Uddhav गुट के 6 बागी सांसदों में कौन-कौन शिंदे खेमे में शामिल? कौन कितना दागी-अमीर? टूट के राजनीतिक मायने

Uddhav Shiv Sena UBT 6 Rebel MPs Join Eknath Shinde: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। शिवसेना (यूबीटी) के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 ने उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना में विलय का फैसला कर लिया। 17 जून 2026 को सुबह 9:30 बजे इन सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर अपनी पार्टी बदलने की औपचारिक सूचना दी।

यह घटना 2022 की उस ऐतिहासिक टूट की याद दिलाती है, जब एकनाथ शिंदे 39 विधायकों के साथ अलग हुए थे और उद्धव ठाकरे की सरकार गिर गई थी। अब लोकसभा स्तर पर हुई यह टूट उद्धव गुट के लिए दूसरा बड़ा झटका है। आइए विस्तार से समझते हैं - कौन-कौन हैं ये 6 बागी सांसद, उनकी, संपत्ति, आपराधिक मामले, जातीय समीकरण और इस टूट के राजनीतिक मायने...

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6 बागी सांसदों की पूरी लिस्ट : कौन कितना ताकतवर?

1.Who Is Sanjay Haribhau Jadhav: कौन हैं संजय हरिभाऊ जाधव (परभणी)?

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परभणी से सांसद संजय जाधव शिवसेना के सबसे वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं। मराठवाड़ा क्षेत्र में उनका मजबूत जनाधार है और वे लंबे समय से शिवसेना की राजनीति का अहम चेहरा रहे हैं। स्थानीय निकाय राजनीति से अपने करियर की शुरुआत करने वाले जाधव लगातार कई बार लोकसभा पहुंच चुके हैं। कृषि और दुग्ध व्यवसाय से जुड़े जाधव को ग्रामीण मतदाताओं के बीच मजबूत पकड़ वाला नेता माना जाता है। 2024 के चुनाव में उन्होंने परभणी सीट बरकरार रखी। उनके खिलाफ छह आपराधिक मामले दर्ज हैं। उनकी घोषित संपत्ति लगभग ₹10.27 करोड़ है, जबकि देनदारियां ₹4.75 करोड़ हैं। शिक्षा के स्तर पर वे 10वीं पास हैं।

2. Who Is Nagesh Bapurao Patil Ashtikar: कौन हैं नागेश बापुराव पाटिल अष्टिकर (हिंगोली)?

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हिंगोली से सांसद नागेश पाटिल अष्टिकर मराठवाड़ा की राजनीति में तेजी से उभरे नेताओं में शामिल हैं। उन्होंने अपना राजनीतिक सफर कृषि उपज मंडी समिति (APMC) से शुरू किया और 2009 में इसके अध्यक्ष बने। 2013 में शिवसेना के तालुका प्रमुख बनाए गए और 2014 में हदगांव विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए। कृषि और व्यवसाय से जुड़े अष्टिकर ने 2024 में पहली बार हिंगोली लोकसभा सीट जीती। बी.कॉम स्नातक अष्टिकर की घोषित संपत्ति ₹8.06 करोड़ है और उन पर कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।

3. Who Is Sanjay Uttamrao Deshmukh: संजय उत्तमराव देशमुख (यवतमाल-वाशिम)

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विदर्भ के प्रभावशाली मराठा नेता संजय देशमुख का राजनीतिक सफर कई दलों से होकर गुजरा है। उन्होंने 1990 के दशक में शिवसेना से राजनीति शुरू की, लेकिन बाद में निर्दलीय, कांग्रेस और भाजपा के साथ भी जुड़े रहे। 1999 और 2004 में दिग्रस विधानसभा सीट से निर्दलीय विधायक चुने गए। वे महाराष्ट्र सरकार में खेल एवं युवा कल्याण राज्य मंत्री भी रह चुके हैं। 2022 में उद्धव ठाकरे की शिवसेना में शामिल होने के बाद उन्होंने 2024 में यवतमाल-वाशिम लोकसभा सीट जीती। कृषि, उद्योग, सहकारिता और शिक्षा संस्थानों से जुड़े देशमुख की घोषित संपत्ति ₹28.44 करोड़ है। उन पर कोई आपराधिक मामला नहीं है।

4. Who Is Bhausaheb Rajaram Wakchore: भाऊसाहेब राजाराम वाकचौरे (शिरडी-एससी)

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74 वर्षीय भाऊसाहेब वाकचौरे महाराष्ट्र की शिरडी (अनुसूचित जाति आरक्षित) सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं। वे सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी हैं और कांग्रेस, भाजपा तथा शिवसेना जैसे विभिन्न राजनीतिक दलों में काम कर चुके हैं। सहकारी संस्थाओं और स्थानीय निकाय राजनीति से उभरकर राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंचे वाकचौरे को अहमदनगर क्षेत्र में मजबूत जनाधार वाला नेता माना जाता है। किसान और ग्रामीण विकास उनके प्रमुख राजनीतिक मुद्दे रहे हैं। 2024 में वे शिवसेना (यूबीटी) के टिकट पर चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। उनकी घोषित संपत्ति ₹9.75 करोड़ है और उन पर कोई आपराधिक मामला नहीं है।

