Election analysis: भाजपा-शिवसेना के तेवर देख कांग्रेस में आया भूचाल

मुंबई। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का मुंबई दौरा कांग्रेस के लिए भारी साबित हुआ है। इस दौरे ने महाराष्ट्र कांग्रेस छुपा भाजपा भय उजागर हुआ है। इसका स्पष्ट उदाहरण है कि दौरे के तुरंत बाद वो देखने को मिला जिसका अंदाजा भाजपा की लोकसभा में भारी जीत और कांग्रेस की ऐतिहासिक हार के बाद कांग्रेस को खुद हो गया होगा।

महाराष्ट्र कांग्रेस के पांच महारथी भाजपा, रांकपा के नेता सूर्यकांत पाटिल, बबनराव पाचपुते, कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष दत्ताभाऊ पाथ्रीकर और कांग्रेस के साथ पूर्व मंत्री रहे माधवराव किन्हालकर ने भाजपा जोइन कर ली। अमित शाह ने इस मौके का फायदा उठाते हुए कांग्रेस के जख्म में नमक छिड़कने का काम किया है। अमित शाह ने इसी अवसर पर कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन से टूटकर आए पांचों नेताओं को भगवा रंग का गमछा पहनाकर यह जता झट से शामिल कर दिया।

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शिवसेना-अपनी जमीन तलाश रही है

अभी हाल ही कुछ दिनों पहले तक शिवसेना की ओर से आ रहे भाजपा निर्णय विरोधी बयानों से ऐसा प्रतीत होने लगा था कि शिवसेना इस बार भाजपा के साथ या गठबंधन तोड़ देगी या फिर इसी साल अक्टूबर में होने वाले विधानसभा चुनावों में अधिक सीटों पर अपने उम्मीदवारों को उतारवाने का दबाव भाजपा पर बनाएगी। लेकिन अमित शाह के पहले ही मुंबई दौरे जाने से जैसे माहौल सृजित हुआ उससे शिवसेना के तेवर पानी-पानी हो गए। अगले महीने ही महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव हैं। ऐसे में विधानसभा की 288 सीटों पर लड़ने के लिए भाजपा पूरी एड़ी चोटी का जोर लगाने के लिए तैयार है।

महाराष्ट्र फतह करने के लिए कुछ भी करेगी

भाजपा के शुरूआती तेवरों ने बता दिया है कि पच्चीस वर्षों से महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव जीतने के लिए तरस रही भाजपा इस बार अपनी पूरी ताकत झोंकने के लिए तैयार है। भाजपा के वरिष्ठ नेता इस बार भले ही शिवसेना से गठबंधन तोड़ने के लिए चाहें। चाहे नरेंद्र मोदी भी शिवसेना के साथ बने रहना न चाहें लेकिन इस बार महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव फतह करने के लिए भाजपा ने शिवसेना का साथ न छोड़ने

का भी मन बना लिया है। यह शायद इसलिए भी है कि महाराष्ट्र में अन्य कोई विकल्प गठबंधन के लिए भाजपा के सामने नहीं है। लेकिन जिस तरह से अंदरूनी रूप से भाजपा-शिवसेना की कलह की सुगबुगाहट सुनाई दे रही है। उससे यही संकेत मिल रहे हैं कि अगर भाजपा महाराष्ट्र को इस बार विधानसभा चुनावों में फतह कर लेती है तो नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा शिवसेना को किनारे लगाने में जरा भी कसर नहीं छोड़ेगी। यह तब मुमकिन होना तय है जब भाजपा को पूर्ण बहुमत मिले।

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