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Shaurya Diwas : जब CRPF की छोटी सी टुकड़ी ने सरदार पोस्ट पर PAK के 3500 जवानों को चटाई धूल

नई दिल्ली, 9 अप्रैल। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) आज अपना 57वां शौर्य दिवस मना रहा है। CRPF के इतिहास में 9 अप्रैल 1965 का दिन अदम्य साहस के लिए याद किया जाता है। प्रत्येक भारतीय के लिए भी यह दिन गर्व करने का है।

Crpf Sardar post story

इस दिन सीआरपीएफ की छोटी टुकड़ी ने पाक के नापाक मंसूबों पर पानी फेर दिया था। सीआरपीएफ के जवानों ने पाकिस्तानी फौज के 3500 जवानों को खदेड़ दिया था।

सरदार पोस्ट का युद्ध

सरदार पोस्ट का युद्ध

वन इंडिया हिंदी से बातचीत में सीआरपीएफ के सेकंड इन कमांड देवेंद्र सिंह कस्वा ने बताया कि शौर्य दिवस गुजरात में कच्छ के रण में सरदार पोस्ट पर मातृभूमि के प्रति प्‍यार और सर्वोच्च बलिदान की कहानी है। इसे सरदार पोस्ट का युद्ध के नाम से भी जाना जाता है।

 क्या हुआ था 9 अप्रैल 1965 को?

क्या हुआ था 9 अप्रैल 1965 को?

दरअसल, 57 साल पहले 8 और 9 अप्रैल 1965 की मध्य-रात्रि के अंधेरे में पाकिस्तान की 51वीं इन्फेंटरी ब्रिगेड के 3500 जवानों ने गुपचुप तरीके से हिंदुस्तान की सीमा पोस्टों पर ऑपरेशन 'डिजर्ट हॉक' के तहत आक्रमण कर दिया था। उस समय हवलदार रणजीत सिंह मशीन गन के साथ सरदार पोस्ट पर ड्यूटी पर थे। सिंह ने उत्तर दिशा में 50 से 100 गज की दूरी पर कुछ हलचल देखी। दुश्‍मन की हलचल का अंदेशा होते ही उसने घुसपैठियों को चुनौती दी। जवाब में दूसरी ओर से फायरिंग शुरू हो गई और यह पाकिस्तानी बलों के लिए मोर्टार व 25 पाउण्डरों से गोलीबारी का संकेत था।

सरदार पोस्ट पर हमला

सरदार पोस्ट पर हमला

परिणामस्वरूप सरदार व टक पोस्ट में सीआरपीएफ की 2 बटालियन की चार कंपनियों पर एक ब्रिगेड ने पूरी ताकत से समानांतर हमला शुरू कर दिया। पोस्ट के कार्मिकों ने मोर्चा संभाल लिया और उनके पास मौजूद असले को अंत तक बचाए रखने के लिए सांस रोक कर दुश्मन को समीप आने दिया। मरघट जैसी शांति ने पाकिस्तानियों को यह अहसास कराया कि सरदार पोस्ट के सभी जवान या तो मर चुके हैं या गोलीबारी में घायल हो चुके हैं।

सिपाही शिव राम को सैल्यूट

सिपाही शिव राम को सैल्यूट

सरदार पोस्ट पर तैनात सिपाही शिव राम को इस बात का श्रेय जाता है कि उसने 600 गज दूर से खतरनाक तोप सेना और मोर्टारधारी दुश्मन की हरकत का संज्ञान ले लिया था। इसका पता लगते ही सूबेदार बलबीर सिंह ने शत्रु के आउट-पोस्ट को नष्ट करने के लिए अपने मोर्टार से फायर किया। हमलावर कॉलम ने अब पोस्ट की ओर बढ़ना शुरू कर दिया और इसके नजदीक पहुंचने लगी। पोस्ट में किसी के जीवित बचने का कोई संकेत नहीं मिल रहा था।

14 जवान मारे गए और 4 व्यक्ति जीवित पकड़े

14 जवान मारे गए और 4 व्यक्ति जीवित पकड़े

हमलावर कॉलम के 20 जवान पोस्ट के बिल्‍कुल नजदीक आ गए तभी पोस्ट की तीनों मशीन गन जीवित हो उठी और उनके जानलेवा फायर ने शत्रुओं को चित कर दिया। कुछ ही क्षण में सभी मृत्यु को प्राप्त हो चुके थे। पीछे से हमला करने वाली दुश्‍मनों की दूसरी खेप का भी अपने पूर्ववर्ती साथियों की तरह हश्र हुआ। इस हमले में 14 जवान मारे गए और 4 व्यक्ति जीवित पकड़े गए। दुश्मन फौज को एक सफलता यह मिली की पूर्वोत्तर छोर के पोस्‍ट की मशीन गन जाम हो गई, लेकिन केरिपुबल के जवानों ने त्‍वरित कार्रवाई करते हुए काउंटर अटैक जारी रखा और दुश्मन को पीछे धकेल दिया।

