बीजेपी-शिवसेना की चुनाव से पहले दरार ए जंग
महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव शुरू होने से पहले ही सियासी घमासान मच गया है। जहां इससे पहले कांग्रेस-एनसीपी में चुनावी रार थी तो अब भाजपा शिवसेना आमने-सामने हैं। भाजपा-शिवसेना की अंदरूनी कलह तो इतनी ज्यादा लग रही है कि इससे साफ हो गया है कि यदि शिवसेना या भाजपा में कोई भी पार्टी अगर ज्यादा सीटों पर जीत गई तो झगड़ा बढ़ना तय है। हो सकता है कि समर्थन वापस लेने तक की नौबत आ जाए।

यह अंदाजा भाजपा व शिवेसना के बयानों के आधार पर लगाया जा रहा है। शिवसेना ने अपने मुखपत्र में एक संपादकीय में कहा था कि ज्यादा हवस तलाक का कारण होती है। इस टिप्पणी को भाजपा के खिलाफ माना गया। काफी खबरें छपने के बाद महाराष्ट्र भाजपा इकाई ने शिवसेना के शब्दों पर नाराजगी जताई।
यही नहीं यह भी कयास लगाए जाने लगे हैं कि शिवसेना-भाजपा गठबंधन इस तरह की खुली कलह की वजह से भाजपा के वोटबैंक पर फर्क पड़ सकता है। जो साहनुभूति नरेंद्र मोदी के लिए लोकसभा चुनाव से पहले से अंत बनी हुई थी उस पर भी प्रभाव पड़ सकता है।
मतदान पंद्रह अक्टूबर को होना है। महाराष्ट्र विधानसभा में 288 सीटें हैं। शिवसेना ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए कह रही है। इसका दबाव भाजपा के आलाकमान तक पहुंच गया है। महाराष्ट्र भाजपा इकाई ने गत महिनों पहले भी शिवसेना से गठबंधन तोड़ने के लिए दबाव बनाया था लेकिन मामला अंदरूनी चर्चा के बाद संभाल लिया गया। अब फिर महाराष्ट्र भाजपा के नेताओं ने शिवसेना का विरोध जता दिया है। विरोध करते हुए शिवसेना की टिप्पणी पर पलटवार किया है।
कहा है कि नपुंसकता भी तलाक की वजह होती है। इसका मतलब निकाला जा रहा है कि यदि भाजपा ज्यादा सीटों पर जीती और शिवसेना का नेतृत्व बिलकुल कम रहा तो हो सकता है कि भाजपा शिवसेना से हमेशा के लिए नाता तोड़ ले। यहां नपुंसकता का अर्थ कम सीट पर जीतना या हार से लगाना चाहिए।












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