Maharashtra: स्पीकर नार्वेकर के बयान से उद्धव कैंप में क्यों मची खलबली? अयोग्यता मामले पर EC से लेंगे सलाह

महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर विधायकों के अयोग्यता पर फैसला लेने से पहले शिवसेना के संविधान और उसकी अन्य डिटेल का अध्ययन करेंगे। उनके इस फैसले से उद्धव गुट की चिंता बढ़ गई है।

maharashtra speaker Rahul Narwekar

महाराष्ट्र में शिवसेना के 16 विधायकों की अयोग्यता पर फैसला विधानसभा के स्पीकर राहुल नार्वेकर को लेना है। लेकिन, स्पीकर ने कहा है कि वह किसी भी नतीजे पर पहुंचने से चुनाव आयोग से सलाह लेना चाहें और शिवसेना के संविधान से जुड़ी पूरी जानकारी मांगेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फैसले का अधिकार स्पीकर पर ही छोड़ा है।

शिवसेना के संविधान पर जानकारी जुटाएंगे स्पीकर
ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर राहुल नार्वेकर उन नियमों को जानने के लिए चुनाव आयोग से संपर्क करेंगे, जिससे राजनीतिक दलों का संविधान तय होता है। उनके मुताबिक इससे उन्हें विधायकों की अयोग्यता पर ये फैसला लेने में मदद मिलेगी कि शिवसेना के किस गुट का व्हिप पार्टी विधायकों पर लागू होता है।

'क्या चुनाव के आंतरिक चुनाव करवाए गए हैं या नहीं'
मुंबई में एक प्रेस कांफ्रेंस में स्पीकर नार्वेकर ने मंगलवार को कहा, 'जब चुनाव आयोग से हमें डिटेल मिल जाता है....क्या चुनाव (पार्टी का आंतरिक चुनाव) करवाए गए हैं या नहीं, क्या पार्टी को चुनाव आयोग के नियमों के तहत या पार्टी के संविधान के तहत चलाया जा रहा है, हम इस सबका अध्ययन करेंगे और फैसला देंगे।'

स्पीकर नार्वेकर के बयान से उद्धव कैंप में क्यों मची खलबली?
उन्होंने ये भी कहा कि 'फैसले पर पहुंचते समय, हम अयोग्यता के नियमों, संविधान, सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस को भी देखेंगे और तब निर्णय सुनाएंगे।' महाराष्ट्र विधानसभा स्पीकर ने चुनाव आयोग की नियावली के मुताबिक शिवसेना के पार्टी संविधान के अध्ययन की जो पहल की है, वह बहुत ही महत्वपूर्ण है, जिसके चलते उद्धव खेमे में खलबली मची हुई है।

शिवसेना संविधान में संशोधन को आयोग ने कहा था 'अलोकतांत्रिक'
उद्धव कैंप की असहजता की सबसे बड़ी वजह ये हो सकती है कि चुनाव आयोग ने पहले यह फैसला दिया था कि 2018 में शिवसेना के संविधान में जो संशोधन किया गया था, वह 'अलोकतांत्रिक' था। चुनाव आयोग के मुताबिक यह संशोधन इसलिए गलत था क्योंकि, 'पार्टी के संविधान ने पार्टी अध्यक्ष (उद्धव) को उस निर्वाचक मंडल को नामित करने का उल्लेख किया था, जिसे उन्हें चुनना था।'

बीजेपी के एमएलए हैं महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर
यहां ये भी तथ्य है कि स्पीकर बीजेपी एमएलए हैं, जिसके समर्थन से महाराष्ट्र की एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना-भाजपा सरकार चल रही है। वैसे स्पीकर के तौर पर उनकी भूमिका निष्पक्ष रहने की उम्मीद की जाती है। लेकिन, उनके फैसले से जिस पार्टी का भविष्य जुड़ा है, उसकी असहजता भी स्वाभाविक है।

'हमें राजनीतिक पार्टी को प्राथमिकता देनी है'
स्पीकर ने यह भी कहा है कि 'मुख्य मुद्दा क्या है? हमें राजनीतिक पार्टी को प्राथमिकता देनी है। राजनीतिक दल की इच्छा क्या थी? व्हिप कौन होगा, नेता कौन होगा? हमें उसके बारे में सोचना है और जवाब देना है। इसलिए जुलाई, 2022 में कौन गुट पार्टी का प्रतिनिधित्व कर रहा था? हमें वहां से शुरू करने की जरूरत है.... '

फैसला लेने में कुछ समय लगेगा-स्पीकर
चुनाव आयोग ने इस आधार पर कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गुट के पास विधायिका में बहुमत है शिवसेना का नाम और शिवसेना का पार्टी निशान उनके गुट को आवंटित किया है। जब उद्धव गुट के इस मांग के बारे में स्पीकर से पूछा गया कि वह 15 दिन के अंदर या अधिकतम तीन महीनों के भीतर फैसला लें तो वे बोले कि वह जल्द से जल्द फैसला लेना चाहते हैं, लेकिन इस मामले में कुछ समय लगेगा।

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