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वोटिंग के बाद कहां जाती है EVM मशीन, कैसे डेटा रखा जाता है सुरक्षित?

EVM Machine:महाराष्‍ट्र और झारखंड विधानसभा चुनाव के लिए मतदान 20 नवंबर को संपन्‍न हो चुके हैं। बुधवार को महाराष्‍ट्र और झारखंड के वोटर्स ईवीएम मशीन में बटन दबाकर अपने राज्‍य की अगली सरकार को लेकर अपना फैसला ईवीएम नाम के पिटारे में दर्ज कर चुके हैं। अब 23 तारीख को वोटों की गिनती के बाद हार जीत का फैसला होगा और ये तय होगा कि कौन सी पार्टी या गठबंधन अगले पांच सालों तक सत्‍ता संभालेगा।

वोटिंग के बाद चुनाव परिणाम का इंतजार तो हम सब कर रहे हैं लेकिन क्‍या कभी आपने ये सोचा है, कि आप तो ईवीएम का बटन दबाकर अपना फैसला उस मशीन में कैद कर देते हैं, इसके बाद ईवीएम कहां ले जाई जाती है, चुनाव परिणाम आने तक उसे कहां सुरक्षित रखा जाता है और कितने समय तक उसका डेटा सुरक्षित रहता है? तो आइए जानते हैं वोटिंग और वोटों की गिनती के बीच ईवीएम के पूरे सफर के बारे में।

EVM Machine

मतदान के तुरंत बाद क्‍या होता है

मतदान केंद्रों पर वोटिंग समाप्‍त होने के बाद प्रीसाइडिंग ऑफीसर मुस्‍तैदी से वोटों के रिकॉर्ड की जांच करता है और प्रत्‍याशियों के पोलिंग एजेंट को सर्टीफाइड कॉपी सौंपता है। इसके बाद ईवीएम मशीन प्रत्‍याशियों के पोलिंग एजेंट के सामने सील की जाती है और सील पर लगे कागज पर वो सभी साइन करते हैं।

कहां और कैसे सुरक्षित रखी जाती है ईवीएम मशीन?

मतदान केंद्र पर ईवीएम मशीन सील किए जाने के बाद ये ईवीएम मशीन भारी सुरक्षा व्‍यवस्‍था के बीच स्‍ट्रांग लाई जाती है। स्‍ट्रांग रूम तक लाए जाने तक सभी प्रत्‍याशी या उनके प्रतिनिधि साथ रहते हैं। इसके बाद स्‍ट्रांग रूम का गेट प्रत्‍याशियों की सहमति पर सील कर दिया जाता है।

कितना सुरक्षित रहता है स्‍ट्रांग रूम?

चुनाव आयोग इसकी सुरक्षा तीन लेवल पर करता है। इंटरनल सिक्‍योरिटी की जिम्‍मेदारी केंद्रीय अर्ध सैनिक बलों के कंधों पर होती है। वहीं स्‍ट्रांग रूम के अंदर केंद्रीय बल सुरक्षा में तैनात रहता है और बाहर राज्‍य पुलिस बल का होता है। वहीं स्‍ट्रांग रूम में एंट्री करने के लिए एक ही प्‍वाइंट होता है।स्‍ट्रांग रूम में सीसीटीवी कैमरा लगा होता है और सुरक्षा बल की मौजूदगी में ही अधिकारी लॉग बुक में टाइम एंट्री करके अंदर जा सकते हैं। काउ‍ंटिंग के दिन ही ये स्‍ट्रांग रूम खोला जाता है।

कैसे काउटिंग हॉल तक पहुंचती है ईवीएम मशीन
मतगणना के दिन स्‍ट्रांग रूम से काउंटिंग हॉल तक ये मशीन कड़ी सुरक्षा में ले जाई जाती है अगर दूरी अधिक है तो बैराकैटिंग लगाई जाती है और काउंटिंग हॉल में ईवीएम ले जाई जाती है। काउंटिंग हाल में सीसीटीवी कैमरा और भारी सुरक्षा बल तैनात रहता है। जहां पर ड्यूटी में तैनात अधिकारी सील हटा कर ईवीएम से वोट की काउंटिंग करते हैं।

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