शिवसेना (UBT) की अयोग्यता याचिका पर फैसले में देरी, संजय राउत बोले-इसके लिए DY चंद्रचूड़ जिम्मेदार

महाराष्‍ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में महायुति गठबंधन ने 234 सीटें जीतकर बाजी मारी है। महा विकास अघाड़ी (एमवीए) महज 46 सीटों पर सिमट गई और एमवीए का ही हिस्‍सा शिवसेना (यूबीटी) सिर्फ 20 सीटें जीती है। 95 पर चुनाव लड़ा था। इस बीच शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) सांसद व प्रवक्‍ता संजय राउत ने भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ पर सवाल उठाए हैं। राउत ने उन पर महाराष्ट्र में दल बदलने वाले राजनेताओं के बीच कानून के डर को कम करने का आरोप लगाया है।

23 नवंबर को महाराष्‍ट्र चुनाव में मतों की गिनती की गई। शिवसेना (यूबीटी) नेता ने चुनाव नतीजों पर निराशा जताई। कांग्रेस 101 में से सिर्फ़ 16 सीटें जीत पाई, जबकि एनसीपी (एसपी) को 86 में से सिर्फ़ 10 सीटें मिलीं। राउत ने अयोग्यता याचिका पर फैसले में देरी के लिए डीवाई चंद्रचूड़ जिम्मेदार है। बोले कि अयोग्यता याचिकाओं को हल करने में चंद्रचूड़ की विफलता ने राजनीतिक दलबदल को बढ़ावा दिया। उन्होंने दलबदलुओं से कानून का डर खत्म कर दिया है।

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Sanjay Raut

राउत ने आगे आरोप लगाया कि अगर अयोग्यता याचिकाओं के बारे में समय पर निर्णय लिया गया होता, तो महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में राजनीतिक परिदृश्य अलग हो सकता था। संजय राउत ने टिप्पणी की, "इतिहास उन्हें कभी माफ नहीं करेगा।" साल 2022 में शिवसेना में विभाजन के बाद याचिकाएँ दायर की गईं, जिसमें उद्धव ठाकरे के गुट ने एकनाथ शिंदे के साथ दलबदल करने वाले विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग की थी।

सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका

सुप्रीम कोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष को इन अयोग्यता याचिकाओं पर निर्णय लेने का काम सौंपा था। इस साल की शुरुआत में विधानसभा अध्यक्ष ने शिंदे के गुट को वैध राजनीतिक दल घोषित किया था।
राउत ने कहा था कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के बारे में निर्णय गुजरात लॉबी द्वारा प्रभावित होते हैं। महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री कौन होगा, यह गुजरात लॉबी तय करेगी। शायद शपथ ग्रहण समारोह गुजरात में आयोजित किया जाना चाहिए।

यह जनता का फैसला नहीं
संजय राउत ने महाराष्‍ट्र चुनाव में महायुति की ऐतिहासिक जीत पर सवाल उठाते हुए यह भी कहा कि महाराष्‍ट्र में इतने विरोध के बावजूद अगर महायुति को इतनी ज्‍यादा सीटें मिलती हैं तो इसे जनता का फैसला नहीं माना जा सकता। मुझे नहीं लगता कि लाडली बहन योजना के चलते महायुति को इतनी बड़ी जीत मिली। इस परिणाम बहुत बड़ी गड़बड़ हुई है। बैलेट पेपर से चुनाव होता तो सब कुछ साफ हो जाता।

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