शरद पवार के 'ढोंग' से कांग्रेस और उद्धव की शिवसेना में बेचैनी, आगे तक निकलेगी बात

मुंबई में इसी महीने विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन की तीसरी बैठक होने वाली है। लेकिन, महाराष्ट्र के अंदर ही इसके सहयोगियों के बीच आपसी भरोसा उठता जा रहा है। उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना के संजय राउत जो कल तक एनसीपी संस्थापक शरद पवार के बहुत ही करीबी की तरह बोलते नजर आते थे, अब उनकी राजनीति को संदेह भरी नजरों से देखने लगे हैं।

सारा बखेड़ा शरद पवार और उनके भतीजे और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बीच हुई कथित 'गुप्त' मुलाकात को लेकर हो रहा है। बड़े पवार इसपर सफाई देने की कोशिश कर चुके हैं, लेकिन उनके गठबंधन के साथी ही उसपर यकीन करने को तैयार नहीं हैं। इसकी वजह से इंडिया गठबंधन के महाराष्ट्र वाले हिस्से महा विकास अघाड़ी में बेचैनी बढ़ रही है।

sharad pawar and india alliance

राहुल गांधी उठाएंगे मुद्दा- नाना पटोले
महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा है कि अब तो इस मसले को उनके नेता राहुल गांधी ही 31 अगस्त की बैठक के दौरान उठाएंगे। गौरतलब है कि तब विपक्षी इंडिया गठबंधन के सारे नेता मोदी सरकार और केंद्र में सत्ताधारी बीजेपी के खिलाफ मुंबई में रणनीतियां बनाने के लिए मुंबई में जुटने वाले हैं।

यह 'ढोंग' मंजूर नहीं- शिवसेना (यूबीटी)
लेकिन,इस मसले पर 2019 के नवंबर से शरद पवार के सबसे करीबी रही उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने तो इससे भी सख्त तेवर अपना लिए हैं। पार्टी ने सार्वजनिक रूप से कह दिया है कि वह एनसीपी के इस 'ढोंग' को मंजूर नहीं करती।

शिवसेना के डीएनए में यह ढोंग नहीं है- संजय राउत
उद्धव गुट के राज्यसभा सांसद और पिछले कुछ वर्षों से शरद पवार के सबसे खास माने जाने वाले संजय राउत ने इस मामले में उनके खिलाफ बहुत ही सख्त टिप्पणी की है। उन्होंने कहा है, 'पार्टी (एनसीपी) के कार्यकर्ता सड़कों पर लड़ रहे हैं। ऐसी बैठकें करके आप (शरद पवार) उन्हें क्या संदेश देना चाहते हैं? जब नेता अपने रिश्ते निभाते हैं, तो वर्कर विचारधारा के मुद्दे को लेकर सड़कों पर आंदोलन और संघर्ष क्यों करें? हमें लगता है कि शिवसेना के डीएनए में यह ढोंग नहीं है।'

पवार को दे डाली शिवसेना से सीखने की नसीहत
यही नहीं, कल तक हर मुद्दे पर शरद पवार का साथ देने वाले राउत अब उन्हें उद्धव ठाकरे की सेना से सीखने तक की नसीहत देने लगे हैं। उन्होंने कहा है, 'मेरा एकनाथ शिंदे और राज ठाकरे दोनों से ही बहुत अच्छा रिश्ता था। फिर भी, हम उनलोगों के साथ बात नहीं करते, क्योंकि इससे कैडर में गलत संदेश जाएगा।'

पवार ने मीडिया पर फोड़ा कंफ्यूजन पैदा करने का ठीकरा
वैसे शरद पवार ने एनसीपी, कांग्रेस और उद्धव सेना के बीच पैदा हुई कथित 'दुविधा' का ठीकरा मीडिया पर फोड़ने की कोशिश की है। अपने सियासी गढ़ महाराष्ट्र के बारामती में उन्होंने कहा , 'एमवीए (महाराष्ट्र विकास अघाड़ी) एकजुट है। कोई दुविधा या असमंज वाली स्थिति नहीं है। अजित पवार से बात करने के बाद मैंने अपना स्टैंड (बीजेपी के साथ जाने को लेकर) पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया है। कंफ्यूजन आप पैदा कर रहे हैं।'

शरद पवार राजनीति के बेहद ही मंजे हुए खिलाड़ी रहे हैं। इस समय वे इंडिया गठबंधन के एक बड़े चेहरे हैं, जो 26 दलों को एकजुट करके बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए गठबंधन को चुनौती देना चाहता है। तथ्य ये है कि इस गठबंधन की पहली बैठक के बाद उनकी अपनी ही पार्टी भतीजे अजित पवार ने तोड़ दी है। अजित पवार के साथ एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल भी हैं, जिन्हें सीनियर पवार इंडिया गठबंधन की पहली बैठक के लिए पटना लेकर पहुंचे थे। यही सारी वजहें हैं, जिससे उनकी सियासी हरकतों पर सहयोगी दलों की बेचैनी बढ़ी हुई है।

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