Sambhaji Raje: शिवसेना पर 'धोखा' देने का आरोप लगाकर पीछे क्यों हटे छत्रपति शिवाजी के वंशज ?
मुंबई, 27 मई: छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशज और राज्यसभा के पूर्व सांसद संभाजी राजे छत्रपति ने राज्यसभा चुनाव से अपनी उम्मीदवारी वापस लेने का ऐलान किया है। दो दिन पहले तक वह महाराष्ट्र की सत्ताधारी शिवसेना पर वादाखिलाफी और विश्वासघात का आरोप लगा रहे थे। लेकिन, अब उन्होंने कहा है कि वह नहीं चाहते कि उनकी वजह से विधायकों की खरीद-फरोख्त की स्थिति पैदा हो, इसलिए वह अपना नाम वापस ले रहे हैं। गौरतलब है कि महाराष्ट्र से राज्यसभा की 6 सीटों के लिए हो रहे चुनावों में शिवसेना दो उम्मीदवारों को ऊपरी सदन भेज सकती है, जिनमें संभाजी का नाम नहीं शामिल किया गया है। जबकि, राज ठाकरे की पार्टी पहले ही आगे बढ़कर उन्हें समर्थन देने का ऐलान कर चुकी थी।

संभाजी राजे नहीं लड़ेंगे राज्यसभा चुनाव
छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशज संभाजी राजे छत्रपति ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन वापस लेने का ऐलान किया है। दो दिन पहले तक उन्हें राज्यसभा चुनाव में समर्थन नहीं देने को लेकर वह शिवसेना पर 'धोखा' देने का आरोप लगा रहे थे। लेकिन, उद्धव ठाकरे की शिवसेना फिर भी राजी नहीं हुई। तब जाकर संभाजी ने कहा है कि वह राज्यसभा चुनावों में हॉर्स-ट्रेडिंग नहीं चाहते इसलिए नामांकन वापस ले लिया है। गौरतलब है कि शिवसेना ने इनकी जगह पार्टी के कोल्हापुर जिलाध्यक्ष संजय पवार को पार्टी का दूसरा उम्मीदवार बनाना तय किया है, जबकि एक सीट पर पार्टी नेता संजय राउत को उतारे का फैसला किया है।

एमएनएस ने किया था समर्थन का ऐलान
बुधवार को राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने पूर्व सांसद संभाजी राजे का राज्यसभा चुनाव में समर्थन देने का ऐलान किया था। पार्टी के एकमात्र विधायक राजू पाटिल ने कहा था कि वह संभाजी का समर्थन और उनके लिए वोट करेंगे। एमएनएस एमएलए ने तो अपनी ट्वीट में सभी दलों से अपील की थी कि शिवाजी महाराज के वंशज को राज्यसभा चुनाव में समर्थन दें। पार्टी प्रवक्ता गजानन काले ने तो कहा था कि एमएनएस जानती है कि 'राजे का सम्मान कैसे किया जाना है, जो कि शिवाजी महाराज के वंशज हैं।' उन्होंने उद्धव ठाकरे की पार्टी पर आरोप लगाया था कि शिवसेना सिर्फ छत्रपति शिवाजी का नाम लेना जानती है, लेकिन उनके वंशजों के साथ 'विश्वासघात करती है और पीठ में छुरा घोंपती' है।

मेरा भी अपना स्वाभिमान है- संभाजी राजे छत्रपति
दरअसल, शुक्रवार को संभाजी राजे ने सबको चौंकाते हुए कहा है कि 'मैंने खरीद-फरोख्त से बचने के लिए अपना नामांकन वापस ले लिया है। मैं शिवाजी महाराज का वंशज हूं और मेरा भी अपना स्वाभिमान है। मैं महाराष्ट्र में अपने स्वराज्य संगठन को मजबूत करूंगा।' हालांकि, उन्होंने यह साफ नहीं किया कि वह किस खरीद-फरोख्त की बात कर रहे हैं और उन्होंने जो स्वाभिमान की बात की है, उसे उन्होंने किससे बचाने की कोशिश की है?

'शिवसेना ने मेरे साथ विश्वासघात किया है'
गौरतलब है कि शिवसेना ने मंगलवार को स्पष्ट कर दिया था कि महाराष्ट्र से राज्यसभा की छठी सीट के लिए संजय पवार ही उसके प्रत्याशी होंगे। इसके बाद संभाजी ने शिवसेना की आलोचना की थी और उसपर धोखेबाजी का आरोप लगाया था। उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस से कहा था, 'शिवसेना ने मेरे साथ विश्वासघात किया है। ' जब उनसे ऐसा कहने का कारण पूछा गया तो उन्होंने कहा, 'मुझसे कहा गया था कि मैं शिवसेना-समर्थित उम्मीदवार होऊंगा।' उन्होंने यहां तक दावा किया था कि 'पिछले हफ्ते मेरी मुख्यमंत्री के साथ विस्तार से चर्चा हुई थी। मुझे भरोसा था कि सीएम ऐसा ही करेंगे.....जैसा कि हम दोनों के बीच तय हुआ था....मुझे विश्वास था कि वे छत्रपति शिवाजी महाराज के परिवार के प्रति सम्मान दिखाएंगे।'

क्या हार की वजह से पीछे हटे संभाजी राजे ?
लेकिन, शिवसेना के मुख्य प्रवक्ता संजय राउत ने कहा कि 'महाराष्ट्र की छठी राज्यसभा सीट के लिए संजय पवार हमारे उम्मीदवार होंगे। हमारी पार्टी के प्रमुख ने पवार को चुना है, जो किए एक 'मावला (सैनिक)' हैं। उनका नाम तय कर दिया गया है।' जबकि, राउत ने संभाजी राजे के बारे में कहा कि उनसे कहा गया था कि वे शिवसेना में शामिल हो जाएं, तो पार्टी उन्हें छठे सीट से उतार सकती है। राउत के मुताबिक, 'लेकिन, उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ना तय किया है। शायद उन्हें लग रहा है कि उनके साथ पूरे आंकड़े हैं।' संभाजी राजे छत्रपति पूर्व में राज्यसभा सांसद रह चुके हैं और वह मराठा सम्राट छत्रपति शिवाजी महाराज के 13वें मूल वंशज हैं। ये मराठा आरक्षण आंदोलन के भी मुखर चेहरा रहे हैं। मोदी सरकार ने इन्हें राज्यसभा के लिए नामांकित किया था।












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