IPS Sadanand Date: मां ने घरों में बर्तन मांजे-बेटा अखबार बांट बना IPS, कसाब से भिड़े-अब महाराष्ट्र के नए DGP?
IPS Sadanand Date Success Story: महाराष्ट्र पुलिस के नए डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (DGP) की नियुक्ति को लेकर पिछले कुछ महीनों से चर्चाएं जोरों पर थीं। अब तस्वीर साफ हो गई है। 22 दिसंबर 2025 को केंद्र सरकार ने नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) के DG सदानंद वसंत दाते को तत्काल प्रभाव से उनके मूल कैडर महाराष्ट्र में वापस भेज दिया है। मौजूदा DGP रश्मि शुक्ला का कार्यकाल 31 दिसंबर 2025 को खत्म हो रहा है, और सदानंद दाते 1 जनवरी 2026 से महाराष्ट्र पुलिस की कमान संभालने के लिए सबसे मजबूत दावेदार हैं।
26/11 मुंबई हमलों के हीरो, ईमानदार और सख्त अफसर की छवि वाले दाते की यह वापसी राज्य पुलिस के लिए नई उम्मीद लेकर आई है। आइए, जानते हैं इन बहादुर IPS अफसर की प्रेरक कहानी, संघर्षपूर्ण बैकग्राउंड और करियर की प्रमुख पड़ावों को विस्तार से...

Who Is IPS Sadanand Date: सदानंद दाते कौन हैं? संघर्ष से शिखर तक की प्रेरक यात्रा
सदानंद वसंत दाते (जन्म: 14 दिसंबर 1966) महाराष्ट्र कैडर के 1990 बैच के IPS अफसर हैं। पुणे में जन्मे दाते का बचपन आर्थिक तंगी में बीता। जब वे मात्र 15 साल के थे, तभी उनके पिता का निधन हो गया। परिवार की जिम्मेदारी मां पर आ गई, जो दूसरों के घरों में झाड़ू-पोंछा और बर्तन मांजकर घर चलाती थीं।
छोटे सदानंद ने मां का बोझ हल्का करने के लिए सुबह 4 बजे उठकर अखबार बांटने का काम शुरू कर दिया। ठंड, बारिश या गर्मी-कुछ भी उन्हें रोक नहीं पाता था। अखबार बांटने के बाद स्कूल जाते, फिर पढ़ाई करते। कभी समय मिलता तो फर्नीचर स्टोर में पियोन का काम या नर्सिंग होम में रिसेप्शनिस्ट की नौकरी भी की। लेकिन पढ़ाई कभी नहीं छोड़ी।
IPS Sadanand Date Education: कितने पढ़ें-लिखे हैं दाते?
- शिक्षा: स्थानीय सरकारी स्कूल से इंटरमीडिएट, पुणे यूनिवर्सिटी से कॉमर्स में पोस्ट ग्रेजुएशन और फिर PhD।
- UPSC सफलता: कड़ी मेहनत से 1990 में UPSC क्रैक कर IPS बने।
- विदेशी अध्ययन: हम्फ्री फेलोशिप पर अमेरिका के मिनेसोटा यूनिवर्सिटी में व्हाइट कॉलर क्राइम और संगठित अपराध पर स्टडी की।
यह संघर्षपूर्ण बैकग्राउंड ही उन्हें जमीनी और संवेदनशील अफसर बनाता है।
Mumbai Attack 26/11 Hero: 26/11 का 'जिंदा हीरो', कसाब से सीधी भिड़ंत
26 नवंबर 2008 की वह भयावह रात, जब मुंबई आतंक के साए में थी। सदानंद दाते तब मुंबई पुलिस के सेंट्रल रीजन के एडिशनल कमिश्नर थे। कामा अस्पताल (महिलाओं और बच्चों का अस्पताल) के पास आतंकवादी अजमल कसाब (Terrorist Ajmal Kasab) और इस्माइल खान फायरिंग कर रहे थे।
