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कैसे ममता बनर्जी के झटकों से कांग्रेस को मुंबई में भी लग रहा है करंट ?

मुंबई, 25 नवंबर: टीएमसी ने पिछले कुछ समय में जिस तरह से कांग्रेस नेताओं को तोड़कर ममता बनर्जी के पाले में लाया है, उससे कांग्रेस पार्टी के अंदर कई प्रांतों में खलबली मची हुई है। तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष जल्द ही महाराष्ट्र का भी रुख करने वाली हैं। गोवा में पार्टी ने जिस तरह से कांग्रेस के बड़े नेताओं को अपने खेमे में लाया है, उसके बाद कांग्रेस आरोप लगा रही है कि इससे बीजेपी की स्थिति मजबूत हो रही है। यही वजह कि कांग्रेस के नेताओं को लगने लगा है कि टीएमसी से सीखकर दूसरी पार्टियां भी उसके नेताओं को अपने में शामिल कराने की कोशिशें कर सकती हैं। सबसे ज्यादा कांग्रेस अपनी सहयोगी शिवसेना को लेकर आशंकित है।

कांग्रेस को ममता दे रही हैं बार-बार झटका

कांग्रेस को ममता दे रही हैं बार-बार झटका

टीएमसी अध्यक्ष ममता बनर्जी ने पिछले कुछ समय से कांग्रेस आलाकमान की जिस तरह से नीदें हराम कर दी हैं, उतना शायद वह भारतीय जनता पार्टी से भी विचलित नहीं होगी। टीएमसी 2024 में ममता-मोदी करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने दिल्ली में सोनिया गांधी से क्यों मिलना चाहिए कहकर अपना इरादा जाहिर कर दिया है। अबतक टीएमसी कांग्रेस नेताओं को ही तोड़ रही थी, अब सबसे पुरानी पार्टी होने का दावा करने वाले दल के सहयोगियों ने भी तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। महाराष्ट्र में कांग्रेस की सहयोगी एनसीपी के नेताओं की ओर से यह मांग उठने लगी है कि भाजपा-विरोधी मोर्चा के लिए पार्टी को गोवा में कांग्रेस के बजाए तृणमूल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के साथ तीसरा मोर्चा बनाने पर विचार करना चाहिए।

गोवा में टीएमसी की एंट्री से कांग्रेस में खलबली

गोवा में टीएमसी की एंट्री से कांग्रेस में खलबली

एनसीपी के एक नेता ने गोवा की राजनीतिक स्थिति के बारे में कहा है, 'हमने सुना है कि गोवा के कांग्रेसी नेता अपनी चुनावी रणनीति को लेकर आपस में भिड़ रहे हैं और ऑल इंडिया कांग्रेस कमिटी अब तक इसे सुलझाने में नाकाम रही है। एनसपी अब तक धैर्य रख रही है, लेकिन हम बहुत ज्यादा इंतजार नहीं कर सकते।' गोवा में कांग्रेस के बड़े नेता और पूर्व सीएम लुईजिन्हो फलेरियो पहले ही तृणमूल के हो चुके हैं। दरअसल, गोवा में एनसीपी से गठबंधन को लेकर कांग्रेस में अंदर ही काफी संघर्ष है और कांग्रेस टीएमसी को लेकर इस वजह से डरी हुई है कि कब कौन सा नेता पार्टी छोड़कर चला जाए।

टीएमसी यहां भी कांग्रेस को दे सकती है बड़ा झटका

टीएमसी यहां भी कांग्रेस को दे सकती है बड़ा झटका

गोवा ही नहीं, तृणमूल कांग्रेस असम, त्रिपुरा और बिहार से लेकर हरियाणा तक कांग्रेस को आए दिन झटके पर झटके दे रही है। बुधवार को ममता बनर्जी ने खुद कहा है कि आने वाले विधानसभा चुनावों में वह बीजेपी के खिलाफ क्षेत्रीय दलों को साथ लेने पर काम कर रही है और उत्तर प्रदेश में 'समाजवादी पार्टी जैसी मित्र पार्टियों' के लिए प्रचार करके खुश होना चाहती हैं। वो बोलीं कि 'गोवा में हमारी पार्टी पहले से ही है, और दूसरे राज्यों में जब भी मेरी पार्टी तय करेगी, मैं जाऊंगी।' उधर मेघालय में कांग्रेस के 17 विधायकों में से पूर्व मुख्यमंत्री मुकुल संगमा समेत 11 विधायकों के तृणमूल में शामिल हो गए हैं। इस तरह से उत्तर-पूर्व के इस राज्य में कांग्रेस मुख्य विपक्षी पार्टी भी नहीं रह जाएगी और टीएमसी को यह दर्जा मिल जाएगा।

महाराष्ट्र की ओर कूच करने की तैयारी ?

महाराष्ट्र की ओर कूच करने की तैयारी ?

इतना ही नहीं ममता बनर्जी ने महाराष्ट्र में भी कांग्रेस का टेंशन बढ़ाना शुरू कर दिया है। टीएमसी सुप्रीमो ने कहा है कि 1 दिसंबर को वो मुंबई में एक सम्मेलन में शिरकत करेंगी और उसी दौरान 'महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और शरद पवार से मिलूंगी।' महाराष्ट्र में दो साल से शिवसेना की अगुवाई वाली महा विकास अघाड़ी सरकार चल रही है, जिसमें शरद पवार की एनसीपी और कांग्रेस भी हिस्सेदार है। कांग्रेस के आंतरिक संकट के बीच जिस तरह से ममता बनर्जी ने अब खुलकर खुद को राष्ट्रीय स्तर पर प्रोजेक्ट करना शुरू किया है और उत्तर पूर्व से लेकर गोवा तक कांग्रेस का राजनीतिक जमीन हड़पने की कोशिश में हैं, वह सोनिया गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी से कम नहीं है।

कांग्रेस को मुंबई में भी लग रहा है करंट ?

कांग्रेस को मुंबई में भी लग रहा है करंट ?

महाराष्ट्र में पिछले दो वर्षों के एमवीए शासन में सत्ता की हिस्सेदार तीनों पार्टियों- शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी को पहली सियासी चुनौती अगले साल होने वाले बीएमसी चुनाव में मिलने वाली है। बीएमसी पर अभी शिवसेना का कब्जा है और उससे बाहर हो जाने पर उसकी स्थिति बिना पानी के मछली जैसी हो जाती है। कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व ने बार-बार ऐलान किया है कि वह ये चुनाव अकेले ही लड़ेगी। लेकिन, पूरे देश में टीएमसी की 'दोस्ती' देखने के बाद वह यहां कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। उसे डर है कि उद्धव ठाकरे की शिवसेना उसके मॉजूदा कॉर्पोरेटरों या संभावित उम्मीदवारों को जरूर तोड़ने की कोशिश करेगी। इसलिए पार्टी वहां एमवीए पार्टनर के बीच में 'एक-दूसरे के नेताओं को पार्टी में नहीं शामिल करने' का करार करना चाहती है। मुंबई कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष चरण सिंह सप्रा ने कहा है, 'बीएमसी चुनावों को लेकर एमवीए नेताओं के बीच नो पोचिंग पैक्ट के मसले पर बातचीत की जाएगी। इससे सुनिश्चित होगा कि बीएमसी चुनाव में एमवीए भागीदारों के बीच कोई नाराजगी और असंतोष नहीं है।'

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