19 सीआरपीएफ जवानों को बंदी बनाया

19 सीआरपीएफ जवानों को बंदी बनाया

दुश्‍मन फौज लड़खड़ा गई तथापि वे पोस्ट कमांडर मेजर सरदार करनैल सिंह और 19 सीआरपीएफ जवानों को बंदी बनाने में सफल रहे। एक घंटे तक दोनों ओर से गोली-बारी जारी रही, जिसके दौरान दुश्मन ने पोस्ट पर कब्‍जा करने के लिए तीन बार प्रयास किए, लेकिन उन्‍हें भारी जनहानि के साथ पीछे हटना पड़ा। सरदार पोस्ट के पूर्वी छोर पर हवलदार भावना राम ने उसके पास की एमएमजी के शांत होने पर उसकी पोस्‍ट के सभी ग्रेनेड एकत्रित किए और पास आने का प्रयास कर रही दुश्मन फौज पर एक के बाद एक फेंकना जारी रखा। उसका यह बहादुरी भरा कारनामा घुसपैठियों के मनोबल को हतोत्साहित करने और उन्‍हें पोस्ट से दूर रखने के लिए काफी देर तक जारी रहा।

सीआरपीएफ की जवाबी कार्रवाई ने टिका दिए घुटने

सीआरपीएफ की जवाबी कार्रवाई ने टिका दिए घुटने

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के द्वारा की जा रही जवाबी कार्रवाई ने दुश्मन फौज को इस प्रकार हतप्रभ किया कि भारी संख्या और बेहतर हथियारों के बावजूद उन्‍होंने दूसरे हमले का प्रयास नहीं किया। केरिपुबल के जवान अपनी सुरक्षा व अपने प्रियजनों को विस्मृत करके अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए कर्त्‍व्यपथ पर तत्‍पर रहे। उनकी इस कार्रवाई को कृतज्ञ राष्ट्र द्वारा सराहा और पहचाना गया। इस प्रकार के युद्ध सरीखे कुछ दृष्टांत ही हैं। तत्कालीन गृह मंत्री ने इसे पुलिस युद्ध के बजाय 'सैन्य युद्ध' की संज्ञा से बिल्‍कुल सही संबोधित किया था। उस ऐतिहासिक क्षण की याद में सीआरपीएफ शौर्य दिवस मनाया जाता है।

CRPF की उपलब्धियां

- सीआरपीएफ के जवानों ने 1965 तक भारत-पाकिस्तान सीमा की रक्षा की जिसके बाद सीमा सुरक्षा बल का निर्माण किया गया।

-CRPF ने 2001 में भारतीय संसद पर हमला करने वाले सभी 5 आतंकवादियों को मार गिराया था।
-वर्तमान में CRPF कर्मियों द्वारा भारत में आतंकवाद रोधी अभियान चलाए जा रहे हैं।
-2008 में देश में नक्सली आंदोलन का मुकाबला करने के लिए कमांडो बैटालियन फॉर रेसोल्यूट एक्शन नामक एक सीआरपीएफ विंग बनाया गया था।

सीआरपीएफ अंतर्राष्ट्रीय मिशन

-सीआरपीएफ को श्रीलंका में शांति कार्यों के लिए तैनात किया गया था। उन्हें मालदीव, सोमालिया, नामीबिया, हैती में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के एक भाग के रूप में तैनात किया गया है।

-हैती मिशन के तहत, उन्होंने देश में राजनीतिक स्थिरता रखने में मदद की। पूरी तरह से गठित महिला पुलिस यूनिट 2007 में लाइबेरिया मिशन के तहत तैनात की गई थी।

27 जुलाई 1939 को हुई सीआरपीएफ की स्थापना

27 जुलाई 1939 को हुई सीआरपीएफ की स्थापना

सीआरपीएफ देश के सबसे पुराने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में एक है। इसके पास देश की आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी है। 27 जुलाई 1939 को क्राउन रिप्रजेंटेटिव पुलिस के रूप में इसका गठन हुआ था। आजादी के बाद 28 दिसम्बर, 1949 को संसद के एक अधिनियम द्वारा इस बल को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल नाम दिया गया था। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है। सीआरपीएफ का आदर्श वाक्य सेवा और वफादारी। महानिदेशक आईपीएस कुलदीप सिंह हैं।

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