Mumbai psychiatric surgery: पहली बार भारत में हुई 'डिप्रेशन' सही करने की सर्जरी, ऑस्ट्रेलिया से आई थी महिला

Mumbai psychiatric surgery के कारण चर्चा में है। ऑस्ट्रेलियाई महिला का मुंबई में ऑपरेशन अपनी तरह का पहला ट्रीटमेंट है। हेल्थकेयर की खबरों में इस बात की चर्चा इसलिए भी हो रही है क्योंकि ये बेहद जटिल ऑपरेशन है।

सर्जरी के बारे में टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) की रिपोर्ट के अनुसार 38 वर्षीय ऑस्ट्रेलियाई महिला 26 वर्षों से अवसाद से जूझ रही थी। 2017 में मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम पारित होने के बाद से मुंबई में और संभवत: भारत में मनोरोग ऑपरेशन से गुजरने वाली पहली महिला बन गई।

Mumbai psychiatric surgery

खबर के अनुसार, नए अधिनियम के अनुसार, साइकोसर्जरी केवल तभी की जा सकती है जब मरीज सूचित सहमति दे। विशेष रूप से गठित राज्य मानसिक स्वास्थ्य बोर्ड से भी इसकी मंजूरी बेहद जरूरी है। इससे पहले अस्पताल के बोर्ड में ऐसे आवेदनों का मूल्यांकन होता था।

ऑस्ट्रेलियाई महिला रोगी का इलाज करने वाले न्यूरोसर्जन परेश दोशी से संपर्क करने और 28 मई को ऑपरेशन तक पूरा प्रोसेस 10 महीने में पूरा हुआ। राज्य से अनुमति के बाद जसलोक अस्पताल में सर्जरी की गई।

महिला का इलाज करने वाले डॉक्टर दोशी ने कहा, "मानसिक स्वास्थ्य बोर्ड स्थापित करने में महाराष्ट्र अन्य राज्यों से आगे रहा है। साथ ही ये प्रदेश सर्जरी की अनुमति देने वाला पहला राज्य भी बन गया है।"

डॉ दोशी बताते हैं कि अवसाद यानी डिप्रेशन को ठीक करने के लिए डीबीएस सर्जरी नियमित रूप से की जाती रही हैं। फिलहाल, केवल महाराष्ट्र और कर्नाटक में अवसाद के लिए इस ट्रीटमेंट का इस्तेमाल होता है।

अवसाद से पीड़ित कुछ लोगों ने डीबीएस सर्जरी की मदद से अपना उपचार कराया। कुछ रोगियों का इलाज डीप ब्रेन स्टिमुलेशन (डीबीएस) सर्जरी की मदद से किया गया, जिसमें न्यूरो मार्गों को बदलने के लिए मस्तिष्क में इलेक्ट्रोड लगाए जाते हैं।

डीबीएस का उपयोग कई न्यूरोलॉजिकल स्थितियों के लिए किया जाता है। पार्किंसंस से लेकर ओसीडी यानी obsessive-compulsive disorder और अवसाद जैसी मनोवैज्ञानिक परेशानी में ये सर्जरी कारगर है। इनमें अवसाद सबसे आम मानसिक स्वास्थ्य समस्या है।

कुछ अध्ययनों के अनुसार मानसिक समस्या कुल आबादी के 15% लोगों में होती है। उनमें से लगभग एक तिहाई को अवसाद है जो विभिन्न प्रकार के उपचारों से ठीक हो सकते हैं। चाहे वे गोलियाँ हों या शॉक थेरेपी।

2017 मेंटल हेल्थकेयर एक्ट के बाद भारत में पहली मनोरोग सर्जरी करने वाले डॉ. पारेख दोशी के अनुसार, पहले भी अवसाद से पीड़ित तीन रोगियों का ऑपरेशन किया है। वे स्वस्थ हैं।

महाराष्ट्र में स्वास्थ्य सेवाओं के निदेशक डॉ. स्वप्निल लेले ने कहा, महाराष्ट्र में बोर्ड का गठन कर ऑस्ट्रेलियाई मरीज के आवेदन का मूल्यांकन किया गया। त्वरित प्रतिक्रिया के बाद सर्जरी की गई। मनोरोगी अपना नाम नहीं बताना चाहती।

रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता 26 वर्षों से अवसाद से जूझ रहीं है। वर्षों तक अवसादरोधी दवाओं के अलावा भी उपचारों के कई तरीकों को आजमाने की कोशिश की। एक प्रशिक्षित व्यावसायिक चिकित्सक होने के बावजूद, उन्होंने सात साल पहले काम के लिए बाहर जाना बंद कर दिया था।

महिला के भाई ने बताया कि उसने 20 अलग-अलग एंटीडिप्रेसेंट आज़माए थे और उसे सामान्य से बहुत अधिक खुराक में कम से कम पांच दवाएं दी गई थीं। उसने ईसीटी (इलेक्ट्रोकनवल्सिव थेरेपी) और cognitive और व्यवहारिक थेरेपी भी ली थी, लेकिन कोई खास फायदा नहीं हुआ। उनके परिवार को डॉ. दोशी के बारे में दो ऑस्ट्रेलियाई रोगियों ने बताया। वर्षों पहले जसलोक अस्पताल में अवसाद के लिए उनकी डीबीएस सर्जरी हुई थी।

उनके भाई ने कहा, डॉ दोशी के साथ बातचीत के बाद, 10 महीने पहले मुंबई में इलाज पर प्रोसेस शुरू हुआ। ऑस्ट्रेलिया में डीबीएस की पेशकश नहीं की जाती है क्योंकि यहां भी अवसाद के लिए प्रायोगिक चिकित्सा होती है। मरीज की लगभग तीन सप्ताह पहले डीबीएस सर्जरी हुई थी।

डॉ. दोशी ने कहा, "डीबीएस सर्जरी के दौरान, मरीज जाग रहा होता है ताकि हम इलेक्ट्रोड लगाते समय प्रतिक्रियाओं को मैप कर सकें।" उन्होंने कहा, मरीज की चिंता काफी कम हो गई और सर्जरी के दौरान उसके मूड में थोड़ा सुधार हुआ। डॉक्टर ने कहा, सर्जरी का असर स्पष्ट रूप से दिखने में कुछ महीने लगेंगे।

मरीज और उसका भाई शुक्रवार को भारत से मेलबर्न रवाना हुए। निमहन्स (NIMHANS), बेंगलुरु के डॉ. जे रेड्डी ने कहा कि नए मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम के नियम मरीज के हितों की रक्षा के लिए बनाए गए हैं और यह सुनिश्चित किया गया है कि उसे अनावश्यक प्रक्रिया से न गुजरना पड़े।

मनोचिकित्सक को पहले यह तय करना होगा कि सर्जरी से मरीज को मदद मिल सकती है। इसके बाद एक न्यूरोसर्जन से परामर्थ लिया जाता है। डॉक्टर फिर मेडिकल बोर्ड का रुख करते हैं जो स्वतंत्र रूप से मूल्यांकन करता है कि मरीज को सर्जरी की जरूरत है या नहीं।''

डॉ. रेड्डी ने कहा, डीबीएस का उपयोग न्यूरोलॉजिकल मुद्दों के लिए 30 वर्षों से किया जा रहा है। लेकिन पिछले दशक में ही इसका उपयोग मनोरोगों के लिए किया जाने लगा। 500 से अधिक डीबीएस सर्जरी करने वाले डॉ. दोशी ने कहा कि दुनिया भर के अध्ययनों में अवसाद का इलाज करने के दौरान उत्साहजनक परिणाम मिले हैं।

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