5. Who Is Omraj Nimbalkar (Dharashiv/Osmanabad): ओमराजे निंबालकर (धाराशिव/उस्मानाबाद)

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मराठवाड़ा के युवा और चर्चित नेताओं में शामिल ओमराजे निंबालकर प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से आते हैं। वे पूर्व मंत्री पद्मसिंह पाटिल परिवार से जुड़े माने जाते हैं। इंजीनियरिंग (आईटी) की पढ़ाई करने वाले निंबालकर 2009 में उस्मानाबाद विधानसभा से विधायक बने। 2019 में पहली बार लोकसभा पहुंचे और 2024 में धाराशिव सीट से दोबारा सांसद चुने गए। कृषि क्षेत्र से जुड़े निंबालकर की पहचान युवा नेतृत्व और क्षेत्रीय प्रभाव के लिए होती है। उनकी घोषित संपत्ति ₹7.53 करोड़ है और उन पर दो आपराधिक मामले दर्ज हैं।

6. Who Is Sanjay Dina Patil (Mumbai North-East): संजय दीना पाटिल (मुंबई उत्तर-पूर्व)

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मुंबई उत्तर-पूर्व लोकसभा क्षेत्र से सांसद संजय दीना पाटिल महानगर की मराठी राजनीति और झुग्गी-बस्ती क्षेत्रों में मजबूत पकड़ रखने वाले नेता माने जाते हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) से की थी। 2004 में भांडुप से विधायक बने और 2009 में पहली बार लोकसभा पहुंचे। बाद में चुनावी हार का सामना करने के बाद 2024 में दोबारा सांसद निर्वाचित हुए। समाजसेवा और व्यवसाय से जुड़े पाटिल भाजपा के मजबूत गढ़ माने जाने वाले उत्तर-पूर्व मुंबई में प्रभावशाली विपक्षी चेहरा रहे हैं। उनकी घोषित संपत्ति लगभग ₹3.99 करोड़ है और उन पर कोई देनदारी नहीं है।

अब कितने सांसद शिंदे गुट में?

शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसद अब एकनाथ शिंदे गुट में आने के बाद कुल 13 सांसद हो जाएंगे। आपको बता दें कि 7 सांसद 2024 के लोकसभा चुनाव में जीतकर आए। इसमें रवींद्र वायकर (मुंबई उत्तर-पश्चिम), डॉ. श्रीकांत शिंदे (कल्याण), नरेश म्हस्के (ठाणे), श्रीरंग बार्ने (मावल), धैर्यशील माने (हतकनंगकले), संदीपन भुमरे (औरंगाबाद) और प्रतापराव जाधव (बुलढाणा) शामिल हैं।

कौन हैं वो तीन सांसद, जो उद्धव गुट के डटे?

  • अरविंद सावंत (मुंबई दक्षिण)
  • अनिल देसाई (मुंबई दक्षिण मध्य)
  • राजाभाऊ वाजे (नासिक)।

संपत्ति और दागी का आकलन एक नजर में...

  • बागी सांसदों की कुल संपत्ति औसतन 8-10 करोड़ के आसपास है। सबसे अमीर संजय देशमुख (28 करोड़+), जबकि सबसे कम संजय दीना पाटिल (4 करोड़ के करीब)।
  • कुल 6 में से 2 पर आपराधिक मामले दर्ज हैं (संजय जाधव पर 6, ओमराजे पर 2)।
  • ज्यादातर कृषि बैकग्राउंड से हैं, जो महाराष्ट्र की ग्रामीण-मराठवाड़ा राजनीति को दर्शाता है।

जातीय और क्षेत्रीय समीकरण समझें...

  • अधिकांश बागी सांसद मराठवाड़ा क्षेत्र (परभणी, हिंगोली, यवतमाल, धाराशिव) से हैं कि जहां मराठा-कुणबी वोट बैंक अहम है।
  • SC आरक्षित शिरडी सीट पर भाऊसाहेब वाकचौरे का जाना शिंदे गुट को दलित-मराठा संतुलन बनाने में मदद करेगा।
  • मुंबई की एक शहरी सीट (संजय दीना पाटिल) का जाना शिंदे गुट को शहर में भी मजबूती देगा।

राजनीतिक गणित और असर क्या कहता है?

  • लोकसभा: शिवसेना (UBT) के 9 सांसदों में से 6 चले गए। बचे 3। दलबदल कानून (10% या अधिक) के कारण अयोग्यता नहीं होगी।
  • एनडीए को फायदा: 6 सांसदों के आने से NDA का लोकसभा संख्या बल 320 के करीब पहुंच गया। दो-तिहाई बहुमत (Lok Sabha में 363) के और करीब।
  • महाराष्ट्र विधानसभा: उद्धव गुट के पास 20 विधायक बचे हैं। सूत्रों के अनुसार 16 तक शिंदे गुट में जा सकते हैं।

टूट के पीछे के कारण क्या?

