सोनिया-पवार की "पॉवर" की वजह क्या है

बाल ठाकरे ने शिवसेना को खड़ा किया। शिवसेना का कार्यकर्ताओं ने उसे तहस नहस कर दिया। चलिए एक उदाहरण ही पेश किया जाए। मैं जब उत्तर प्रदेश के अमरोहा में था। शहर में कोई बड़ा उत्सव हुआ करता था तो शिवसेना से जुड़े नौजवान हाथों में लाठिया लिए खुद ही व्यवस्था को संभालते हुए देखे जाते थे।
दशहरा के अवसर पर रावण फुंकने के मैदान पर लोगों को एक लाइन में करने के लिए बड़े ही उग्र और गुस्सेल अंदाज में जमीन पर लाठियां ज़ोर-ज़ोर से पटकी जातीं, लोग तितर बितर होकर डरकर एक लाइन में खड़े होते, इनमें कई के लाठियां लग भी जाती थीं। बच्चे तो रोने लगते तो कई बच्चे दशहरा पर रावण फुंकने का मजा भूल, घर को लौट आते। मैं तो लौट ही आया था।
फिर कभी रावण फुंकता देखने नहीं गया। अब आप ही अंदाजा लगाइए यदि किसी व्यक्ति की इतनी डरावनी छवि उभरकर आए तो आप क्या करेंगे। सीधा है। आप उसके सामने कम आवाज में बात करेंगे। यह भी हो सकता है कि उसकी हर बात पर हां में हां मिलाएं और वो बुलाए तो चले जाएं और न चाहते हुए भी उससे बात करें। बिलकुल ठीक ऐसा ही है शिवसेना के साथ महाराष्ट्र में है। यही वजह रही कि महाराष्ट्र के बाहर आकर शिवसेना बचा कुचा अस्तित्व भी नहीं है। उत्तर प्रदेश में बरसों पहले जमीन तलाशने की कोशिश भी कार्यकर्ताओं के उग्र चरित्र ने नाकाम कर दी।
सोनिया व पवार और "पॉवर"
यही फायदा उठाते हए सोनिया व पवार ने महाराष्ट्र में शिवसेना की जमीन पर अपना घर बना लिया। तभी तो वर्ष 1999 से लगातार कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन से शिवसेना कभी महाराष्ट्र नहीं पा सकी। कुछ सालों बाद संभवतः वर्ष 2005 में फूट औऱ अंदरूनी कलह ने शिवसेना की और भी गत बिगाड़ दी। यह फूट नव निर्माण सेना के रूप में सामने आई। जब राज ठाकरे ने अपनी पार्टी अलग बना ली। जब दोनो अलग हुए तो सीधा असर शिवसेना बची कुची ताकत पड़ा। अब भी वह उग्र रूप दोनो पार्टी शिवसेना व महाराष्ट्र नव निर्माण सेना में दिखता है।
भाजपा ने क्या गलती कर दी
अब देखिए भाजपा। भारतीय जनता पार्टी। कहने को यह एक राष्ट्रीय पार्टी है। अटल बिहारी वाजपयी नेतृत्व के बाद नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इतनी बड़ी हासिल की है। लेकिन महाराष्ट्र क्या गलती कर दी। लीजिए आपको हम यह भी बतातें। हो सकता है इस बारे में आपको पता भी हो। लेकिन आप इस पर चर्चा तो कर ही सकते हैं ना। देखिए, शिवसेना की उग्र छवि के बारे में तो आप जानते ही हैं, हो सकता है कि पहले भी जानते हों। ऐसी स्थिति में भाजपा ने महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ गठबंधन कर सरकार बनाने सपना देखा।
यही गलती तो हो गई। शायद अगर अकेले दम पर संघर्ष किया जाता तो उम्मीद ज्यादा होती। हो न हो भारतीय जनता पार्टी के महाराष्ट्र में कुछ वरिष्ठ नेता भी इस गलती को महसूस कर चुके हैं। इसका उदाहरण गत दिनों महाराष्ट्र भाजपा की बैठक में देखने को मिला। कुछ भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने शिवसेना भाजपा के लिए नुकसानदायक करार देकर गठ बंधन तोड़ने की मांग उठाई। लेकिन कुछ दिनों उभरे हुए मतभेद शांत से पड़े गए। खैर, लेख का मकसद तो पूरा हुआ, और देखते हैं आगे क्या होता।












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