केजरीवाल के राज में दिल्ली की बत्ती गुल

घाटे का रोना रो रही इन कंपनी का कहना है कि बजट की कमी के कारण वो 24 घंटे बिजली सप्लाई नहीं पर पाएंगी। कंपनी की दलील है कि उसके पास बिजली खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं, इसलिए उसे बिजली कटौती करनी पड़ सकती है। अगर ऐसा हुआ तो मेट्रो सेवा भी प्रभावित हो सकती है। पावर कट के इस ऐलान से दिल्ली के 60 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित होंगे। हलांकि जानकारों का मानना है कि बिजली कंपनियों ने ये कदम बदले की भावना से उठाए है। दरअसल केजरीवाल सरकार ने बिजली कंपनियों को ऑडिट कराने का आदेश दिया था, जिसके जवाब में उन्होंने पावर कट का ऐलान कर दिया है।
बिजली कंपनी सरकार पर दबाव की राजनीति बनाकर ऑडिट रुकवाने की योजना बना रही है। पावर डिपार्टमेंट के सूत्रों के मुताबिक, बीएसईएस यमुना के सीईओ अरविंद गुजराल ने पावर सेक्रेटरी पुनीत कुमार गोयल को चिट्ठी लिखकर ये जानकारी दी है। सरकार को लिकी अपनी चिट्ठी में बिजली कंपनियों ने साफ-साफ कहा कि अब उनके पास आगे बिजली खरीदने के लिए रुपये नहीं हैं। इसलिए हो सकता है कि 1 फरवरी से उन्हें हर रोज 10 घंटे तक भी बिजली कटौती करनी पड़ जाए। अगर ऐसा होता है तो शाहदरा से कश्मीरी गेट और कश्मीरी गेट से शिवाजी स्टेडियम वाले मेट्रो रूट भी प्रभावित होंगे। बिजली कंपनियों के इस अल्टीमेटम पर आप ने सख्त तेवर अपनाए हैं। आप नेता गोपाल राय ने कहा कि अगर ऐसा होता है तो बिजली कंपनियों के लाइसेंस रद्द किए जाएंगे। सरकार और बिजली कंपनी की इस लड़ाई में जनता को मुश्किलों का सामना करना पड़ा सकता है।
बिजली कंपनी के एक सूत्र ने बताया कि कंपनी को बिजली ट्रांसमिशन और खरीदने के नाम पर दिल्ली ट्रांस्को, एनटीपीसी, एनएचपीसी, डीवी और एसजेवीएनएल आदि कंपनियों को 2500 करोड़ रुपये देने हैं, जो उनके पास नहीं है, जबकि उसे डीईआरसी से 6200 करोड़ रुपये लेने हैं। जिसे दिल्ली इलेक्ट्रिसिटी रेग्युलेटरी कमिशन देने का नाम नहीं ले रही है। दूसरी ओर विभिन्न बैंकों से भी अब उन्हें लोन नहीं मिल रहा है। चूंकि बैंकों को लोन देने की एवज में कोई न कोई गारंटी चाहिए होती है।
वह गारंटी आमतौर पर दरें बढ़ाने की होती है, लेकिन वह मामला भी अब ठंडे बस्ते में जा रहा है। जिन कंपनियों से वह बिजली खरीदते हैं उन्होंने भी उनसे अब और आगे बिजली बेचने से मना कर दिया है। इन तमाम वजहों से अब वह ऐसे में और ज्यादा समय तक बिजली सप्लाई को सामान्य नहीं रख पाएंगे। लेटर में बताया गया है कि हो सकता है कि बीएसईएस यमुना को रोजाना 500 मेगावाट तक बिजली कम मिले। ऐसे में उन्हें बिजली सप्लाई 10 घंटे तक भी काटना पड़ सकता है।












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