वरुण गांधी के लिए शिवसेना ने दिखाई गजब की दीवानगी, बोली-उबल गया इंदिरा के पोते का खून

मुंबई, 11 अक्टूबर: लखीमपुर खीरी हिंसा पर यूपी की पीलीभीत सीट से भाजपा सांसद वरुण गांधी ने जिस तरह से मोर्चा खोला हुआ है, उसने शिवसेना नेताओं को उनका राजनीतिक दीवाना बना दिया है। उद्धव ठाकरे की पार्टी ने सोमवार को सभी किसान संगठनों से कहा है कि उन्होंने जिस तरह से किसान आंदोलन का समर्थन किया है और खासकर लखीमपुर खीरी की घटना में उनका साथ दिया तो उन्हें समर्थन में खड़े रहने के लिए उनके हक में एक प्रशंसा प्रस्ताव पारित करना चाहिए। शिवसेना ने अपने मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और वरुण के पिता संजय गांधी की तारीफ में भी कसीदे पढ़े हैं।

शिवसेना ने वरुण के लिए दिखाई दीवानगी

शिवसेना ने वरुण के लिए दिखाई दीवानगी

महाराष्ट्र की सत्ताधारी पार्टी शिवसेना ने 'सामना' के संपादकीय में कहा है कि यूपी के लखीमपुर जैसी भयानक घटना के बाद भी सांसदों का खून ठंडा पड़ा रहा, लेकिन वरुण गांधी का खून उबल पड़ा। इस महीने की शुरुआत में हुई इस घटना में चार किसानों समेत 8 लोगों की दर्दनाक मौत(हत्या) हो गई थी। चार किसानों की मौत के बाद किसान नेताओं ने तो भाजपा की अगुवाई वाली यूपी और केंद्र की सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला ही, तमाम विपक्षी दलों ने भी जबर्दस्त प्रतिक्रियाएं दिखानी शुरू कर दीं। लेकिन, शायद भाजपा के लिए ये विरोध जितना भारी नहीं पड़ा, अकेले वरुण गांधी ने उससे कहीं ज्यादा उसकी फजीहत कर दी। उन्होंने कोई ऐसा मौका नहीं छोड़ा, जिससे कि इस मसले पर पार्टी की स्थिति असहज हुई हो।

उबल गया इंदिरा के पोते का खून- शिवसेना

उबल गया इंदिरा के पोते का खून- शिवसेना

अब वरुण को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की शिवसेना का साथ मिला है। इसने उनके समर्थन में खूब कसीदे पढ़े हैं। 'सामना' के संपादकीय ने उनके लिए लिखा है, 'देश दुश्मनी फैलाने की कोशिशों को बर्दाश्त नहीं कर सकता। वरुण गांधी इंदिरा गांधी (पूर्व प्रधानमंत्री) के पोते और संजय गांधी के बेटे हैं। लखमीपुर की दहशत देखकर उनका खून उबल उठा और उन्होंने अपनी राय रखी।' मराठी अखबार ने लिखा कि वरुण ने बिना किसी परिणाम की चिंता किए राजनीतिक साहस दिखाया और किसानों की हत्या की निंदा की। शिवसेना ने कहा है, 'किसान नेताओं को वरुण गांधी की सराहना करते हुए एक प्रस्ताव पास करना चाहिए।' गौरतलब है कि शिवसेना ने 2019 में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी की मांग पर बीजेपी से रिश्ता तोड़ लिया था और कांग्रेस और एनसीपी के साथ हाथ मिला लिया था, जिनके खिलाफ चुनाव जीत कर आई थी।

'सिख बनाम हिंदू' का रंग देना खतरनाक- वरुण

'सिख बनाम हिंदू' का रंग देना खतरनाक- वरुण

वरुण गांधी लखीमपुर खीरी हिंसा पर लगातार अपनी ही सरकार को घेरते नजर आए हैं। रविवार को भी उन्होंने कहा है कि इस घटना को 'हिंदू बनाम सिख' का रंग देने की कोशिश करना खतरनाक है। उन्होंने कहा कि लखीमपुर खीरी में न्याय के लिए संघर्ष 'एक अभिमानी स्थानीय सत्ता अभिजात वर्ग के सामने गरीब किसानों का क्रूर नरसंहार' का मामला है और इसका कोई धार्मिक मतलब नहीं है। उन्होंने ये भी कहा कि 'विरोध करने वाले किसानों के लिए 'खालिस्तानी' शब्द का प्रयोग न केवल तराई के इन बेटों की गौरवशाली पीढ़ियों का अपमान है, जिन्होंने हमारी सीमाओं पर खून बहाया है, यह हमारी राष्ट्रीय एकता के लिए भी बेहद खतरनाक है....' संयोग से जब वरुण इस मसले पर बीजेपी सरकार पर हमलावर थे, उसी समय उन्हें पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी से अलग किया गया है।

किसान आंदोलन पर भाजपा से अलग राय रख रहे हैं वरुण

किसान आंदोलन पर भाजपा से अलग राय रख रहे हैं वरुण

गौरतलब है कि 3 अक्टूबर को हुई लखीमपुर हिंसा के लिए यूपी पुलिस ने शनिवार को केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा को गिरफ्तार किया है। उनपर आरोप है कि वह उस एसयूवी में थे, जिसने प्रदर्शनकारी किसानों को रौंदा था। वरुण गांधी शुरू से तीनों कृषि कानूनों के मसले पर प्रदर्शनकारी किसानों के साथ खड़े दिखे हैं और माना जा रहा है कि भाजपा नेतृत्व को यह पसंद नहीं आया है।

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