क्या खतरे में है मुंबई का Gateway Of India? निरीक्षण के दौरान सतह पर मिलीं दरारें
मुंबई में ऐतिहासिक Gateway Of India का हाल ही में निरीक्षण हुआ था, जिसमें पता चला था कि सतह पर दरारें आ गई है। गेटवे ऑफ इंडिया में दरारें आने की जानकारी लोकसभा में केंद्रीय संस्कृति मंत्री जी किशन रेड्डी ने भी दी है।

Gateway Of India Mumbai: गेटवे ऑफ इंडिया मुंबई में समुद्र की लहरों और तूफानों का सामना करते हुए पिछेल 113 वर्षों से आज भी मजबूती से खड़ा है। इस ऐतिहासिक गेटवे ऑफ इंडिया को देखने के लिए पर्यटक भी मुंबई आते हैं। लेकिन, अब यह बात सामने आ रही है कि इस ऐतिहासिक गेटवे ऑफ इंडिया में दरार आ गई है। इस बात की जानकारी केंद्रीय संस्कृति मंत्री जी किशन रेड्डी ने सोमवार 03 अप्रैल को खुद संसद को दी।
केंद्रीय संस्कृति मंत्री जी किशन रेड्डी ने लोकसभा में बताया कि गेटवे ऑफ इंडिया के निरीक्षण के दौरान सतह पर कुछ दरारें पाई गईं हैं। इस दौरान उन्होंने कहा कि गेटवे ऑफ इंडिया के निरीक्षण से पता चलता है कि यह संरक्षण की अच्छी स्थिति में है। दरअसल, लोकसभा में केंद्रीय मंत्री से सवाल पूछा गया था कि क्या हाल ही में गेटवे ऑफ इंडिया के स्ट्रक्चरल ऑडिट में सामने के हिस्से में दरार का पता चला है...।
तो इस पर मंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि गेटवे ऑफ इंडिया, मुंबई, एक केंद्रीय संरक्षित स्मारक नहीं है। यह पुरातत्व और संग्रहालय विभाग, महाराष्ट्र सरकार के संरक्षण में है। निरीक्षण के दौरान सतह पर कुछ दरारें पाई गईं लेकिन यह संरक्षण की अच्छी स्थिति में है। आगे मंत्री से पूछा गया कि उनको इसके संबंध में कोई रिपोर्ट सौंपी गई है। तो किशन रेड्डी ने इसका जवाब देते हुए कहा कि इस संबंध में केंद्र सरकार को कोई रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गेटवे ऑफ इंडिया के संरक्षण और मरम्मत के लिए पुरातत्व और संग्रहालय विभाग ने एक विस्तृत साइट प्रबंधन योजना तैयार की है। जिसके तहत पुरातत्व विभाग ने गेटवे ऑफ इंडिया के संरक्षण और मरम्मत के 8,98,29,574 रुपये की राशि का अनुमान लगाया है। उन्होंने कहा, पर्यटन और सांस्कृतिक मामलों के विभाग, महाराष्ट्र सरकार ने 10 मार्च को इसे मंजूरी दे दी है।
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बता दें, गेटवे ऑफ इंडिया का स्ट्रक्चरल ऑडिट हाल ही में किया गया था। वहीं ऑडिट के मुताबिक बिल्डिंग के अग्रभाग में दरारें देखी गई थीं। बिल्डिंग पर कई जगहों पर पौधे भी उगते देखे गए। वहीं, गुंबद में लगी वॉटरप्रूफिंग और सीमेंट कंक्रीट को भी नुकसान पहुंचा है। उसके बाद राज्य पुरातत्व और स्थापत्य निदेशालय ने जीर्णोद्धार के लिए शासन को 6.9 करोड़ का प्रस्ताव सौंपा है।












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