'मुस्कुरा कर कही बात में आपराधिकता कहां?' अनुराग ठाकुर 'हेट स्पीच' मामले में दिल्ली हाईकोर्ट
नई दिल्ली, 26 मार्च। दिल्ली उच्च न्यायालय ने शनिवार को वृंदा करात और केएम तिवारी की दिल्ली दंगों से जुड़ी याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। मामले में सुनवाई कर रही हाईकोर्ट की खंडपीठ ने याचिकाकर्ताओं से पूछा कि उनके आरोपों से जुड़े साक्ष्य कहां है? अदालत ने कहा कि अगर यह कहा जा रहा है कि विरोध केवल एक विशेष समुदाय के लिए था तो भाषण भी उन्हीं के संदर्भ में दिया गया होगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर कोई बात मुस्कुराहट के साथ कही जाती है तो उसमे आपराधिकता नहीं होती।

इससे पहले कोर्ट में दिल्ली दंगों पर भाषण देने को लेकर केंद्रीय खेल एवं युवा मामले व सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर के साथ सांसद प्रवेश वर्मा के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की गई थी। इस याचिका को खारिज करते हुए अदालत ने इन नेताओं के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने का आदेश देने से इनकार कर दिया था। एफआइआर दर्ज करने से इनकार करते हुए वृंदा करात की याचिका को 26 अगस्त 2020 को निचली अदालत ने खारिज कर दिया था। जिसके बाद इसके विरोध में सीपीएम (CPM) सीपीएम नेता दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचे थे।
दरअसल केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर का 'हेट स्पीच' मामला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों से जुड़ा है। आरोप है कि अनुराग ठाकुर की रैली में 'देश के गद्दारों को, गोली मारो सालों को' नारे लगे थे। याचिका में आरोप लगाया गया था कि इसमें तब शाहीन बाग में धरने पर बैठी महिलाओं को बलपूर्वक हटाने की ओर इशारा किया गया था और साथ-साथ मुस्लिमों को हत्यारा और बलात्कारी दिखा कर उनके खिलाफ घृणा फैलाने की कोशिश की गई थी। इस सम्बन्ध में 29 जनवरी को चुनाव आयोग ने अनुराग ठाकुर को 'कारण बताओ नोटिस' भी भेजा था। हाईकोर्ट ने पूछा कि क्या ये भाषण प्रदर्शनकारियों के स्थल के पास दिया गया? हाईकोर्ट ने कहा कि 'ये लोग' का मतलब यहाँ कोई खास समुदाय से नहीं है और इसे आप किस रूप में लेंगे? हाईकोर्ट ने पूछा कि क्या तब दिल्ली में एक ही समुदाय के लोग प्रदर्शन कर रहे थे? अगर ऐसा है, तो फिर उस प्रदर्शन को केवल एक ही समुदाय का समर्थन हासिल था?
मामले में सीपीएम नेताओं की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस चंद्रधारी सिंह की पीठ ने कहा चुनाव के समय जिस तरह के भाषण दिए जाते हैं, वो सामान्य परिस्थितियों में दिए गए भाषणों से अलग होते हैं। कभी-कभी कुछ बातें माहौल बनाने के लिए की जाती हैं। इसका कोई अन्य इरादा नहीं होता।
मुस्कुराहट के साथ कही बात में आपराधिकता कहां?
सीपीएम नेता वृंदा कारात और केएम तिवारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस चंद्रधारी सिंह ने कहा कि मुस्कराहट के साथ जब कोई बात कही जाती है, तो उसमें कोई अपराधिकता नहीं होती। अगर कोई बात आपत्तिजनक तरीके से कहा जाए तो उसमें अपराधिकता की संभावना रहती है। कोर्ट ने कहा कि अनुराग ठाकुर के भाषण में कोई 'सांप्रदायिक इरादा' कहां है? अदालत ने याचिकाकर्ताओं से सवाल किया कि क्या वह चुनावी भाषण था या सामान्य समय में दिया गया बयान? दिल्ली हाईकोर्ट ने लोकतंत्र का हवाला देते हुए कहा कि सबको बयान देने का अधिकार है। याचिकाकर्ताओं से पीठ ने उनके आरोपों से जुड़े साक्ष्य मांगे। अदालत ने कहा कि इस आंदोलन को अन्य लोगों ने भी समर्थन दिया था। ऐसे में आप कैसे यह कह सकते हैं कि दोनों नेताओं द्वारा दिया गया बयान एक समुदाय के लिए था?












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