमेकर
बीजेपी में आने के बाद सरमा ने अपनी रणनीतिक कुशलता से पूरे पूर्वोत्तर का राजनीतिक परिदृश्य बदल दिया, उन्हें NEDA (North-East Democratic Alliance) का संयोजक बनाया गया, 2016 में असम में पहली बार बीजेपी की सरकार बनवाने से लेकर मणिपुर, त्रिपुरा और नागालैंड जैसे राज्यों में पार्टी को सत्ता तक पहुँचाने में उनकी 'चाणक्य' जैसी भूमिका रही।
मुख्यमंत्री पद की पहली पारी (2021-2026)
2021 के चुनाव के बाद पार्टी ने उन्हें मुख्यमंत्री की कमान सौंपी, उनके पहले कार्यकाल को सख्त प्रशासन, बुनियादी ढांचे के विकास और कड़े फैसलों (जैसे मदरसों को सामान्य स्कूलों में बदलना और बाल विवाह के खिलाफ अभियान) के लिए जाना जाता है. जनता के बीच उनकी लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि लोग उन्हें प्यार से 'मामा' कहने लगे।

दूसरी बार संभाली सत्ता की कमान
अब दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर हिमंता बिस्वा सरमा ने यह साफ कर दिया है कि असम की राजनीति में उनका प्रभाव लगातार मजबूत हो रहा है। बीजेपी नेतृत्व भी उन्हें पूर्वोत्तर का बड़ा रणनीतिक चेहरा मानता है।














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