Amethi के आरिफ के बाद अब Mau से सामने आई रामसमुज और सारस की दोस्ती, क्या इसका भी होगा वही अंजाम?

इन दोनों के बीच ऐसी ही दोस्ती है जैसे अमेठी के आरिफ की थी। घायल सारस का डेढ़ साल पहले जब पैर में चुभा कांटा रामसमुज ने निकाला था तो उन्हें भी शायद यह अंदाजा नहीं था कि यह घटना उन्हें इस बेजुबान का दोस्त बना देगी।

same as Arif friendship of Ramsamuj and Saras going viral from Ghosi tehsil Baraipar village mau

भारत को विभिन्न प्रकार के जाती, धर्म, भाषा और संस्कृति के साथ ही भारत के विभिन्न प्रकार के जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों के लिए भी जाना जाता है। भारत की पहचान ही विभिन्नता से है और इसी में समाहित है जीव-जंतु, पशु-पक्षी।

Recommended Video

    Amethi के आरिफ के बाद अब Mau से सामने आई रामसमुज और सारस की दोस्ती, क्या इसका भी होगा वही अंजाम?

    आप सोच रहे होंगे ये सब हम क्यों बता रहे है? दरअसल मामला पशु-पक्षियों और इंसानो के बीच जुड़े रिश्तों से है। जनपद मऊ से एक ऐसी तस्वीरें भी सामने आ रही है जो किसी को भी हैरान कर देंगी।

    हम बात कर रहे है सारस की जिसे इंसानो के साथ रहना सरकार को भी नागवार है अगर आप ने उसे अपने पास रखा तो न केवल पशु क्रूरता माना जायेगा बल्कि आप के ऊपर कानूनी कार्रवाई भी तय है।

    आरिफ के बाद रामसमुज और सारस की प्रेम कहानी
    कुछ माह पहले एक सारस को एक युवक के साथ खेलते कूदते और खाना खाते लोगो ने देखा था, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर आज भी तैर रहा है। जो आरिफ और सारस की प्रेम कहानी से प्रचलित है। वही अब एक और वीडियो सोशल मीडिया पर सुर्खिया बटोर रहा है जो रामसमुज और सारस की प्रेम कहानी से जाना जा रहा है।

    मिलती जुलती हैं दोनों कहानियां
    वन विभाग ने आरिफ से सारस को अलग तो कर दिया लेकिन आज भी सारस अपने आरिफ का इंतेजर करता देखा जा सकता है। वही मऊ के रहने वाले रामसमुज ही नहीं, बल्कि उनका सारस हर एक गांव वाले के दिल में जगह बना चुका है। इस सारस की कहानी अमेठी के आरिफ से मिलती-जुलती है। यह भी रामसमुज की एक आवाज पर दौड़ा चला आता है और उन्ही की थाली में खाना खाता है।

    अमेठी के आरिफ और सारस की दोस्ती का किस्सा पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गया। दोनों के प्रेम की ये तस्वीर हर किसी को छू गयी लेकिन कानून के आगे हर कोई बेवस और लाचार दिखा। अंततः वो सारस अब चिड़ियाघर में हैं। वहीं इसके बाद सारस के साथ दोस्ती के कई किस्से सामने आए। उन्ही में से एक है मऊ के घोसी विधानसभा क्षेत्र के बरईपार गांव के रामसमुज और सारस की दोस्ती।

    पूरा गांव का चहेता है ये सारस
    मिली जानकारी के मुताबिक मऊ के घोसी तहसील से 3 किलोमीटर दूर स्थित बरईपार गांव में रहने वाले रामसमुज को डेढ़ साल पहले सारस घायल अवस्था में मिला था। यह सारस सिर्फ रामसमुज का ही नहीं बल्कि पूरे बरईपार का चहेता है और पूरा बरईपार अब उसका घर है। गांव वालों के साथ काफी घुला- मिला हुआ है। ऐसे में वह कहीं भी स्वछन्द विचरण करता है। गांव के लोगो में इस सारस के लिए प्रेम इतना है कि प्रकृति भी इस नजारे को देख हैरान है।

    ऐसे हुई रामसमुज से दोस्ती
    रामसमुज ने मीडिया को बताया कि डेढ़ साल पहले वो और उसके दोस्त गांव के बाहर गए थे। जहां एक सारस गंभीर अवस्था में दिखाई दिया। वो अपने पैर को घसीट कर चल रहा था। उसके पैर से खून भी आ रहा था। वो पूरी तरह से दर्द में था। सारस को लहू-लुहान और दर्द में देख रहा नही गया और जब हाथ में रूमाल बांधकर मैं उसके करीब गया तो उसने चोंच मारनी शुरू की। पर मैंने हिम्मत नहीं हारी और उसके पैर का कांटा निकाल दिया। जिससे और तेजी से खून आने लगा। इसपर मैंने उसके पैर में अपना रुमाल बांध दिया और उसे गाड़ी पर लादकर दोस्त की मदद से घर ले आया। उसका उपचार करने लगा बल्कि एक मासूम बच्चे की तरह उसकी देख-भाल किया।

    महज़ 2 हफ्ते में रामसमुज का दीवाना हो गया घायल सारस
    रामसमुज ने बताया कि घर पर ही उसके घाव पर सूखने वाली दवा लेकर डाली और 15 दिन में उसका घाव भर गया। इस दौरान वह मेरे घर में रहा और मेरे साथ सोना और खाना खाना उसका रूटीन बन गया। उसके बाद वह पहले तो घर से बाहर निकलने में घबराता था लेकिन अब मै जब भी घर से निकलता हूँ तो वह मेरे साथ निकल जाता है। अब तो वह गांव वालों से भी नहीं डरता और उनके दिए सामान को भी खाकर मस्त हो जाता है। बस एक आवाज लगाइए वो दौड़े चला आता है।

    जब एक दिन कहीं अचानक चला गया था सारस
    इंसानो और जानवरों के बीच रिश्ते जितने मधुर हैं उतने ही कड़वे भी है। लेकिन रामसमुज का सारस पूरे गाँव का दुलारा बन गया जो प्रकृति का एक सन्देश है कि तुम हमसे प्रेम करो हम तुम्हरी अमानत है। ग्रामीणों ने बताया कि एक बार सारस कहीं चला गया था जिसके बाद पूरे गांव में हड़कंप मच गया था। सभी परेशान थे और बच्चे रो रहे थे, लेकिन अचानक सारस लौट आया और सभी ने राहत की सांस ली।

    ग्रामीणों को सताने लगा डर, क्या इसे भी ले जाएगी सरकार
    आरिफ और सारस की दोस्ती चिड़ियाघर पहुंचकर समाप्त हुई। उन्हें एक दूसरे से दूर करना लोगो को भी रास नही आया और सरकार को लोगो ने जम कर ट्रोल किया। लेकिन नियमो और कानून के आगे सब लाचार दिखे। दरअसल सारस राजकीय पक्षी है। ऐसे में उसे पालने के कई नियम और कानून है। इन नियमों के विरुद्ध जाकर उसे नहीं रखा जा सकता। ऐसे में रामसमुज और उनके पूरे गांव को इस बात का डर है कि आने वाले दिनों में यह सारस भी चिड़ियाघर में न दिखाई दे।

    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+