Meerut News: मंत्री धर्मपाल सिंह ने मेरठ में किया ऐलान, कूड़े से बनने जा रहा है 'सोना', जानें क्या है सच?

Meerut News: मेरठ में जल्द ही एक ऐसा तकनीकी चमत्कार देखने को मिलेगा, जो न सिर्फ पर्यावरण को राहत देगा बल्कि कचरे से कमाई का रास्ता भी खोलेगा। यूपी सरकार की इस अनोखी पहल के तहत कूड़े से 'सोना' यानी उपयोगी उत्पाद तैयार किए जाएंगे। यह ऐलान प्रदेश सरकार में मंत्री धर्मपाल सिंह ने मेरठ दौरे के दौरान किया।

धर्मपाल सिंह ने बताया कि इस परियोजना के तहत एक विशेष मशीन तैयार की जा रही है, जो कचरे को अलग-अलग करके उपयोगी संसाधनों में बदलेगी। हालांकि अभी मशीन के निर्माण में कुछ तकनीकी दिक्कतें आ रही हैं, लेकिन अधिकारियों को भरोसा है कि जल्द ही इसका समाधान हो जाएगा।

Meerut News waste to wealth

मेरठ में यह योजना न सिर्फ शहर की सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाएगी, बल्कि कूड़ा निस्तारण की पारंपरिक सोच को भी पूरी तरह बदल देगी। मंत्री ने बताया कि इस मशीन के चालू होते ही कचरा प्रबंधन की दिशा में मेरठ पूरे प्रदेश के लिए एक उदाहरण बनेगा।

नगर निगम को दी गई विशेष जिम्मेदारी

मंत्री ने स्पष्ट किया कि नगर निगम के अधिकारियों को गीले और सूखे कूड़े के अलग-अलग निस्तारण की सख्त हिदायत दी गई है। उन्होंने बताया कि बहुत से लोग नालों में प्लास्टिक, गत्ता, फट्टे जैसी चीजें फेंक देते हैं, जिससे नालियां जाम हो जाती हैं और गंदगी फैलती है।

धर्मपाल सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नालों से गीला कूड़ा निकालने के बाद उसे सड़क किनारे न छोड़ें, क्योंकि वह फिर से बहकर नाले में चला जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे कूड़े का उचित निस्तारण जरूरी है, ताकि समस्या का स्थायी समाधान हो सके।

मेरठ दौरे के दौरान मंत्री ने विकास भवन में समीक्षा बैठक की और स्वच्छता अभियान की प्रगति का जायजा लिया। इसके बाद वे सीधे जनता के बीच पहुंचे और 'चाय पर चर्चा' के जरिए आम नागरिकों से संवाद किया।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सोच है कि विकास के हर पहलू में जनता की भागीदारी जरूरी है। चाय पर चर्चा का उद्देश्य भी यही था कि लोग खुलकर अपनी समस्याएं सामने रखें और प्रशासन उसका समाधान करे।

तकनीकी मशीन से बदलेगी कूड़े की तस्वीर

मेरठ में प्रस्तावित इस मशीन से कचरे से ऊर्जा, खाद और अन्य उपयोगी चीजें बनाई जाएंगी। मंत्री ने कहा कि जब यह मशीन काम करने लगेगी, तब यह न सिर्फ शहर की स्वच्छता को नई दिशा देगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी।

यह तकनीक 'वेस्ट टू वेल्थ' यानी कचरे को संपत्ति में बदलने के सिद्धांत पर आधारित होगी। इससे न केवल शहर की सफाई सुनिश्चित होगी, बल्कि इसके जरिए नगर निगम की आमदनी में भी इजाफा होगा।

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