संजय जाधव ने संजय राउत पर 'ऑपरेशन टाइगर' का आरोप लगाया। सांसद राउत के रवैये से नाराज बताए जा रहे हैं। संजय राउत ने बागी सांसदों को 'बेईमान' कहा और आरोप लगाया कि उन्हें 15-15 करोड़ रुपये दिए गए और चार्टर्ड प्लेन से दिल्ली लाया गया। उद्धव ठाकरे गुट ने बागी सांसदों को व्हिप जारी कर दिल्ली में बैठक बुलाई, लेकिन वे पहुंचे नहीं।

2022 vs 2026 को समझें...

  • जून 2022: एकनाथ शिंदे ने 39 विधायकों के साथ विद्रोह किया। इससे उद्धव सरकार गिरी। शिंदे को असली शिवसेना का नाम और सिंबल मिला।
  • 2024 लोकसभा चुनाव: उद्धव गुट ने बेहतर प्रदर्शन किया, लेकिन अब संसदीय स्तर पर टूट।
  • 19 जून 2026: शिंदे गुट का स्थापना दिवस है। माना जा रहा है कि इसी दिन 6 सांसदों का औपचारिक स्वागत संभव।

NDA की अभी कितनी सीटें हैं?

2024 लोकसभा चुनाव में NDA ने 293 सीटें जीती थीं, जबकि INDIA गठबंधन को 232 सीटें मिली थीं। बहुमत का आंकड़ा 272 है। शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसद शिंदे गुट में शामिल हो जाते हैं, तो NDA की प्रभावी ताकत 293 से बढ़कर लगभग 299 हो सकती है, जबकि INDIA गठबंधन की संख्या घट जाएगी।

शिंदे गुट को क्या फायदा होगा?

अभी लोकसभा में शिंदे की शिवसेना के पास 7 सांसद हैं। यदि 6 और सांसद जुड़ते हैं तो संख्या 13 हो जाएगी।

इससे शिंदे गुट को कई राजनीतिक लाभ मिल सकते हैं:

  • 1. लोकसभा में बड़ा संसदीय समूह बनने का दावा।
  • 2. संसदीय समितियों में अधिक प्रतिनिधित्व।
  • 3. महाराष्ट्र में 'असल शिवसेना' होने के राजनीतिक दावे को मजबूती।
  • 4. NDA के भीतर शिंदे की सौदेबाजी की क्षमता बढ़ना।
  • 5. 2029 चुनाव से पहले संगठनात्मक मनोबल में बढ़ोतरी।

क्या 10% सांसद टूटने पर दलबदल कानून नहीं लगता?

नहीं। '10%' वाला नियम दलबदल कानून में नहीं है। असल में 2003 के 91वें संविधान संशोधन के बाद 'एक-तिहाई (1/3) टूट' वाली छूट खत्म कर दी गई थी। अब केवल दो-तिहाई (2/3) सदस्यों के साथ वैध विलय (Merger) की व्यवस्था बची है। 9 में से 6 सांसद जाने पर क्या होगा?

  • शिवसेना (यूबीटी) के लोकसभा सांसद = 9
  • जाने वाले सांसद = 6
  • अनुपात = 6/9 = 66.67%

यानी ठीक दो-तिहाई (2/3)। इसी वजह से चर्चा हो रही है कि बागी सांसद दलबदल कानून से बचने के लिए 'दो-तिहाई' संख्या का सहारा ले सकते हैं।

फिर क्या उनकी अयोग्यता नहीं होगी?

यह उतना सीधा मामला नहीं है। संविधान की दसवीं अनुसूची (Tenth Schedule) कहती है कि दलबदल से बचने के लिए सिर्फ दो-तिहाई सांसदों का होना पर्याप्त नहीं है। 'विलय' की कानूनी शर्तें भी पूरी होनी चाहिए। कई संवैधानिक विशेषज्ञों का मत है कि केवल सांसदों का अलग समूह बना लेना सुरक्षा नहीं देता। मूल राजनीतिक दल के विलय और अन्य कानूनी पहलुओं पर भी विचार किया जाता है। अंतिम फैसला लोकसभा अध्यक्ष और बाद में न्यायिक समीक्षा के अधीन हो सकता है।

आगे क्या? 2029 विधानसभा चुनाव का असर

यह टूट उद्धव ठाकरे गुट को संगठनात्मक और मनोबल दोनों स्तर पर कमजोर करेगी। शिंदे गुट को लोकसभा और विधानसभा दोनों में मजबूती मिलेगी।
महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण, ओबीसी-मराठा टकराव और विकास एजेंडे के बीच यह टूट 2029 विधानसभा चुनाव की दिशा बदल सकती है। कांग्रेस-एनसीपी (शरद पवार) गठबंधन को भी अप्रत्यक्ष फायदा या नुकसान का आकलन करना बाकी है।

टूट गई Uddhav Thackeray की शिवसेना, 6 बागी सांसद Eknath Shinde गुट में हुए शामिल, क्‍या होगा असर?
टूट गई Uddhav Thackeray की शिवसेना, 6 बागी सांसद Eknath Shinde गुट में हुए शामिल, क्‍या होगा असर?
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