संत रमेश बाबा ने कहा- पद्मश्री मेरे किसी काम का नहीं

Mathura news, मथुरा। पर्यावरण पुरोधा और ब्रज के विरक्त संत रमेश बाबा को पद्मश्री मिलने की घोषण से ब्रज में जरूर खुशी का माहौल है, लेकिन बाबा को इससे कुछ खास फर्क नहीं पड़ता। दरअसल, पद्मश्री मिलने की घोषणा के बाद जब बाबा से उनकी प्रतिक्रिया ली गई तो उन्होंने कहा, ''पद्मश्री से हमें कोई लाभ नहीं, हमारे किसी काम का नहीं है ये, हां इससे लोगों मे जनजागृति आ सकती है।''

सब काम भगवान की कृपा से होता है

सब काम भगवान की कृपा से होता है

गौसेवा को लेकर किए गए सवाल पर रमेश बाबा ने कहा, ''हम कुछ सेवा नहीं कर सकते, हमारी कोई सामर्थ्य ही नहीं है, सब काम भगवान की कृपा से होता है, वो ही कर रहे है।'' रमेश बाबा ने कहा कि वह सरकार से कोई उम्मीद नहीं करते, क्योंकि दो बार सरकारों से यमुनाजी की स्वच्छता की इच्छा जाहिर की, लेकिन निराशा ही मिली, इसलिए हम बस प्रभु पर विश्वास करते हैं कि वो ही सब कार्यों को करेंगे।

94 शख्सियतों को पद्मश्री सम्मान की घोषणा

94 शख्सियतों को पद्मश्री सम्मान की घोषणा

बता दें, भारत सरकार ने गणतंत्र दिवस के एक दिन पहले देश में विभिन्न क्षेत्रों में विशेष उपलब्धि हासिल करने वाली 94 शख्सियतों को पद्मश्री सम्मान से नवाजने की घोषणा की है। इसके अंतर्गत ब्रज के बरसाना में रह रहे विश्व विख्यात ब्रज निष्ठ सन्त रमेश बाबा महाराज के नाम की भी घोषणा की गई है।

55 हजार गौवंश की सेवा कर रहे हैं रमेश बाबा

55 हजार गौवंश की सेवा कर रहे हैं रमेश बाबा

रमेश बाबा 55 हजार गौवंश की सेवा कर रहे हैं। उन्होंने ब्रज के पर्वतों को खनन माफियाओं से बड़े संघर्ष के बाद बचाया, भगवान की लीलाओं से जुड़े ब्रज में स्थित वन, कुंड, सरोवरों के अस्तित्व को बचाने के दिये बहुत कार्य किया। इन सब उपलब्धियों को देखते हुए सरकार ने पद्मश्री के लिये रमेश बाबा का चयन किया।

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