UP Education: झाल की ताल पर 'गुरुजी' सीखा रहे पहाड़ा, वायरल वीडियो की हो रही तारीफ
UP Education: मऊ जिले के सलेमपुर में स्थित कंपोजिट विद्यालय में झाल बजाते हुए बच्चों को पहाड़ा सीखा रहे अध्यापक का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, वीडियो देखकर लोग शिक्षक की काफी तारीफ कर रहे हैं
UP Education: परिषदीय विद्यालयों में छात्रों को पढ़ाने के लिए अध्यापकों द्वारा नए-नए तरीके अपनाए जाते हैं। कई बार इससे संबंधित वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल होते रहते हैं। ताजा मामला मऊ जनपद के मोहम्मदाबाद गोहना विकास खंड के सलेमपुर में स्थित कंपोजिट विद्यालय का है। यहां पर एक अध्यापक द्वारा बच्चों को भजन कीर्तन की तरह पढ़ाया जाता है। अध्यापक द्वारा बच्चों को पढ़ाते समय किसी ने वीडियो बना लिया और उसे सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया। देखते ही देखते हैं वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा और लोगों द्वारा गुरु के पढ़ाने के तरीके को अद्भुत बताते हुए प्रशंसा भी की जा रही है।

शिक्षक बोले- पहले लोगों द्वारा की गई उपेक्षा
सलेमपुर कंपोजिट विद्यालय में वर्ष 2011 से तैनात अध्यापक सुभाष कुमार बताते हैं कि बच्चों को पढ़ाने के लिए उनके द्वारा अक्सर नए नए तरीके अपनाए जाते हैं। बच्चों को पढ़ाते समय उन्हें लगा कि भजन कीर्तन के माध्यम से पढ़ाने पर बच्चे मनोरंजन और धार्मिक तरीके से शिक्षा ग्रहण करेंगे और गुनगुनाते हुए गिनती पहाड़ा याद कर सकेंगे। ऐसे में अध्यापक सुभाष कुमार बाजार से झाल खरीद लाए और उसे बजाते हुए बच्चों को गिनती पहाड़ा करवाना शुरू कर दिए। सुभाष कुमार बताते हैं कि पहले उनकी उपेक्षा की गई कई लोग उनका मजाक उड़ाते थे। लेकिन बाद में बच्चों को जब यह पसंद आने लगा और बच्चे खुद गुनगुनाने लगे तो लोगों द्वारा इसका समर्थन भी किया जाने लगा।

बच्चों की बढ़ गई संख्या, अधिकारी भी खुश
शिक्षक द्वारा पढ़ाने के लिए जो तरीका अपनाया गया उससे बच्चे काफी खुश हुए और पढ़ाई में भी उनका मन लगने लगा। बताया जा रहा है कि शिक्षक सुभाष कुमार के क्लास में सभी बच्चे हमेशा खुश रहते हैं। पढ़ाने के नए तरीके के चलते विद्यालय में धीरे-धीरे बच्चों की संख्या में काफी इजाफा हुआ। बच्चों की संख्या में वृद्धि के चलते अधिकारियों द्वारा भी इस पर खुशी जाहिर की जाती है। अधिकारी कहते हैं कि अन्य अध्यापकों को भी सुभाष कुमार से सीख लेनी चाहिए और उनकी तरह बच्चों को पढ़ाना चाहिए।

बच्चों को दी जाती है संस्कारों की शिक्षा
प्रतिदिन छुट्टी होने से कुछ देर पहले सभी कक्षा के छात्रों को एक साथ राउंड में बैठा दिया जाता है और बीच में एक टेबल पर बैठकर सुभाष कुमार बच्चों को कविता और भजन कीर्तन के माध्यम से गिनती और पहाड़ा याद करवाते हैं। बताया गया कि विद्यालय में बच्चों को किताबी ज्ञान देने के साथ ही उन्हें संस्कारों की भी शिक्षा दी जाती है। यही कारण है कि बच्चों द्वारा किसी से मुलाकात करते समय अपने संस्कारों का भी परिचय दिया जाता है।

बच्चों की जुबान पर 20 तक का पहाड़ा
भजन कीर्तन की तरह पढ़ाने के चलते बच्चों को 20 तक का पहाड़ा पूरी तरह याद हो गया है। गिनती और पहाड़ा के अलावा अन्य विषयों की पढ़ाई भी सुभाष कुमार द्वारा इसी तरीके से कराई जाती है। इस बारे में बीएसए डॉ संतोष कुमार सिंह ने बताया कि छात्रों का मनोरंजन करने के साथ ही उन्हें मोटिवेट करते हुए पढ़ाने से जो कुछ पढ़ाया जाता है वह बच्चों को याद रहता है। संतोष कुमार की तरह अन्य अध्यापकों को भी बच्चों को मोटिवेट करते हुए पढ़ाना चाहिए।












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