Mathura: सोने के हनुमान जी पर विराजमान होकर नगर भ्रमण को निकले ठाकुर जी, देखें 'रथ के मेले' की आकर्षक तस्वीरें

सन 1851 में निर्मित दक्षिण भारतीय वास्तु शैली के इस दिव्य देश में भगवान रंगनाथ, श्री तिरुपति बालाजी, भगवान नरसिंह, भगवान सुदर्शन के श्री विग्रह प्रमुख रूप से विराजित है। श्री रंगनाथ मंदिर का अपनी विशिष्ट पूजा पद्धति के क

Mathura Thakur ji Sitting on the golden Hanuman ji see the attractive pictures of Rath ke Mela

श्री रंगनाथ मंदिर में वैसे तो प्रतिदिन मंगल उत्सवों की श्रंखला अनवरत रूप से जारी रहती है।लेकिन इनमें सबसे प्रमुख ब्रह्मोत्सव है। जिसका उदभव वैदिक परंपरा से हुआ है। इस बार दक्षिण भारतीय शैली के विशालतम श्री रंगनाथ मंदिर में 10 मार्च से 19 मार्च तक यह 10 दिवसीय ब्रह्म उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इसी के अंतर्गत आज ठाकुर जी सोने के हनुमान जी पर विराजमान होकर नगर भ्रमण को निकले और साथ ही रंगनाथ जी के बड़े बगीचे में आतिशबाजी का आयोजन भी किया गया।

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50 फीट ऊंचे रथ पर विराजमान ठाकुर जी
कान्हा की नगरी वृंदावन मैं ब्रह्मोत्सव अंतर्गत भगवान गोदा रंगमन्नार सुबह और शाम सोने चांदी के दिव्य वाहनों पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देकर कृतार्थ कर रहे हैं। जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु जमा हुए। इस दौरान सभी ने आतिशबाजी और भगवान के दिव्य दर्शन कर आनंद लिया। लगभग 50 फीट ऊंचे रथ में ठाकुर जी चैत्र कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि पर अपने परिकर के साथ विराजमान होकर भक्तों को कृतार्थ किया।

क्या है पौराणिक कथा
मान्यता है कि सृष्टि रचियता ब्रह्मा जी ने अखिल ब्रह्मांड नायक भगवान को प्रसन्न करने के लिए लोक कल्याण की भावना से इस उत्सव का प्रारम्भ किया था। जिसमें भक्तों का कल्याण करने के लिए भगवान विष्णु वैकुंठ लोक से बाहर निकलकर दर्शन देने आते हैं।

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19 मार्च को अद्वितीय पुष्पक विमान से होगा समापन
आपको बता दें कि रथ के मेले के अगले दिन भगवान स्वर्ण निर्मित अश्व पर सवार होते हैं। जिसमें बड़ा बगीचा पर भव्य आतिशबाजी का आयोजन किया जाता है। सवारी के मंदिर वापसी पर भील लूटन लीला का आयोजन किया जाता है। समापन 19 मार्च को अद्वितीय पुष्पक विमान से होगा। तदुपरांत स्वर्ण स्तंभ पर विराजित भगवान के प्रमुख वाहन गरुड जी को वेद मंत्रों से विदाई दी जाती है।

इस साल सवारी के समय में किया गया परिवर्तन
इस साल ब्रह्मोत्सव में 15 मार्च को होने वाली रंगनाथ मंदिर की होली की सवारी और हाथी की सवारी के समय में परिवर्तन किया गया था। इस बार 15 मार्च को होली की सवारी सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक निकलेगी। वहीं हाथी की सवारी का समय शाम 7 बजे से रात्रि 10 बजे तक रहेगा। यह जानकारी मंदिर की सीईओ अनघा श्रीनिवासन ने दी।

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