'शिंदे नहीं बने डिप्टी CM, तो पार्टी का कोई भी सदस्य मंत्री पद नहीं लेगा', नई सरकार में शिवसेना की शर्तें
Eknath Shinde News: महाराष्ट्र की राजनीति में नई सरकार के गठन को लेकर बड़ी खींचतान चल रही है। शिवसेना नेता और मंत्री उदय सामंत ने गुरुवार को एक बड़ा बयान दिया। सामंत ने कहा कि अगर निवर्तमान मुख्यमंत्री और शिवसेना सुप्रीमो एकनाथ शिंदे उपमुख्यमंत्री पद की शपथ नहीं लेते, तो पार्टी का कोई भी विधायक मंत्री पद स्वीकार नहीं करेगा।
भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस तीसरी बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने वाले हैं। सियासी गलियारों में शिंदे के उपमुख्यमंत्री के रूप में शामिल होने की चर्चाएं हैं। हालांकि, 4 दिसंबर को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिंंदे की उपमुख्यमंत्री पद स्वीकारने की हिचकिचाहट साफ नजर आई। उधर, एनसीपी नेता अजित पवार के भी उपमुख्यमंत्री पद पर शपथ लेने के लिए तैयार हैं।

एकनाथ शिंदे की नाराजगी?
पिछले कुछ दिनों से यह चर्चा तेज थी कि एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री पद न मिलने से नाराज हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, वह सतारा स्थित अपने गांव दारे चले गए थे और उन्होंने नई सरकार को लेकर कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की। हालांकि, शिंदे ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी यात्रा आराम के लिए थी, क्योंकि चुनाव अभियान के बाद उन्हें स्वास्थ्य समस्याएं हो गई थीं।
शिवसेना नेताओं का दबाव
उदय सामंत (Shiv Sena leader Uday Samant) ने यह भी बताया कि शिवसेना के कई नेता और विधायक एकनाथ शिंदे से मिले और उन्हें उपमुख्यमंत्री बनने के लिए मनाने की कोशिश की। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि अगर शिंदे ने यह पद स्वीकार नहीं किया, तो पार्टी का कोई भी सदस्य मंत्री पद नहीं लेगा।
महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन की स्थिति
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में महायुति (एनडीए) गठबंधन ने भारी जीत दर्ज की। भाजपा, शिवसेना और अजित पवार के नेतृत्व वाले एनसीपी गुट ने मिलकर 230 सीटें हासिल कीं। भाजपा ने अकेले 132 सीटों पर जीत दर्ज की और देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे उपयुक्त उम्मीदवार माना गया।
सामूहिक काम की अपील
उदय सामंत ने पार्टी कार्यकर्ताओं को धनुष-बाण चुनाव चिन्ह के साथ निगम, जिला परिषद और नगर पंचायत चुनाव जीतने के लिए सामूहिक रूप से काम करने की अपील की।
राजनीतिक अस्थिरता का सवाल
एकनाथ शिंदे की नई सरकार में भूमिका को लेकर अभी भी कई सवाल बने हुए हैं। क्या वे उपमुख्यमंत्री पद स्वीकार करेंगे, या शिवसेना में कोई बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिलेगा? यह साफ होना अभी बाकी है। महाराष्ट्र की राजनीति में यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में नई दिशा तय कर सकता है।












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