Shiv Sena Dussehra rally: उद्धव को बड़ा झटका, एकनाथ शिंदे को मिला बाल ठाकरे के बेटे जयदेव का साथ
मुंबई, 5 अक्टूबर: Shiv Sena Dussehra rally महाराष्ट्र की राजनीति बड़ी करवट ले रही है। बुधवार को मुंबई में शिवसेना की दो-दो दशहरा रैलियां आयोजित कई गईं। एक शिवाजी पार्क में जिसकी अगुवाई उद्धव ठाकरे ने की और दूसरी बांद्रा-कुर्ला कॉम्पलेक्स की एमएमआरडीए ग्राउंड में जहां प्रदेश के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गुट ने इसका आयोजन कराया। शिंदे कैंप की सबसे बड़ी जीत ये रही कि उसके मंच पर शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे के बेटे जयदेव ठाकरे भी मौजूद रहे। लेकिन, शिंदे गुट की शिवसेना की सहयोगी बीजेपी इस समारोह से दूर रही और इसकी खास वजहें मानी जा रही है।

बाल ठाकरे के बेटे जयदेव सीएम शिंदे के मंच पर
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बांद्रा-कुर्ला कॉम्पलेक्स स्थित एमएमआरडीए ग्राउंड में भव्य दशहरा रैली आयोजित की। उन्होंने इस रैली को असली शिवसेना की रैली साबित करने के लिए कोई कमी नहीं छोड़ी। मंच पर शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे की सशक्त मौजूदगी उनकी तस्वीरों के माध्यम से झलकाने का प्रयास किया गया था और उनकी कुर्सी को श्रद्धांजलि देकर सीएम एकनाथ शिंदे ने प्रतीक के तौर पर शिवसैनिकों को बड़ा संदेश देने की कोशिश की। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक मुख्यमंत्री शिंदे के मंच पर बाल ठाकरे के बेटे जयदेव ठाकरे भी मौजूद रहे, जिसे उद्धव ठाकरे कैंप के लिए सही संदेश नहीं माना जा रहा है।

भाजपा नेताओं ने दशहरा रैली से बनाई दूरी
हालांकि, दशहरा रैली के बहाने महाराष्ट्र में शिवसेना का दोनों गुट शक्ति प्रदर्शनों में जुटा रहा, लेकिन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गुट की बड़ी सहयोगी बीजेपी ने इससे पूरी तरह दूरी बनाए रखी। एक भाजपा सूत्र ने बताया है कि ना तो शिंदे गुट ने किसी बीजेपी नेता को आमंत्रित किया था और ना ही इसकी कोई उम्मीद की जा रही थी। इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के मुताबिक भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि 'उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस नागपुर में हैं। उन्हें आरएसएस के वार्षिक विजयादशमी उत्सव में भाग लेना था।' सूत्र के अनुसार इसी तरह से बाकी बीजेपी नेता भी अन्य विजयादशमी कार्यक्रमों में व्यस्त थे।

भाजपा ने दिया शिंदे गुट को नैतिक समर्थन
कुल मिलाकर भाजपा नेताओं का कहना है कि मुंबई की दशहरा रैली पूरी तरह से शिवसेना का परंपरागत पार्टी कार्यक्रम है और यह ना तो कोई सरकारी प्रोग्राम है और ना ही चुनावी अभियान है। इसलिए पार्टी का उसमें भाग लेने का कोई मतलब नहीं है। लेकिन, भाजपा नेताओं का कहना है कि हालांकि पार्टी का नैतिक समर्थन पूरी तरह से शिंदे गुट के साथ है। भाजपा नेताओं ने कहा कि अपनी निजी हैसियत से भाजपा के नेता शिंदे गुट की मदद कर सकते हैं, यदि इसके लिए वो कहते हैं। महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा, 'एकनाथ शिंदे असली शिवसेना की अगुवाई कर रहे हैं। वही दशहरा रैली का आयोजन कर रहे हैं।'

भाजपा दोनों गुटों के मतभेद में नहीं दिखना चाहती !
लेकिन, राजनीतिक हलकों में भाजपा नेताओं का दशहरा रैली से दूरी बनाए रखने का और भी कारण बताया जा रहा है। पार्टी नहीं चाहती है कि वह सेना के अंदरूनी मतभेद में सार्वजनिक रूप से शामिल दिखाई दे। उद्धव गुट पहले से ही अपने समर्थकों को यही समझाने की कोशिश कर रहा है कि पार्टी में टूट के पीछे भाजपा का हाथ है। यानि अगर भाजपा नेता शिंदे के मंच पर दिखे तो उद्धव को यह आरोप साबित करने की वजह मिल सकती है।

बीएमसी चुनाव भी मानी जा रही है वजह
भाजपा को लगता है कि उद्धव और शिंदे गुट में जो जमीनी खींचतान चल रही है, जिसका फायदा बीएमसी चुनाव में उसे मिल सकता है। पार्टी के कार्यक्रम में शिंदे के साथ दिखकर वह उद्धव को सहानुभूति बटोरने का मौका नहीं देना चाहती। शिवसेना लंबे समय से बीएमसी पर राज कर रही है और दोनों गुटों में लड़ाई कॉर्पोरेशन चुनाव में बीजेपी को फायदा पहुंचा सकता है। भाजपा के एक उपाध्यक्ष ने नाम नहीं जाहिर होने देने की शर्त पर कहा, 'पहली बार हम दशहरा पर विभाजित शिवसेना को देखने जा रहे हैं।'












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