मथुरा के नटवरलालों का पर्दाफाश, प्रॉपर्टी के खेल में लोगों की पूँजी उड़ाने वाले 6 को पुलिस ने दबोचा
योगी सरकार गांव से लेकर शहर तक सैटेलाइट मैपिंग कराकर डिजिटल इंडिया के साथ जमीनों के फर्जीवाड़े को मिटाने के लिए पूरी ताकत लगा रही है। वहीं मथुरा के भूमाफियों के सिंडिकेट ने ये चक्रव्यूह लगभग तोड़ दिया था।

मथुरा की थाना जैंत पुलिस को उस समय बड़ी सफलता हाथ लगी जब पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर जाल बिछाकर जमीन के फर्जी कागजात तैयार कर धोखाधड़ी करने वाले एक गिरोह को धर दबोचा। जानकारी अनुसार यह गिरोह जमीन का फर्जी बैनामा करवाता था। वहीं पुलिस ने गैंग के 6 सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है।

जमीन की फर्जी वसीयत, फर्जी बैनामा और लाखों की ठगी
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी वृंदावन व आसपास के क्षेत्रों में काफी समय से खाली जगह को तलाशते थे। इसके बाद उन्हें चिन्हित कर उसके मालिक का अता-पता निकालते थे। फिर उस जमीन की फर्जी वसीयत तैयार की जाती थी। ठगी करने का अंदाज इतना शातिराना था कि इसके बाद यह लोग आपस में क्रेता, विक्रेता व गवाह बनकर रजिस्ट्री कराते थे और फर्जी चेक रजिस्ट्री में अंकित करते थे। उसके बाद फर्जी रजिस्ट्री के आधार पर लोगों को जमीन दिखाकर फिर से फर्जी बैनामा करते थे।

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खुद ही मालिक, गवाह और अधिकारी
यही नहीं बल्कि गिरोह के ये नटवरलाल सदस्य ही मालिक, गवाह और यहाँ तक कि अधिकारी भी बन जाते थे। फर्जी दस्तावेज ऐसे कि बैंक से बाकायदा लोन भी ले लिया जाता था। फर्जी रजिस्ट्री राजू उर्फ राजेंद्र तैयार करता था, दीपांशु उर्फ अन्नू व उसका भाई नागेंद्र ग्राहक को जमीन दिखाकर लोगों को फंसाते थे। यानी की सभी किसी न किसी रजिस्ट्री के फर्जीवाड़े के गंदे खेल में अपना-अपना रोल बेहद शातिराना अंदाज में निभाते थे। बहरहाल पुलिस ने इस गिरोह के 6 ठगों को गिरफ्त में ले लिया है। चर्च ये भी है कि पुलिस की जांच कई अधिकारीयों के गिरेबान तक पहुंच सकती है।












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