महाराष्ट्र से विदेश पढ़ने जाने वालों की हुई बल्ले-बल्ले, चुनाव से पहले शिंदे सरकार ने दिया बड़ा तोहफा
Maharashtra overseas education scholarship: महाराष्ट्र लोकसभा चुनाव से पहले महाराष्ट्र सरकार युवा वोटरों को साधने के लिए पूर्व में किए गए एक बड़े फैसले को लेकर बैकफुट पर आ चुकी है। छात्रों की आलोचना और विरोध के बाद शिंदे सरकार ने विदेश में हॉयर स्टडीज करने के इच्छुक छात्रों के लिए छात्रवृति योजना में योग्यता स्कोर समेत कुछ शर्तो में कई संशोधन करते हुए बड़ा तोहफा दिया है।

बता दें कुछ समय पहले महाराष्ट्र सरकार ने विदेशी शिक्षा छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करने के लिए पात्रता मानदंड में बदलाव करते हुए छात्रवृति योजना के तहत आवेदकों को ग्रेजुएशन में 75 प्रतिशत अनिवार्य कर दिया था। जबकि पहले कट-ऑफ 60 प्रतिशत था।
ओबीसी और एससी वर्ग से आने वाले छात्रों को दी जाने वाली छात्रवृत्ति के लिए आवेदन आमंत्रित करते हुए सरकार ने ये बदलाव किया था। जिसके बाद छात्रों फार्म भरने के समय प्रदेश सरकार द्वारा किए बदलाव की जमकर आलोचना की थी।
विदेशी शिक्षा छात्रवृत्ति स्कीम के तहत घटाया योग्गता अंक
इस आलोचना के बाद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने विदेश में पढ़ाई करने के लिए इच्छुक छात्रों के लिए अपनी छात्रवृति स्कीम में लगाए गई इस शर्त को संशोधित कर दिया है। महाराष्ट्र सरकार ने अब विदेश में पढ़ाई करने के इच्छुक छात्रों के लिए कॉलेज परीक्षाओं में योग्यता स्कोर 75% से घटाकर 55% कर दिया गया है। ये पहले के 60 प्रतिशत से भी कम है।
छात्रवृत्ति की सीमा
सरकार ने मास्टर और पीएचडी छात्रों के लिए छात्रवृत्ति पर क्रमशः 30 लाख और 40 लाख रुपये की सीमा भी हटा दी है। इसके अलावा मास्टर डिग्री के दौरान योजना का लाभ उठाने वालों को पीएचडी के लिए फिर से लाभ प्राप्त करने से रोकने वाला खंड भी हटा दिया गया है। इतना ही नहीं प्रति परिवार लाभार्थियों की संख्या एक से बढ़कर दो हो गई है।
जानें इस योजना का किन्हें मिलता है लाभ
विदेश में पढ़ाई करने के लिए छात्रवृत्ति अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग (ईबीसी) और मराठा कुनबी समुदायों के छात्रों के लिए उपलब्ध है, जिनकी पारिवारिक आय 8 लाख रुपये से कम है। इस योजना में अब धार्मिक अल्पसंख्यक समूहों के छात्र भी शामिल हैं, लाभार्थियों की संख्या पिछले साल के 27 से बढ़कर 75 हो गई है।
डॉक्टरेट फेलोशिप
सरकार ने सभी पात्र आवेदकों को डॉक्टरेट फेलोशिप प्रदान करने का भी निर्णय लिया है, हालांकि सहायता राशि आधी कर दी गई है। गुरुवार को जारी एक सरकारी प्रस्ताव (जीआर) के अनुसार, पात्र माने जाने वाले सभी 3,545 आवेदक शोध विद्वानों को वजीफा राशि का केवल 50% ही मिलेगा। अगले शैक्षणिक वर्षों के लिए, प्रत्येक हाशिए के समूह-एससी, ओबीसी और मराठा- के लाभार्थियों की संख्या 200 से बढ़कर 300 हो जाएगी। एसटी श्रेणी के लिए फेलोशिप 100 से दोगुनी होकर 200 हो गई है।
फेलोशिप कार्यक्रम के तहत वंचित पीएचडी छात्रों को पहले दो वर्षों के लिए 31,000 रुपये और अगले तीन वर्षों के लिए 35,000 रुपये प्रति माह का वजीफा दिया जाता है। इस कदम का उद्देश्य इन लाभार्थियों को राहत पहुंचाना है, साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि अधिक से अधिक छात्र इस कार्यक्रम से लाभान्वित हो सकें।












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