केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने बाल मजदूरी कर चुके यूथ लीडर्स को किया सम्मानित, प्रशंसा में कही यह बातें
नई दिल्ली, जून 12। कभी बाल मजदूरी करने वाले युवा आज बाल मजदूरी के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं। ऐसे युवाओं को केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने सम्मानित किया है। कभी बाल मजदूरी के अंधकार में डूबे रहे इन युवाओं ने अब बाल मजदूरी के खिलाफ लड़ाई शुरू कर दी है और उसका नेतृत्व कर रहे हैं। ऐसे ही युवाओं को केंद्रीय मंत्री ने विश्व बालश्रम विरोधी दिवस की पूर्व संध्या पर सम्मानित किया और उन्हें पुरस्कृत किया।

आपको बता दें कि झारखंड के कई इलाकों में माइका माइन के चलते झारखंड में हजारों बच्चों का बचपन छिनता जा रहा है। दुनियाभर में माइका आपूर्ति में सिर्फ झारखंड और बिहार का हिस्सा 25 प्रतिशत है। इससे ही स्थिति की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है। साल 2005 से कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन उन 501 गांव में काम कर रही है जहां के बच्चे माइका माइन के जाल में फंसे हुए हैं।
झारखंड के कोडरमा जिले के गांव ढाभ की रहने वाली निकिता भी कभी आठ साल की उम्र में माइका माइन में पत्थर काटने (स्टोन कटिंग) का काम करती थी। साल 2012 के आसपास का समय निकिता के लिए मानो एक नई जिंदगी की सुबह लेकर आया। नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी द्वारा स्थापित बचपन बचाओ आंदोलन (बीबीए) के कार्यकर्ताओं की मदद से निकिता को न केवल माइका माइन में काम करने से आजादी मिली बल्कि स्कूल में पढ़ाई करने का मौका भी मिला।












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