राज्यसभा उपचुनाव: महाराष्ट्र में कांग्रेस ने भाजपा से क्यों मांगा सहयोग ? शिवसेना-एनसीपी को लेकर आशंका समझिए
मुंबई, 24 सितंबर: महाराष्ट्र में कांग्रेस के दो कदमों से महा विकास अघाड़ी सरकार के भीतर दरारें पैदा हो गई हैं। सबसे बड़ा कारण ये है कि कांग्रेस ने राज्यसभा उपचुनाव में अपने उम्मीदवार के समर्थन में बीजेपी से अपना प्रत्याशी हटा लेने की गुजारिश की है। सामने से तो कांग्रेस की सोच ये है कि अगर बीजेपी का उम्मीदवार मैदान से हट जाएगा तो उसकी प्रत्याशी निर्विरोध जीत सकती है। लेकिन, कांग्रेस के इस फैसले ने उद्धव ठाकरे की शिवसेना और शरद पवार की एनसीपी को अंदर ही अंदर हिला दिया है। दोनों दलों को लगता है कि कांग्रेस ने ऐसा करके गठबंधन में आपसी भरोसे को लेकर संदेह पैदा कर दिया है। क्योंकि, उनके पास तो पर्याप्त विधायक हैं, फिर भाजपा से मदद मांगने की क्या जरूरत थी? आइए समझते हैं कि पर्याप्त विधायकों के बावजूद कांग्रेस, भाजपा से सहयोग मांगने क्यों गई है?

महाराष्ट्र में कांग्रेस ने भाजपा से मांगा सहयोग
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश के नेता विपक्ष देवेंद्र फडणवीस से मिलकर राज्यसभा उपचुनाव में पार्टी उम्मीदवार का निर्विरोध जीत तय करने के लिए समर्थन मांगना शिवसेना-एनसीपी को हजम नहीं हो पा रहा है। दोनों पार्टियों का कहना है कि जब सत्ताधारी गठबंधन के पास पर्याप्त विधायक हैं तो भाजपा के आगे गिड़गिड़ाने का मतलब क्या है। गौरतलब है कि कांग्रेस उम्मीदवार रजनी पाटिल की ओर से इस उपचुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने के एक दिन बाद ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले और राजस्व मंत्री बालासाहेब थोराट फडणवीस से मिलने पहुंच गए थे और उनसे गुजारिश की थी कि बीजेपी अपने उम्मीदवार का नाम वापस ले ले। बता दें कि यह उपचुनाव राहुल गांधी के बेहद करीबी कांग्रेस के युवा सांसद राजीव सातव की असामयिक मौत की वजह से हो रहा है।

भाजपा ने संजय उपाध्याय को दिया है टिकट
कांग्रेस का सिर्फ यही एक कदम शिवसेना और एनसीपी नेताओं को परेशान नहीं कर रहा है। पार्टी की प्रदेश इकाई ने शहरी निकायों में मल्टी-मेंबर वार्ड के खिलाफ भी प्रस्ताव पास कर दिया है। वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस चाहती है कि उसकी उम्मीदवार रजनी पाटिल निर्विरोध चुनाव जीतें, क्योंकि मतदान होने पर तीनों दलों की कमजोरी उजागर होने की भी आशंका है। बता दें कि इस चुनाव में बीजेपी ने संजय उपाध्याय को मैदान में उतारा है। सूत्रों की ओर से दावा किया जा रहा है कि कांग्रेस नेताओं ने नाम वापसी के बदले भाजपा को विधानसभा से निलंबित उसके 12 विधायकों के निलंबन वापसी का ऑफर दिया है और यह भी दावा किया गया है कि बीजेपी ने इस प्रस्ताव पर सोचने की बात कही है।

कांग्रेस ने बढ़ा दिया है शिवसेना-एनसीपी का टेंशन
शिवसेना और एनसीपी को कांग्रेस का यही रवैया परेशान कर रहा है। जानकारी के मुताबिक उद्धव ठाकरे सरकार के एक मंत्री ने कहा है कि कांग्रेस को भाजपा के सामने इस तरह की गुजारिश करने से पहले कम से कम एकबार दोनों दलों को भी भरोसे में लेना चाहिए था, क्योंकि उनका उम्मीदवार तो पूरे गठबंधन का है। पाटिल के नामांकन के दौरान भी तीनों दलों के नेता मौजूद थे। यही नहीं गठबंधन के पास पर्याप्त संख्या है और इस तरह से विपक्ष के साथ बैठक करने से यह संदेश जाएगा कि गठबंधन में शामिल दलों में आपसी विश्वास की कमी है। दोनों दलों का टेंशन इसलिए भी और बढ़ गया है कि फडणवीस से मुलाकात के फौरन बाद ही कांग्रेस की एक प्रदेश समिति ने शहरी निकायों में बहु-सदस्यीय वार्ड के कैबिनेट के फैसले के खिलाफ में प्रस्ताव पारित कर दिया है। बुधवार को उद्धव कैबिनेट ने फैसला किया है कि नगर निगमों और नगर परिषदों में एक की जगह तीन-सदस्यीय वार्ड की व्यवस्था होगी, लेकिन शिवसेना के दबदबे वाली बीएमसी में एक-सदस्यीय वार्ड व्यवस्था ही कायम रहेगी।

शिवसेना-एनसीपी को लेकर कांग्रेस की आशंका
यह बात सही है कि महाराष्ट्र विधानसभा में तीनों दलों के पास इतने विधायक हैं कि कांग्रेस उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित लग रही है। लेकिन, चर्चा ये है कि कांग्रेस के कुछ नेताओं को शिवसेना और एनसीपी के सभी वोट रजनी पाटिल को ही मिलने को लेकर पक्का यकीन नहीं है। इसलिए पार्टी चाहती है कि अगर बीजेपी नाम वापस ले लेगी तो बिना चुनाव के ही उसकी प्रत्याशी निर्विरोध चुन ली जाएंगी और इनकी अंदरूनी कलह सामने भी नहीं आ पाएगी।

भाजपा भी कर चुकी है जीतने की स्थिति होने का दावा
यही नहीं, कांग्रेस की आशंका के पीछे महाराष्ट्र भाजपा के अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल का वह बयान भी है, जिसमें उन्होंने रिकॉर्ड पर कहा था कि शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी को मिलाकर उनके पास 175 एमएलए हैं और बीजेपी के अपने 107 विधायकों के अलावा 13 निर्दयीय एमएलए का समर्थन हासिल है, लेकिन उनकी पार्टी फिर भी राज्यसभा की यह सीट जीतने की स्थिति में आ सकती है। हालांकि, थोराट ने भी बैठक की वजह कांग्रेस में जीत को लेकर किसी तरह की डर की भावना होने से इनकार किया है और उसी तरह फडणवीस ने भी 12 विधायकों के निलंबन वापसी को लेकर किसी तरह की डील की अटकलों का खंडन किया है।
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