Mathura में एक ही नंबर से चल रहा था अर्टिगा कार और स्कूल बस का काम, प्रशासन को भी आया पसीना!
Fake Vehicle Registration Mathura: एक ही नंबर प्लेट लगाकर दो अलग अलग वाहन शहर में चल रहे थे। इसमें से एक जीएलए विश्वविद्यालय की बस है तो वहीं दूसरी अर्टिगा कार है जो की अनुज अग्रवाल नामक एक व्यक्ति की है।

उत्तर प्रदेश के मथुरा से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। जिसमे एक ही नंबर प्लेट लगाकर दो अलग अलग वाहन शहर में चल रहे थे। इसमें से एक जीएलए विश्वविद्यालय की बस है तो वहीं दूसरी अर्टिगा कार है जो की अनुज अग्रवाल नामक एक व्यक्ति की है। मामला संज्ञान में आते ही पुलिस भी इस मामले से पूरी तरह भौचक्की रह गई और तत्काल कोतवाली पुलिस ने एक ही नंबर की दोनों गाड़ियों को कोतवाली में बंद कर दिया एवं बस में मौजूद बच्चों को दूसरी गाड़ी से स्कूल भिजवाया।

अर्टिगा कार और स्कूल बस पर लगी थी एक ही नंबर प्लेट
बुधवार की सुबह थाना कोतवाली के भरतपुर गेट पर उस समय यह अजीबोगरीब मामला प्रकाश में आया, जब अर्टिका स्वामी अनुज अग्रवाल अपनी कार से ऑफिस जा रहे थे। रास्ते में उन्होंने देखा कि आगे चल रही बस की नंबर प्लेट पर उनकी गाड़ी का नंबर लिखा हुआ है। यह देखकर कार स्वामी आश्चर्य में पड़ गए और बस का पीछा करने लगे। उन्होंने देखा कि बस में स्कूली छात्र-छात्राएं बैठे हुए हैं। उन्होंने फ़ौरन इस विषय में बस चालक से बात की तो उसने बताया कि यह जीएलए विश्वविद्यालय की बस है, जिस पर सिंबोसिस सीनियर सेकेंडरी स्कूल भी लिखा हुआ है।
वहीं मनोज कुमार, सहायक क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) ने इस मामले पर कहा, "दो वाहन- एक बस और एक कार- एक ही वाहन पंजीकरण संख्या प्लेट का उपयोग करते हुए पाए गए हैं।" आरटीओ अधिकारी ने आगे आश्वासन दिया कि शहर में नकली या अनुचित वाहन पंजीकरण प्लेट का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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बच्चों को दूसरी गाड़ी से स्कूल भिजवाया
तकरीबन एक घंटे चली बहस के बाद कार स्वामी ने स्थानीय पुलिस को इस बात की जानकारी दी। सूचना पर पहुंची कोतवाली पुलिस ने एक ही नंबर की दोनों गाड़ियों को कोतवाली में बंद कर दिया एवं बच्चों को दूसरी गाड़ी से स्कूल भिजवाया। वहीं जब बस चालक से बात की गई तो उसने बताया कि उसका नाम नीरज कुमार सक्सेना है और वह सक्सेना मंडी चौराहा निधिवन हरी वाटिका का रहने वाला है। नीरज कुमार जीएलए यूनिवर्सिटी की गाड़ी चलाता है इसके बारे में उसे कुछ भी नहीं पता है।
प्रशासन की घोर लापरवाही?
दूसरी ओर अर्टिगा गाड़ी स्वामी का कहना है कि दो गाड़ियों का एक ही नंबर कैसे हो सकता है, यह तो जांच का विषय है। प्रशासन की घोर लापरवाही है। अगर हादसा होता तो इस नंबर पर रजिस्ट्रेशन मेरा है, तो मैं ही फंसता। अब देखना होगा कि इस तरह की घोर लापरवाही पर पुलिस प्रशासन एवं परिवहन विभाग क्या कार्रवाई अमल में लाएगा या यूं ही फर्जी नंबर का खेल चलता रहेगा।












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