संसद में 'मंकी' भगाने के लिए रबड़ बुलेट गन के साथ तैनात होंगे 'मंकी मैन'

40 men in ape suits to scare monkeys away from Parliament complex
नयी दिल्‍ली (ब्‍यूरो)। कोयले की इंजन से डीजल इंजन उसके बाद इलेक्ट्रिक इंजन और अब बुलेट ट्रेन। ऊंची-ऊंची इमरातें और आधुनिक टेक्‍नॉलजी का दंभ भर रहा हमारा देश मंगल अभियान पर निकल चुका है। इस अभियान पर निकला मंगलयान अपना 80 फीसदी से अधिक का सफर तय कर चुका है। मगर लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर (संसद भवन) में मौजूद बंदरों को भगाने के लिए जो तरीका अपनाया गया है वो आदि युग की याद दिलाता है। तब इंसान लगभग बंदर के रूप में था। संसदीय कार्यभार मंत्री बैंकैया नायडू ने गुरुवार को बताया कि संसद में बंदरों कि समस्या से निबटने के लिए जीते-जागते इंसानों को लंगूर बनाया गया है।

बंदरों के आतंक से बचने के लिए 40 ऐसे युवकों का दल तैयार किया गया है, जो लंगूर की वेश में होंगे। सरकार ने बताया कि युवकों को लंगूर के वेश में देखकर बंदर भाग जाएंगे और इस तरह से आतंक से बचा जा सकता है। वैंकेयानायडू ने बताया कि इन 40 'मानव लंगूरों' के अलावा एनडीएमसी ने बंदरों को भगाने के लिए रबड़ बुलेट गन भी खरीदी हैं। इस काम के लिए मानव लंगूरों (मंकी मैन) को एक दिन का 700-800 मिलता है और इन्हें महिने में लगभग 15 दिनों तक का काम मिल जाता है। इसके अलावा बंदरों पर गोलियां भी चलाई जाएंगी पर वो असली गोलियों की जगह रबर की गोलियां होंगी। वहीं कुत्तों को पकड़ने के लिए भी एक टीम हफ्ते में दो बार राष्ट्रपति भवन का दौरा करती है।

लंगूर की आवज निकालते हैं 'मानव लंगूर'

सरकार की ओर से तैनात मानव लंगूर न केवल बंदरों को भगाने का काम करते हैं, बल्कि लंगूरों की तरह आवाज भी निकालते हैं। इस काम के लिए यूवकों को 7500 रुपये वेतन दिये जाते हैं। बंदरों को भगाने के लिए मानव लंगूर पेड़ की आड़ में छिपकर लंगूर की तरह आवाज निकालते हैं। इससे बंदर डर कर भाग जाते हैं।

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