'तो लोकतंत्र मर जायेगा', शिवसेना UBT प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अब क्‍यों सुप्रीम कोर्ट में लगाई ये गुहार?

Maharashtra civic elections: महाराष्‍ट्र में नगर महापालिका और नगर निगम के चुनाव अब जल्‍द होने वाले हैं। लंबे समय से टल रहे निकाय चुनाव को चुनाव आयोग ने हरी झंडी दिखा दी है, अब कभी भी आयोग तरीखों का ऐलान कर सकता है। निकाय चुनाव से पहले महाराष्ट्र में शिवसेना के चुनाव चिन्‍ह संबंधी मामला एक बार फिर गरमाता नजर आ रहा है।

शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने 13 अगस्त (बुधवार) को सर्वोच्च न्यायालय से 'धनुष-तीर' चुनाव चिह्न मामले की तुरंत सुनवाई करने की अपील की। उद्धव ठाकरे ने पिता बाला साहेब ठाकरे द्वारा स्‍थापित शिवसेना के चुनाव चिन्‍ह को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाते हुए कहा है कि "यदि न्याय नहीं मिला, तो लोकतंत्र समाप्त हो जाएगा।"

Uddhav Thackeray

उद्धव बोले- तीन-चार साल बीत गए, लेकिन...

शिवसेना चुनाव चिन्‍ह के लिए विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को चुनौती देने वाली अपनी पार्टी की याचिका का जिक्र करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि तीन-चार साल बीत गए, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने चेतावनी दी, "कोई नहीं जान पाएगा कि लोकतंत्र कब मर जाएगा। अगर न्याय नहीं मिला, तो लोकतंत्र मर जाएगा।" उन्होंने हाथ जोड़कर अदालत से जल्द सुनवाई की अपील करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक पार्टी का नहीं, बल्कि पूरे देश के लोकतंत्र का सवाल है।

महाराष्‍ट्र सरकार पर मराठियों पर हिंदी थोपने का आरोप लगाया

इसके साथ ही उद्धव ठाकरे ने सत्तारूढ़ बीजेपी पर परोक्ष हमला करते हुए आरोप लगाया कि हिंदी थोपने और बाहरी मानसिकता को बढ़ावा देने की कोशिशें चल रही हैं। उन्होंने इन परिस्थितियों की तुलना 1966 से पहले की स्थिति से की, जब शिवसेना का गठन हुआ था। ठाकरे ने जोर दिया कि ये प्रयास मराठी अस्मिता और मुंबई की पहचान को कमजोर कर रहे हैं।

'मराठी मानुष ने संघर्ष कर मुंबई पाई'

उद्धव ठाकरे ने शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे और श्रीकांत ठाकरे द्वारा शुरू की गई पत्रिका 'मार्मिक' के 65वें स्थापना दिवस पर 'मराठी मानुष' की भूमिका को याद किया। उन्होंने कहा, "मराठी मानुष ने संघर्ष कर मुंबई पाई, लेकिन आज फिर उसी संघर्ष की ज़रूरत महसूस हो रही है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी और 'मार्मिक' का मिशन तब तक जारी रहेगा, जब तक ऐसे प्रयास करने वालों को राजनीतिक रूप से समाप्त नहीं कर दिया जाता।

कुत्‍तों और कबूतरों के बारे में क्‍या बोले उद्धव ठाकरे?

उद्वव ठाकरे ने मुंबई में कबूतरों को दाना डालने या आवारा कुत्तों पर सर्वोच्च न्यायालय के आदेश जैसे मुद्दे उठाकर जनता का ध्यान असली समस्याओं से हटाया जा रहा है। उन्होंने भारत के मुख्य न्यायाधीश भूषण आर. गवई की सराहना की, जिन्होंने आवारा कुत्तों पर तत्काल सुनवाई का आश्वासन दिया। ठाकरे ने इसे जनता के आक्रोश को देखते हुए एक सही कदम बताया।

गौरतलब है कि एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद बाला साहेब की शिवसेना और उसके चुनाव चिन्‍ह धनुष तीर के अधिकारी को लेकर विधानसभा अध्यक्ष ने फैसला शिंदे गुट के पक्ष में सुनाया गया था। विधानसभा अध्यक्ष के आदेश के खिलाफ उद्धव ठाकरे में सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई थी। कोर्ट में अभी ये मामला लंबित है।

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