लोकप्रियता को भुनाएंगे केजरीवाल या लेंगे मोदी की आड़?
नयी दिल्ली। आम आदमी पार्टी ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में अद्भुत प्रदर्शन करते हुए गजब का कमबैक किया है। जिस पार्टी ने पिछली बार 28 सीटें जीती और महज 49 दिनों में सत्ता छोड़ दी, वहीं लोकसभा चुनाव में जिसे चारों खाने चित होना पड़ा उसने मोदी लहर तक को पीछे छोड़ते हुए दिल्ली की दिल जीत लिया।

केजरीवाल ने अपने मनलुभावने वादों से दिल्ली की जनता का न केवल मोह जीता ब्लकि लोगों को खुद पर भरोसा करने के लिए मजबूर कर दिया। केजरीवाल ने दिल्ली की जनता को 20,000 हजार लीटर मुफ्त पानी देने का भरोसा दिया है तो वहीं बिजली की कीमतें आधी करने की बी घोषमा की है। ऐसे में देखने वाली बात होगी कि सरकार बनाने के बाद वो इस चुनौती पर कैसे खड़े उतरते हैं।
दिल्ली में केजरीवाल की जीत जहां आप के लिए चुनौती है तो वहीं ये भाजपा के लिए बड़ा सवाल भी है। भाजपा की करारी शिकस्त ने मोदी लहर पर सवाल खड़ा किया है। ऐसे में भाजपा की हार ने देश में एंटी मोदी फेक्टर को जन्म दे दिया है। टीएमसी नेता और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी कहा कि दिल्ली में आप की जीत देश की राजनीति में बदलाव लेकर आएगी।
जहां भाजपा के लिए सोचने का विषय है तचो वहीं केजरीवाल के लिए वक्त रिलेक्स होने का नहीं है। आप को सत्ता संभालने के साथ ही अपने वादें को पूरा करने की चुनौती होगी। दिल्ली की जनता ने आम आदमी पार्टी को 54 फीसदी वोट दिए है। ऐसे में केजरीवाल के माथे पर बड़ी चुनौती है,लेकिन सवाल ये भी है कि क्या केजरीवाल मोदी सरकार की आड़ लेकर अपना बचाव करेंगे। कहने का मतलब ये कि केजरीवाल के पास ये विकल्प है कि अगर वो किसी वादे को पूरा करने में नाकाम होते हैं तो वो केंद्र की मोदी सरकार की आड़ लेकर अपना बचाव कर सकते हैं।
अगर उदाहरण की बात करें तो केजरीवाल के सामने बिजली और पानी को लेकर दिल्ली की जनता से किया गया वादा सबसे कठिन चुनौती है। ऐसे में अगर वो इस वादे को पूरा करने में नाकाम होते है तो वो मोदी की आड़ का सहारा लेकर अपनी नाकामी छुपा सकते हैं। चूंकि दिल्ली को पानी के लिए हरियाणा पर निर्भर होना पड़ता है। ऐसे में हरियाणा की भाजपा सरकार केजरीवाल की राह में रोड़ा उड़का सकती है।












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