Nishant Agarwal हाई कोर्ट से बरी, पाकिस्तान के लिए जासूसी और हनी ट्रैप के थे आरोप, जानें पूरा केस

Who Nishant Agarwal BrahMos scientist: पूर्व ब्रह्मोस साइंटिस्ट निशांत अग्रवाल को हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने उन्हें जासूसी और साइबर आतंकवाद से जुड़े गंभीर आरोपों से बरी कर दिया है। वह पहले से ही जेल में हैं, तो अब उनकी जल्द रिहाई मुमकिन है। अग्रवाल को निचली अदालत ने देश की सुरक्षा से संबंधी गोपनीय जानकारी दुश्मन ताकतों तक पहुंचाने का दोषी करार दिया था। उन्हें 14 साल कैद की सजा सुनाई गई थी।

हाई कोर्ट ने निजी उपकरण में गोपनीय जानकारी रखने के मामले में आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम की धारा 3(1)(c) के तहत उनकी दोषसिद्धि बरकरार रखी है। इस मामले में उन्हें तीन साल की सजा सुनाई गई है। यह अवधि वह पूरी कर चुके हैं। अग्रवाल 7 साल से जेल में हैं, इसलिए अब उनकी तत्काल रिहाई संभव हो गई है।

nishant agrwal

Nishant Agarwal को मिली थी 14 साल की सजा

- निचली अदालत ने उन्हें संवेदनशील रक्षा जानकारी देश-विरोधी तत्वों को भेजने के आरोप में 14 साल की सजा सुनाई थी।

- हाई कोर्ट ने साक्ष्यों की समीक्षा के बाद उन्हें इन आरोपों से मुक्त कर दिया। निशांत अग्रवाल को अक्टूबर 2018 में सैन्य खुफिया एजेंसी, यूपी और महाराष्ट्र एटीएस की संयुक्त कार्रवाई में गिरफ्तार किया गया था।

- अग्रवाल ब्रह्मोस मिसाइल प्रोजेक्ट से जुड़े भारत-रूस के संयुक्त उपक्रम (BAPL) के टेक्निकल रिसर्च सेक्शन में कार्यरत थे। जांच के दौरान उनके कंप्यूटर से ब्रह्मोस मिसाइल से संबंधित दस्तावेज मिले थे।

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BrahMos scientist की हुई थी 2018 में गिरफ्तारी

जांच टीम जांच ने उनके निजी कंप्यूटर से ब्रह्मोस मिसाइल से संबंधित संवेदनशील दस्तावेज मिले, जिसे सुरक्षा मानकों का उल्लंघन माना गया था। गिरफ्तारी से कुछ दिन पहले ही उनकी शादी हुई थी। दशहरे की छुट्टियों के दौरान उनसे पूछताछ की गई थी और अगले ही दिन उन्हें अरेस्ट कर लिया गया था। माना जा रहा है कि हाई कोर्ट से आदेश की प्रति मिलते ही उनकी रिहाई हो जाएगी।

Pakistan की एजेंट से सोशल मीडिया पर करते थे चैटिंग

महाराष्ट्र एटीएस का दावा था कि निशांत फेसबुक के माध्यम से तीन पाकिस्तानी एजेंट नेहा शर्मा, पूजा रंजन और सेजल कपूर के संपर्क में थे। ये तीनों फर्जी नाम और आईडी के जरिए निशांत से काफी बातचीत करती थीं। इन्होंने ब्रह्मोस से जुड़े दस्तावेज और डिजाइन की मांग की थी। जांच में पाया गया कि सेजल नाम की एजेंट ने उन्हें 2017 में तीन ऐप Qwhisper, Chat to Hire और X-Trust इंस्टॉल करवाए थे। ये तीनों ऐप वास्तव में मैलवेयर थे, जिनके जरिए उनके निजी लैपटॉप से अहम जानकारी निकाली गई थी। सेजल से उन्होंने लिंकिडन पर भी चैटिंग की थी।

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