हर्षवर्धन के नाम में हुई देरी से पार्टी को नुकसान:आडवाणी

harshvardhan
नयी दिल्ली। दिल्ली में 15 सालों तक सत्ता के लिए तरसक रही भाजपा को अब अगले 5 सालों तक और सत्ता का इंतजार करना होगा। इसबार तो कुर्सी हाथ आते-आते सामने से निकल गई। 32 सीटें हासिल करने के बावजूद भी भाजपा सर कार नहीं बना पाई। एकबार फिर से उसे विपक्ष में ही बैठना पड़ा। ऐसे में हार पर अपनी दलील देते हए भाजपा के वरिष्ठ नेता लल कृष्ण आडवाणी ने कह कि पार्ट ने दिल्ली में मुख्यमंत्री पद के दावेदार के नाम की घोषणा करने में देरी की, जिसका हर्जाना पार्टी को भुगतना पड़ा।

लकृष्ण आडवाणी ने कहा कि यदि हर्षवर्धन को थोड़ा पहले ही दिल्ली के मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया जाता तो पार्टी को दिल्ली विधानसभा में बहुमत मिल जाता।भाजपा की विदेश शाखा द्वारा यहां आयोजित एक 'वैश्विक सम्मेलन' के समापन समारोह में आडवाणी ने कहा कि यदि हर्षवर्धन को मुख्यमंत्री प्रत्याशी घोषित किए जाने में देरी की गई होती तो आम आदमी पार्टी दिल्ली विधानसभा चुनाव जीत गई होती।

दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा 32 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी रही, लेकिन 28 सीटें जीतने वाली 'आप' कांग्रेस के आठ विधायकों के सहयोग से सरकार बनाने में सफल रही।

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