Mathura के 'ऋषभ' कर रहे थे चंद्रयान-3 को ट्रैक, ISRO के आगामी मिशन के बारे में बताई रोचक बातें
चंद्रयान-3 की सफलता में कान्हा की नगरी मथुरा के बेटे का भी योगदान है। यहां के रहने वाले ऋषभ अग्रवाल ISRO में वैज्ञानिक हैं। इस मिशन में ऋषभ की भूमिका बेहद ही महत्वपूर्ण थी। चंद्रयान-3 से सिग्नल प्राप्त कर उससे कम्यूनिकेशन स्थापित करना इनकी टीम की जिम्मेदारी थी, जिससे चंद्रयान-3 को ट्रैक किया जा रहा था।
वृंदावन पब्लिक स्कूल से हुई स्कूलिंग
आपको बता दें कि गोविंद नगर निवासी ऋषभ अग्रवाल तीन भाई बहनों में सबसे छोटे हैं। ऋषभ के भाई और मां ने बताया कि ऋषभ बचपन से ही पढ़ने में बहुत अच्छा था। उसकी पढ़ाई वृंदावन पब्लिक स्कूल एवं अमरनाथ विद्याश्रम से हुई है। ऋषभ अग्रवाल ने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से बीटेक इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्यूनिकेशन किया है। साथ ही आईआईटी रुड़की में प्रथम वर्ष में एमटेक में प्रवेश लिया था। इसी दौरान 2018 में इसरो में ऋषभ का चयन हुआ था।

चंद्रयान-3 को ट्रैक कर रहे थे ऋषभ
वहीं मिशन के बारे में सवाल करने पर ऋषभ ने बताया कि इस मिशन में 100 से अधिक वैज्ञानिक जुटे थे, जिन्हें कई टीमों में बांटा गया था। इनकी टीम का काम चंद्रयान-3 से सिग्नल प्राप्त करने के बाद उससे कम्यूनिकेशन स्थापित करना था। चंद्रयान-3 को इसी से ट्रैक किया जा रहा था। ऋषभ ने ये भी बताया कि इनके विभाग 'इसरो टेलीमेटरी ट्रेकिंग एंड कमांडिंग नेटवर्क' का काम चंद्रयान-3 की लॉन्चिंग के साथ ही शुरू हो गया था।

सूर्य की शाखा में सेटेलाइट भेजना अगला मिशन
बातचीत के दौरान ऋषभ ने एक बेहद ही रोचक बात भी बताई। उन्होंने बताया कि ISRO चंद्रयान की सफलता के बाद अब सूर्य की शाखा में भी भारतीय सेटेलाइट भेजने की योजना पर काम कर रहा है। इसके साथ ही भविष्य में मंगल और शुक्र ग्रह पर भी सेटेलाइट भेजे जाने की योजना चल रही है। उधर, ऋषभ के भाई और मां का कहना है कि उन्होंने भारत के साथ-साथ मथुरा का भी नाम रोशन किया है।












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