भगत सिंह कोश्यारी को पद्म भूषण दिए जाने पर क्यों भड़के संजय राउत, लगाए बड़े गंभीर आरोप
केंद्र सरकार ने उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और 2019 से 2023 तक महाराष्ट्र के राज्यपाल रहे भगत सिंह कोश्यारी को पद्म भूषण देने की घोषणा की थी। इसी के बाद राजनीतिक हलकों में विवाद तेज हो गया। शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत ने महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को पद्म भूषण से सम्मानित किए जाने के केंद्र सरकार के फैसले पर तीखा हमला बोला है।
सोमवार, 26 जनवरी को राउत ने आरोप लगाया कि कोश्यारी ने महाराष्ट्र में लोकतंत्र और संविधान की "हत्या" करते हुए उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाविकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार को गिराने में निर्णायक भूमिका निभाई थी। जानिए संजय राहत ने और क्या कहा और वो वाकया क्या था जिसको लेकर संजय राउत कोश्यारी को सम्मान मिलने की घोषणा पर आगबबूला हो गए हैं।

संजय राउत ने कोश्यारी पर लगाए ये गंभीर आरोप
पत्रकारों से बातचीत में संजय राउत ने कहा, "उन्होंने लोकतंत्र और संविधान की हत्या की। एक पूर्ण बहुमत वाली उद्धव ठाकरे सरकार को गिराया गया।" राउत ने दावा किया कि कोश्यारी का असली उद्देश्य महाराष्ट्र में भाजपा की सरकार स्थापित करना था।
राउत बोले- कोश्यारी ने छत्रपति शाहू जी का किया था अपमान
संजय राउत ने यह भी याद दिलाया कि कोश्यारी पहले छत्रपति शिवाजी महाराज को लेकर की गई उनकी विवादित टिप्पणी-जिसमें उन्होंने शिवाजी महाराज को 'पुराने जमाने का आदर्श' कहा था-को लेकर भी आलोचनाओं के घेरे में रहे हैं। उनके अनुसार, कोश्यारी ने न केवल छत्रपति शिवाजी महाराज बल्कि समाज सुधारकों महात्मा फुले और सावित्रीबाई फुले का भी अपमान किया।
संजय राउत ने सर्वाजनिक रूप से विरोध करने का किया आह्वान
संजय राउत ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री अजित पवार और एकनाथ शिंदे सहित महायुति सरकार के नेताओं से अपील की कि वे इस सम्मान का सार्वजनिक रूप से विरोध करें। हालांकि, दूसरी ओर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भगत सिंह कोश्यारी को पद्म भूषण मिलने पर बधाई दी है।
2019 महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद क्या हुआ था?
अक्टूबर 2019 में हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला।
भाजपा: 105 सीटें
शिवसेना (तत्कालीन अविभाजित): 56 सीटें
एनसीपी: 54 सीटें
कांग्रेस: 44 सीटें
चुनाव से पहले भाजपा और शिवसेना ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था, लेकिन नतीजों के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर दोनों में टकराव हो गया। शिवसेना "ढाई-ढाई साल का मुख्यमंत्री" फॉर्मूला चाहती थी, जिसे भाजपा ने स्वीकार नहीं किया।
राज्यपाल कोश्यारी की भूमिका और फैसले
तत्कालीन महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने सबसे पहले भाजपा को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया और उन्हें बहुमत साबित करने का समय दिया। भाजपा ने बहुमत न होने की बात कहते हुए सरकार बनाने से इनकार कर दिया।
इसके बाद राज्यपाल ने शिवसेना को बुलाया, लेकिन उसे भी बेहद कम समय (24 घंटे से भी कम) दिया गया। शिवसेना ने कांग्रेस और एनसीपी से बातचीत के लिए और वक्त मांगा, जिसे राज्यपाल ने मंज़ूर नहीं किया। इसके बाद एनसीपी को बुलाया गया, लेकिन उसे भी सरकार बनाने का अवसर नहीं मिला।
राष्ट्रपति शासन और विवाद
इन तमाम घटनाओं के बाद 12 नवंबर 2019 को महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। विपक्ष का आरोप था कि यदि शिवसेना को पर्याप्त समय दिया जाता, तो गैर-भाजपा सरकार बन सकती थी।
यहीं से राज्यपाल कोश्यारी की भूमिका पर संविधान की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठने लगे।
'सुबह-सुबह' सत्ता परिवर्तन: फडणवीस-अजित पवार सरकार
23 नवंबर 2019 की सुबह एक नाटकीय घटनाक्रम
राज्यपाल कोश्यारी नेराष्ट्रपति शासन हटाया और देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री, अजित पवार को उपमुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई। यह शपथ ग्रहण भोर में, बिना सार्वजनिक घोषणा के कराया गया। कुछ ही घंटों में यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँच गया।
सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप और सरकार का पतन
सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत सुनवाई करते हुए फ्लोर टेस्ट का आदेश दिया। बहुमत साबित न कर पाने के कारण फडणवीस सरकार सिर्फ 80 घंटे में गिर गई।
महाविकास अघाड़ी सरकार का गठन
इसके बाद शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस ने मिलकरमहाविकास अघाड़ी (MVA) बनाई। उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली यह महाराष्ट्र के इतिहास में पहली बार था जब शिवसेना ने भाजपा के बिना सरकार बनाई।
क्यों विवादों में रहे राज्यपाल कोश्यारी?
संजय राउत और विपक्ष के आरोपों के अनुसार राज्यपाल ने भाजपा को बार-बार प्राथमिकता दी। शिवसेना को पर्याप्त समय नहीं दिया और राष्ट्रपति शासन का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया गया। पूरी प्रक्रिया को संविधान की भावना के खिलाफ बताया गया। 'आने वाले वक्त में पूरे महाराष्ट्र को हरा रंग देंगे', सहर शेख के बाद इम्तियाज जलील ने भाजपा को दी चुनौती












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