Mathura: वजन 110 किलो, ऊँचाई 43 इंच, उम्र महज 3 वर्ष, जानिए और क्या है इस राजस्थानी नस्ल के बकरों में खास
राजस्थान से आया यह बकरा मथुरा के बकरी मेले में चर्चाओं का विषय इसलिए बना क्योंकि 110 किलो के इस बकरे की उम्र महज 3 साल है। इसकी ऊँचाई लगभग एक आदमी के बराबर है। यह बकरा प्रति दिन 100 से 110 ग्राम तक बढ़ जाता है।

कहीं पैरों में घुंघरू बाँध मुंह उठाकर इठलाती हुई बकरियां रैम्प पर कैटवॉक करती दिखीं तो कहीं बकरे अपने मशल्स दिखाते नजर आए। मथुरा स्थित केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थाएन (सीआईआरजी) में आज आयोजित बकरी मेले में ये सब देखने को मिला। इस मेले में 11 प्रांतों से आए 1000 से अधिक किसानों ने भाग लिया, जिनमे बकरे और बकरियों के बीच कई प्रकार की प्रतियोगिताएं कराई गई। लेकिन राजस्थान से आया एक 110 किलो का बकरा इस प्रतियोगिता में चर्चाओं का विषय बन गया। आइये जानते हैं और क्या खास है इस बकरे में और क्यों इसे प्रथम पुरस्कार दिया गया।

अध्भुत होता है ये बकरी मेला
पहले तो आपको इस मेले के बारे में अवगत करवाते हुए बताते चलें कि मथुरा के केंद्रीय बकरी अनुसंधान केंद्र में एक दिवसीय राष्ट्रीय बकरी मेले का आयोजन किया गया। वहीं इस राष्ट्रीय बकरी मेले के दौरान किसान गोष्ठी का आयोजन भी किया जा रहा है। इसके अलावा मेले में पशु पालन प्रोद्योगिकी प्रदर्शन, बकरी उत्पाद एंव मूल्य संवर्धन तकनीकी प्रदर्शन, विभिन्न नस्लों की बकरियों का प्रदर्शन, बकरी पालन के क्षेत्र में आने वाली विभिन्न समस्याओं के समाधान हेतु किसान-वैज्ञानिक परिचर्चा, वैज्ञानिक बकरी पालन प्रशिक्षण, बकरी पालन व्यवसाय एवं कृषि से संबंधित विभिन्न औद्यागिक इकाइयों द्वारा प्रदर्शनी भी लगाई गई। साथ ही बकरी स्वास्थ्य शिविर का आयोजन भी किया गया।

बिकाऊ नहीं है ये बकरा, लग चुकी है 6 लाख रुपए कीमत
वही राजस्थान से आया यह बकरा इस प्रतियोगिता में चर्चाओं का विषय इसलिए बना क्योंकि 110 किलो के इस बकरे की उम्र महज 3 साल है। यह बहुत ही कम देखने को मिलता है कि 3 वर्ष की उम्र में बकरे का वजन 110 किलो हो गया हो। इसके इलावा बकरे की लंबाई 43 इंच है। तस्वीरों में आप देख ही सकते हैं कि कैसे ये बकरा एक आदमी के कंधे तक ऊंचा है। इसलिए इस बकरे को प्रथम पुरस्कार दिया गया है।
बकरी के मालिक ने जानकारी देते हुए बताया कि यह बकरा 'सोजत' नस्ल का है, जिसकी जानकारी नीचे दी गई है। वहीं उन्होंने यह भी कहा कि आज हमें इस बकरे की वजह से सम्मान मिल रहा है। यह हमारे लिए गर्व की बात है। इस बकरे की कीमत 6 लाख लॉक रुपए लग चुकी है, फिर भी वो इसको बेचने के लिए तैयार नहीं है।

जानिए सोजत नस्ल में क्या होता है खास
मथुरा के मेले में प्रथम पुरुस्कार जीतने वाली ये सोजत नस्ल, भारत के राजस्थान के पाली जिले के सोजत तहसील में उत्पन्न होने वाली घरेलू बकरी की एक भारतीय नस्ल है। सोजत नस्ल ज्यादातर फलोदी, सोजत, पिपर, जोधपुर और राजस्थान के कुछ अन्य क्षेत्रों के बेल्ट के बीच पाई जाती है। सोजत बकरी जमुनापारी हैदराबादी बकरियों की क्रॉस ब्रीड है। इस नस्ल का सोजत नाम सोजत तहसील से लिया गया है।
सोजत बकरी को इसलिए लोग पसंद करते हैं क्योंकि उसका गोश्त ( मांस ) बहुत स्वादिष्ट होता है। सोजत बकरी की नस्लों को ज्यादातर मांस के लिए पाला जाता है। बकरी-ईद जैसे धार्मिक त्योहार के दौरान आमतौर पर सोजत नस्ल की कुर्बानी की जाती है। बकरी की नस्ल व्यावसायिक बकरी पालन के लिए पहली पसंद बन गई, क्योंकि इसके दिखने या शुद्ध सफेद रंग के कारण, यह बहुत अच्छा वजन प्राप्त करती है।

क्या खाते हैं इस नस्ल के बकरे
वहीं इस नस्ल की बकरियों को सामान्य चराई के बजाय झाड़ियों, पेड़ के पत्तों और घास के शीर्ष पर ब्राउज़ करती है। बकरियों के चारे में हरि पत्ती का प्रयोग करते हैं। यह उनके लिए बहुत फायदेमंद होता है और साथ ही उन्हें ग्वार का भूसा, मूंगफली का भूसा आदि भी देते हैं।
आमतौर पर होते हैं जुड़वाँ बच्चे
सोजत बकरी खूबसूरत, शुद्ध, सफेद या गुलाबी रंग की दिखती है। सोजत बकरी के सिंग नहीं होती है। सोजत के कान ठीक ठाक लंबे होते हैं। यह 3 से 12 महीने की उम्र में 130 ग्राम प्रति दिन शरीर के वजन को प्राप्त करती है। हालाँकि इसके दूध की पैदावार कम होती है। डेढ़ साल में दो बार बच्चा पैदा कर सकते हैं। और जुड़वाँ बच्चे बहुत आम हैं। यह बकरी की नस्ल अपने त्वरित वजन बढ़ाने के लिए जानी जाती है। सोजत बच्चा का जन्म वजन लगभग 2 से 2.5 किलोग्राम होता है।

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किसी भी प्रकार के वातावरण को अनुकूल बनाने की क्षमता
इनकी सबसे खास बात ये है कि सोजत खुद को किसी भी वातावरण और जलवायु के साथ आसानी से अपना सकती है। आम तौर पर भारत में किसी भी प्रकार के वातावरण को अनुकूल बनाने की क्षमता सोजत के पास है। यह किसी भी वातावरण में अच्छी ऊंचाई और वजन हासिल कर सकती है। सोजत बकरी दूध उत्पादन को काफी अच्छी, बेहतर अनुकूलन क्षमता, त्योहारों में बहुत अधिक मांग, अच्छी उत्पादन क्षमता देती है। सोजत बकरी तेजी से बढ़ने वाली नस्ल है। सोजत बकरी की नस्ल का वजन सामान्य चारा या अर्ध-गहन बकरी पालन पद्धति से 0 से 3 महीने की उम्र में प्रति दिन 100 से 110 ग्राम तक बढ़ जाता है।












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