निधिवन : वह रहस्यमयी जगह जहां भगवान श्रीकृष्ण आज भी करते हैं रासलीला
मथुरा, 30 अगस्त: देशभर में आज भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। भगवान कृष्ण की झांकियां सजाई गई हैं। कान्हा के भक्त कृष्णमय होने लगे हैं। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी भाद्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के मुताबिक, इस बार 29 अगस्त को रात के 11.25 बजे से अष्टमी तिथि शुरू हो रही है, जो 30 अगस्त को रात 1.59 तक रहेगी। इस मौके पर हम आपको रहस्यमयी वृंदावन में स्थित निधिवन के बारे में बता रहे हैं। मान्यता है कि श्रीकृष्ण आज भी यहां रासलीला करते हैं।

निधिवन, जहां आज भी रासलीला रचाने आते हैं श्रीकृष्ण
वृंदावन को भगवान श्रीकृष्ण की भूमि के रूप में जाना जाता है। यहां मौजूद निधिवन आज भी लोगों के लिए एक रहस्य बना हुआ है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह वही स्थान है, जहां भगवान कृष्ण आज भी आते हैं और हर रात यहां आकर रासलीला करते हैं। उनके साथ राधा और उनकी सभी गोपियां भी रासलीला करने और आनंद लेने यहां आती हैं। जानकारों का भी मानना है कि इस जंगल में भगवान श्रीकृष्ण का वास है, इसलिए हर कोई यहां कि मिट्टी को माथे से लगाना चाहता है।

शाम होते ही जानवर भी बदल देते हैं अपना ठिकाना
निधिवन घना और हरा जंगल है, जिसमें सैकड़ों पेड़ मौजूद हैं। ये पेड़ अपने आप में काफी अनोखे हैं, क्योंकि अच्छी जड़ों और शाखाओं के होने बाद भी ये सभी पेड़ खोखले हैं। फिर भी ये जंगल पूरे साल हरे-भरे रहते हैं। यहां मुश्किल से जानवर और अन्य जीव पाए जाते हैं। कहा जाता है कि इस इलाके के तमाम जानवर भी शाम होते होते अपना ठिकाना बदल लेते हैं।

हर रात कक्ष में सजाया जाता है बिस्तर
निधिवन में एक मंदिर भी है, जिसमें भगवान कृष्ण और राधा की मूर्तियां सुशोभित हैं। कुछ ही दूरी पर रंग महल नामक एक और मंदिर है, जिसका अपना विशेष महत्व है। माना जाता है कि यह रंग महल है, जहां भगवान कृष्ण स्वयं अपनी प्रिय राधा को सजाते हैं। वृंदावन का ये मंदिर उन सभी चीजों से भरा है, जिन चीजों की देवताओं को आवश्यकता हो सकती है। महंत बताते हैं कि हर रात भगवान श्री कृष्ण के कक्ष में उनका बिस्तर सजाया जाता है। दातून और पानी का लोटा रखा जाता हैं। जब सुबह मंगला आरती के लिए पंडित उस कक्ष को खोलते हैं तो लोटे का पानी खाली, दातून गिली, पान खाया हुआ और कमरे का सामान बिखरा हुआ मिलता है।

रात में जिसने भी निधिवन जाने की कोशिश की, वो...
इस स्थान पर समय का सख्त ध्यान रखा जाता है। मंदिर शाम 5 बजे बंद हो जाता है। इसके बाद किसी को भी निधिवन के आसपास घूमने की इजाजत नहीं है। यानि इस समय के बाद कोई भी निधिवन के आसपास भी नहीं जा सकता है। बताते हैं कि जिसने भी रात में निधिवन में जाने की कोशिश की, वह या तो अपना मानसिक संतुलन खो बैठता है, या सदमे से मर जाता है।












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