गलत तरीके से कब्रिस्तान के नाम दर्ज करवाई गई वृंदावन बांके बिहारी मंदिर की जमीन, हाईकोर्ट ने उठाया ये कदम
वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर पर हिंदू पक्ष ने अपना दावा किया है, जिस वजह से वहां पर कोर्ट के आदेश के बाद ASI सर्वे हो रहा। इस बीच वृंदावन के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर की जमीन को लेकर विवाद खड़ा हो गया। जिसका मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट भी पहुंचा। कोर्ट ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है।
जानकारी के मुताबिक मंदिर का स्वामित्व कब्रिस्तान के नाम पर दर्ज हो गया है। जिससे विवाद खड़ा हो गया। इस मामले को लेकर तुरंत हिंदू पक्ष इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा। कोर्ट ने याचिका की गंभीरता को देखते हुए तहसीलदार से जवाब मांगा है।

मामले के याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि छाता में बांके बिहारी जी महाराज मंदिर की जमीन को गलत तरीके से कब्रिस्तान के रूप में दर्ज कर दिया गया है। ऐसे में तुरंत कोर्ट इसको सही करने का निर्देश दे।
याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को ये भी बताया कि पहले गाटा संख्या 1081 बांके बिहारी जी के नाम पर दर्ज था, लेकिन 1994 में एक बड़ा खेल हुआ। भोला खान पठान ने राजस्व अधिकारियों के साथ मिली भगत की। साथ ही मंदिर की जमीन को कब्रिस्तान में दर्ज करवा दिया। इसके बाद भी अधिकारियों की लापरवाही जारी रही।
उन्होंने कोर्ट को बताया कि मंदिर ट्रस्ट ने तुरंत इसकी आपत्ति दर्ज करवा दी थी। साथ ही वक्फ बोर्ड तक भी मामला गया। इस मामले की जांच की गई, जिसमें साफ हुआ कि जमीन मंदिर के ही नाम है, उसे गलत तरीके से कब्रिस्तान में दिखाया गया। इसके बावजूद भी जमीन मंदिर के नाम नहीं दर्ज हुई।
वहीं सरकार की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि राजस्व रिकॉर्ड में अब प्रविष्टियां कब्रिस्तान से पुरानी आबादी में बदल दी गई हैं। सभी पक्षों को सुनने के बाद जस्टिस सौरभ श्रीवास्तव की बेंच ने तहसीलदार से जवाब मांगा। कोर्ट ने साफतौर पर कहा कि तहसीलदार व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश हों। साथ ही मामले की रिपोर्ट दें।
क्या है मंदिर का इतिहास?
ये मंदिर मथुरा जिले के वृंदावन धाम में बिहारीपुरा में स्थित है। ये भगवान कृष्ण को समर्पित है, जिस वजह से देश-विदेश से लोग यहां दर्शन करने के लिए आते हैं। इस मंदिर का निर्माण 1864 में स्वामी हरिदास ने करवाया था।












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