Road Rage: ऑटो ड्राइवर को पांच वक्त की नमाज पढ़ने का फरमान! जानिए पूरा मामला
आम तौर पर अदालतों का फैसला कैपिटल पनिशमेंट यानी मृत्यु दंड के कारण चर्चा में रहता है। हालांकि, इस मामले में कोर्ट ने ऑटो ड्राइवर को पांच वक्त की नमाज अदा करने का हुक्म सुनाया है। जानिए क्या है पूरा मामला

Road Rage मामले में महाराष्ट्र की मालेगांव कोर्ट ने एक ऑटो ड्राइवर को पांच वक्त की नमाज अदा करने का आदेश सुनाया है। आरोपी मुस्लिम धर्मावलंबी है। अदालत ने तर्क दिया कि रोड रेज के इस मामले में केवल चेतावनी पर्याप्त नहीं होगी। कोर्ट ने कहा, यह अहम है कि दोषी चेतावनी और उसकी सजा को याद करे, ताकि वह ऐसी हरकत दोहरा न सके।
अदालत के आदेश के अनुसार, जहां घटना हुई उस जगह पर ऑटो ड्राइवर को मस्जिद के अंदर दो पेड़ लगाने और पेड़ों की देखभाल करनी होगी। महाराष्ट्र के नासिक जिले के इस मामले में आदेश मालेगांव मजिस्ट्रेट कोर्ट ने सुनाया है।
रोड रेज के मामले में अदालत ने आरोपी को जानबूझ कर चोट पहुंचाने का दोषी पाया। अभियुक्तों को कारावास की सजा काटने से बचने के लिए अदालत ने पांच वक्त की नमाज पढ़ने और पेड़ लगाने के बाद उसकी देखभाल की शर्त रखी। इंडियाटुडे की रिपोर्ट के अनुसार 30 वर्षीय आरोपी राउफ खान उमर खान, एक ऑटोरिकशॉ ड्राइवर था। उसके ऑटो से करीब 13 साल पहले एक बाइक सवार को टक्कर लगी थी।
2010 में पावर-लॉम टाउन ऑफ मालेगांव की एक संकीर्ण लेन में हुई दुर्घटना पर शिकायतकर्ता ने कहा, ऑटो ड्राइवर खान ने उस पर हमला किया। खान के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 323 (स्वेच्छा से चोटिल होने के कारण), धारा 325 (स्वेच्छा से गंभीर चोट का कारण), धारा 504 (शांति के उल्लंघन के लिए जानबूझकर अपमान) और धारा 506 (आपराधिक धमकी) के तहत आरोप लगाए गए।
मजिस्ट्रेट ने खान को धारा 323 के तहत दोषी पाया। बाकी आरोपों से उसे बिना कारावास और जुर्माने के बरी कर दिया गया। हालांकि, कोर्ट ने शर्त और आरोपी ने मजिस्ट्रेट के आदेश का अनुपालन भी किया। मजिस्ट्रेट, तेजवंत संधू ने, Probation of Offenders Act, 1958 की धारा 3 का इस्तेमाल कर कहा, मजिस्ट्रेट को अधिकार है कि वह दोषी को उचित चेतावनी के बाद बिना कारावास के छोड़ सके, जिससे आरोपी / दोषी अपराध को दोहराने का साहस न दिखाए। अदालत ने यह भी तर्क दिया कि मात्र चेतावनी पर्याप्त नहीं इसलिए दोषी को सजा भी दी गई जिसे वह याद रखे और अपराध न दोहराए।
अदालत ने कहा, "मेरे अनुसार, उचित चेतावनी देने का मतलब यह समझाना है कि अपराध किया गया है, आरोपी दोषी साबित हुआ है और वह उसे याद रखता है जिससे फिर से अपराध दोहराया न जाए।" कोर्ट के आदेश के अनुसार खान को सोनपुरा मस्जिद परिसर में दो पेड़ लगाने पड़े। उसे पेड़ों की देखभाल भी करनी है।
Recommended Video
गौरतलब है कि अभियुक्त ने सुनवाई के दौरान कबूल किया था कि इस्लाम धर्मावलंबी होने के बावजूद वह नियमित रूप से धार्मिक ग्रंथों में निर्धारित तरीके से नमाज नहीं पढ़ता। इसे देखते हुए, अदालत ने दोषी को अगले 21 दिनों के लिए, नियमित रूप से, दिन में पांच बार नमाज अदा करने का आदेश दिया। मजिस्ट्रेट ने यह भी निष्कर्ष निकाला कि अदालत के दोनों निर्देश Probation of Offenders Act, 1958 की धारा 3 के दायरे में आ गईं। इसलिए यह एक उपयुक्त चेतावनी है।












Click it and Unblock the Notifications