दाते अपनी टीम के साथ फ्रंटलाइन पर उतरे। अस्पताल की बिल्डिंग में घुसकर आतंकियों का डटकर मुकाबला किया। एक ग्रेनेड उनसे मात्र 3 फुट दूर फटा, सब-इंस्पेक्टर प्रकाश मोरे शहीद हो गए, दाते समेत कई अफसर घायल। लेकिन दाते ने हिम्मत नहीं हारी। घायल हालत में टीम के साथ छठी मंजिल तक पहुंचे, सीढ़ियों पर छिपकर 40 मिनट तक फायरिंग का जवाब दिया। दूसरे ग्रेनेड से बुरी तरह घायल हुए, फिर भी आतंकियों को अस्पताल पर कब्जा नहीं करने दिया। इस बहादुरी से सैकड़ों महिलाओं-बच्चों की जान बची। इस घटना ने उन्हें '26/11 का हीरो' बना दिया।
सम्मान:
- 2008: राष्ट्रपति पुलिस वीरता पदक (महिला-बच्चों की जान बचाने के लिए)।
- 2007: पुलिस मेधावी सेवा पदक।
- 2014: पुलिस विशिष्ट सेवा पदक।
- मुंबई पुलिस में: क्राइम ब्रांच जॉइंट कमिश्नर, लॉ एंड ऑर्डर जॉइंट कमिश्नर, मीरा-भायंदर-वसई-विरार के पहले पुलिस कमिश्नर।
- महाराष्ट्र ATS चीफ: आतंकवाद विरोधी ऑपरेशंस में अहम भूमिका।
- केंद्र में: CBI में DIG, CRPF में IG, SPG, NDRF, BPR&D जैसे पद।
- NIA DG: मार्च 2024 से दिसंबर 2025 तक भारत की प्रमुख आतंकवाद जांच एजेंसी के प्रमुख। (अब वापस महाराष्ट्र)।
दाते को फील्ड ऑफिसर और स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस का मास्टर माना जाता है। आतंकवाद, संगठित अपराध और आर्थिक अपराधों में जीरो टॉलरेंस। उन पर कभी भ्रष्टाचार या राजनीतिक दबाव का आरोप नहीं लगा। जवानों के बीच उनकी छवि ऐसे लीडर की है जो स्टाफ के साथ खड़ा रहता है और जिम्मेदारी खुद लेता है।
IPS Sadanand Date Next Maharashtra DGP: बनने की दहलीज पर: क्यों हैं सबसे मजबूत दावेदार?
- वरिष्ठता: 1990 बैच के सबसे सीनियर अफसरों में।
- अनुभव: राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद निरोधक और राज्य प्रशासन में दशकों का तजुर्बा।
- छवि: बहादुरी, ईमानदारी और संकट प्रबंधन की मिसाल।
- वर्तमान स्थिति: 22 दिसंबर 2025 को कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने NIA से समयपूर्व वापसी को मंजूरी दी। रश्मि शुक्ला के रिटायरमेंट के ठीक बाद कमान संभालने की संभावना।
पुलिस महकमे और आम जनता में दाते को खास सम्मान मिलता है। मौजूदा सुरक्षा चुनौतियों (आतंकवाद, साइबर क्राइम, ऑर्गनाइज्ड क्राइम) के दौर में वे महाराष्ट्र पुलिस के लिए 'स्ट्रैटेजिक चॉइस' माने जा रहे हैं।
सदानंद दाते की कहानी संघर्ष, बहादुरी और समर्पण की मिसाल है। घरों में बर्तन मांझने वाली मां के बेटे से लेकर देश के टॉप पुलिस अफसर तक का सफर लाखों युवाओं को प्रेरित करता है। महाराष्ट्र पुलिस को उनकी अगुवाई में नई दिशा मिलने की उम्मीद है। क्या आपको उनकी कहानी इंस्पायरिंग लगी? कमेंट्स में बताएं!












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