Maharashtra politics:'वह उनके प्रवक्ता की राय थी': संजय राउत पर अजित पवार का पलटवार

महाराष्ट्र की राजनीति में महा विकास अघाड़ी (एमवीए) गठबंधन में लगता है कि सबकुछ सामान्य नहीं चल रहा है। अंदर ही अंदर काफी कुछ हो रहा है और यह इसमें शामिल घटक दलों के नेताओं के बयानों से ही जाहिर होता है।

शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता संजय राउत ने एमवीए गठबंधन को लेकर मुंबई में पार्टी के एक कार्यक्रम में रविवार को बयान दिया था कि यह उद्धव ठाकरे की इच्छा तक बना हुआ है। इसपर एनसीपी नेता अजित पवार ने सोमवार को उनकी खिंचाई की है और बताया है कि वह सिर्फ प्रवक्ता भर हैं।

ajit pawar on sanjay raut

'वह उनके (शिवसेना यूबीटी) प्रवक्ता की राय थी'
राउत के बयान के बारे में पूछे गए सवालों के जवाब में एनसीपी नेता ने कहा, 'वह उनके (शिवसेना यूबीटी) प्रवक्ता की राय थी, लेकिन मैं समझता हूं कि गठबंधन के बारे में अंतिम फैसला एनसीपी चीफ शरद पवार, सोनिया गांधी......हालांकि कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे हैं और उद्धव ठाकरे पर निर्भर है।'

तीनों दल साथ आए तब गठबंधन बना- अजित पवार
अजित पवार ने कहा कि तीनों दल (शिवसेना यूबीटी, एनसीपी और कांग्रेस) साथ आए (2019 के विधानसभा चुनावों के बाद), नहीं तो गठबंधन नहीं बनता। महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री ने कहा, 'चाहे एनसीपी हो, कांग्रेस या शिवसेना या कोई भी राजनीतिक दल हो, उन्हें अपनी पार्टी का जनाधार बढ़ाने का अधिकार है। लेकिन, एमवीए का हिस्सा रहते हुए ऐसा नहीं होना चाहिए कि इससे दूसरों (बीजेपी-शिवसेना) को फायदा हो।'

ज्यादा सीट वालों को मिलता है नेता विपक्ष का पद- एनसीपी नेता
जब उनसे पूछा गया कि क्या बदले हुए हालातों में विधान परिषद में एनसीपी विपक्ष के नेता के पद पर दावा करेगी तो उन्होंने कहा, 'आप मुझे पूछ रहे हैं, हमने अभी उसपर कुछ भी तय नहीं किया है, लेकिन अब आपने हमारे संज्ञान में ला दिया है तो हम इसपर सोचेंगे।' उन्होंने ये भी कहा कि आमतौर पर जिस पार्टी के पास ज्यादा सीट होती है, विपक्ष के नेता का पद उसी को मिलता है।

उद्धव की पार्टी को लगे हैं झटके पे झटके
दरअसल, उनसे यह सवाल इसलिए पूछा गया, क्योंकि शिवसेना (यूबीटी) की एमएलसी मनीषा कयांदे पार्टी छोड़कर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो गई हैं। उनके अलावा उद्धव गुट के एमएलसी विप्लव बाजोरिया भी शिंदे कैंप में जा चुके हैं। कयांदे को उनकी पार्टी ने नहीं निकाला है और उनकी सदस्यता अगले साल जुलाई में खत्म हो रही है।

महाराष्ट्र विधान परिषद का समीकरण
महाराष्ट्र विधानमंडल के मुताबिक 8 फरवरी, 2023 तक 78 सदस्यों वाले विधान परिषद में बीजेपी के सबसे ज्यादा 22 एमएलसी हैं। उसके बाद शिवसेना के 11, एनसीपी के 9, कांग्रेस के 8, तीन छोटी पार्टियों के और 4 सीटें निर्दलीयों के पास हैं। 21 सीटें खाली पड़ी हैं।

जब उनसे इसके लिए पार्टी की कोई बैठक बुलाने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि 21 जून की बैठक पहले से तय थी और तबतक ऐसा कोई मामला नहीं था। उन्होंने कहा, 'हम 9 जून को अहमदनगर में एक बैठक करना चाहते थे, लेकिन बारिश के चलते वह रद्द करनी पड़ी। अब हमने 21 जून को कुछ चुनिंदा लोगों की बैठक बुलाई है, जो विधानसभा और विधान परिषद को लेकर होगी।' (इनपुट- पीटीआई)

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