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‘हिजाब वाली’पार्षद क्यों बन गई हिंदू संगठनों का निशाना? शिंदे ने भी लिया आड़े हाथ! जानें सहर शेख की पूरी कहानी

Sahar Sheikh Corporator: महाराष्ट्र की सियासत में इन दिनों एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। यह नाम है AIMIM की युवा पार्षद सहर शेख का। ठाणे महानगरपालिका के मुंब्रा इलाके से जीत दर्ज करने वाली 29 साल की सहर शेख अपने बयान के बाद सीधे राजनीतिक तूफान के केंद्र में आ गई हैं।

असुदद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM से जीतने वाली सहर अब बीजेपी, शिवसेना और हिंदू संगठनों के निशाने पर हैं। मामले में डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे का भी बयान आ गया है और इस बयान ने ने सियासत को और गरमा दिया है।

Sahar Sheikh Corporator

सहर शेख का जीत के बाद बयान और शुरू हुआ विवाद (Sahar Sheikh Controversy)

मुंब्रा वार्ड 30 से चुनाव जीतने के बाद सहर शेख का एक बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। उन्होंने कहा कि हम किसी के बाप के मोहताज नहीं हैं। हमारे साथ अल्लाह और मजलिस की ताकत है। इसके साथ ही उन्होंने अगले पांच साल में मुंब्रा को हरे रंग से रंगने की बात कही।

यही बयान विवाद की जड़ बन गया। कई लोगों ने इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश बताया, जबकि विरोधियों ने इसे उकसावे वाला करार दिया। अब 23 जनवरी को शिंदे ने कहा है कि, ''ठाणे भगवा है। मुंब्रा ठाणे में है। यह बहुत छोटा सा है ऐसे में यह भगवा में कैसे हरा होगा।''

शिंदे का तीखा पलटवार

शुक्रवार 23 जनवरी को शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे के 100वें जन्मदिन पर डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने सहर शेख के बयान पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि ठाणे धर्मवीर आनंद दिघे का है और ठाणे भगवा है। मुंब्रा ठाणे का ही हिस्सा है और बहुत छोटा इलाका है। ऐसे में भगवा में हरा कैसे होगा। शिंदे के इस बयान के बाद मामला पूरी तरह राजनीतिक रंग ले चुका है।

Sahar Sheikh Corporator

बीजेपी और हिंदू संगठनों का विरोध

सहर शेख के बयान के बाद बीजेपी नेता किरीट सोमैया ने मुंब्रा पुलिस में शिकायत दर्ज कराने का फैसला किया। उनका आरोप है कि बयान समाज को बांटने वाला है। पुलिस ने भी सहर शेख को नोटिस जारी कर भड़काऊ भाषण न देने की हिदायत दी। इसके बाद हिंदू संगठनों ने भी सहर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। सोशल मीडिया पर सहर शेख के बयान की जमकर आलोचना हो रही है।

बढ़ते विवाद के बाद सहर शेख की सफाई

बढ़ते विवाद के बीच सहर शेख ने बयान पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि हरे रंग से उनका मतलब AIMIM के झंडे के रंग से था। AIMIM का चुनाव चिन्ह और पार्टी का रंग हरा है। उनका उद्देश्य केवल यह कहना था कि अगले चुनावों में मुंब्रा में AIMIM का विस्तार हो। उन्होंने साफ कहा कि अगर उनका इरादा भगवा को लेकर होता तो वह भगवा शब्द का इस्तेमाल करतीं।

मुस्लिम बहुल मुंब्रा और राजनीतिक समीकरण

मुंब्रा इलाका मुस्लिम बहुल माना जाता है। यहां से AIMIM के कई उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है। सहर शेख की जीत को AIMIM के बढ़ते प्रभाव के तौर पर देखा जा रहा है। खास बात यह है कि इस सीट पर बीजेपी, कांग्रेस और शिवसेना के उम्मीदवार भी मैदान में थे, लेकिन सहर शेख ने करीब 400 वोटों के अंतर से बाजी मार ली।

Sahar Sheikh Story: अब जानते हैं सहर शेख की कहानी, कौन हैं? पिता क्या करते हैं और उनकी संपत्ति कितनी है?

कौन हैं सहर शेख (who is Sahar Sheikh Corporator)

सहर शेख, युनूस शेख की बेटी हैं। उनकी उम्र 29 साल है और उन्होंने साल 2017 में मुंबई यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट की डिग्री हासिल की है। राजनीति में आने से पहले सहर एक कार वाशिंग सेंटर चलाती थीं। कम उम्र में चुनाव जीतकर वह AIMIM की उभरती हुई नेता मानी जा रही हैं।

पिता युनूस शेख का राजनीतिक सफर

सहर के पिता युनूस शेख लंबे समय से राजनीति में सक्रिय हैं। वह एनसीपी की स्थापना के समय से मुंब्रा इलाके में पार्टी से जुड़े रहे हैं और मुंब्रा ब्लॉक प्रेसिडेंट की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। युनूस शेख, शरद पवार की एनसीपी के नेता और विधायक जितेंद्र आव्हाण के करीबी माने जाते रहे हैं। सहर उन्हें अंकल कहकर बुलाती थीं।

Sahar Sheikh Corporator

टिकट नहीं मिला तो बदला रास्ता

युनूस शेख को उम्मीद थी कि इस बार उनकी बेटी को एनसीपी से टिकट मिलेगा। विधायक जितेंद्र आव्हाण ने पहले टिकट का संकेत भी दिया था, लेकिन बाद में बात नहीं बनी। इसके बाद युनूस शेख ने बेटी को असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM से चुनाव लड़ाने का फैसला किया। यही फैसला मुंब्रा की राजनीति में बड़ा उलटफेर साबित हुआ।

सहर शेख की संपत्ति कितनी है (Sahar Sheikh Net Worth)

चुनावी शपथपत्र के मुताबिक सहर शेख के पास करीब 6,98,840 रुपये नकद हैं। इसके अलावा उनके पास लगभग 120 ग्राम सोना है, जिसकी कीमत करीब 12 लाख रुपये बताई गई है। उन्होंने परिवार की सालाना आय करीब 23,43,012 रुपये घोषित की है।

क्यों बनीं सहर शेख सियासी चुनौती?

सहर शेख की जीत और उनके पिता की एनसीपी से बगावत ने विधायक जितेंद्र आव्हाण के लिए नई राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है। 2009 से लगातार मुंब्रा कलवा सीट जीत रहे आव्हाण के इलाके में AIMIM का उभार सियासी समीकरण बदलता दिख रहा है। यही वजह है कि सहर शेख का नाम सिर्फ एक पार्षद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि वह महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़े विवाद और बहस का चेहरा बन चुकी हैं।

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