'अमित शाह 2029 की तैयारी कर रहे' उद्वव ठाकरे की शिवसेना में टूट पर राज ठाकरे ने तोड़ी चुप्पी
Raj Thackeray, Operation Tiger: महाराष्ट्र की राजनीति में छिड़े 'ऑपरेशन टाइगर' ने राज्य के सियासी पारे को एक बार फिर चरम पर पहुंचा दिया है। शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट के सांसद पाला बदलकर रविवार को अधिकारिक तौर पर एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हो गए हे। उद्ध्व ठाकरे की शिवसेना यूबीटी में बड़ी टूट के बाद महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे ने अपनी चुप्पी तोड़ी है।
राज ठाकरे ने कहा मौजूदा राजनीतिक दौर की नैतिकता पर बड़े सवाल उठाते हुए अप्रत्यक्ष तौर पर देश के सत्ताधारी दल को घेरा है। राज ठाकरे ने इतिहास का हवाला देते हुए भारतीय जनता पार्टी को आगाह किया कि सत्ता कभी स्थाई नहीं होती है।

'सत्ता का घमंड ज्यादा दिन नहीं टिकता'
राज ठाकरे ने कहा, कांग्रेस का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस दल ने देश पर लगभग साठ वर्षों तक एकछत्र राज किया, आज उसकी हालत हर कोई देख रहा है। राज ठाकरे ने सांसदों के पाला बदलने की इस दौड़ पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे लोकतंत्र के लिए एक चिंताजनक संकेत करार दिया।
भाजपा में क्यों नहीं गए सांसद?' राज ठाकरे का बड़ा सवाल
दलबदल के पीछे की राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठाते हुए राज ठाकरे ने पूछा कि यदि बागी सांसद वास्तव में अपनी विचारधारा बदल रहे थे, तो वे सीधे भाजपा में शामिल क्यों नहीं हुए? उन्होंने संकेतों में दावा किया कि पूरी राजनीतिक पटकथा दिल्ली से संचालित हो रही है और आने वाले चुनावों को ध्यान में रखकर राजनीतिक समीकरण तैयार किए जा रहे हैं। उनका कहना था कि यदि भाजपा ऐसे दलबदल को प्रोत्साहन न देती या उसका विरोध करती, तो शायद इस तरह की बगावत संभव नहीं होती।
अमित शाह 2029 की तैयारी कर रहे
उन्होंने कहा अमित शाह 2029 की तैयारी कर रहे हैं। अगर भाजपा विरोध करती तो शायद दूसरे लोग उनके साथ खड़े नहीं होते, वरना ये नेता सीधे भाजपा में शामिले हो सकते थे।
'करोड़ों में बिक रही है निष्ठा, लोकतंत्र खतरे में'
मनसे प्रमुख ने मौजूदा राजनीति की नैतिकता पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि आज जनप्रतिनिधियों की निष्ठा और राजनीतिक प्रतिबद्धता करोड़ों रुपये के लेन-देन में खरीदी-बेची जा रही है। उनके अनुसार, यह केवल नेताओं के आत्मसम्मान का प्रश्न नहीं बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए भी गंभीर खतरा है। उन्होंने कहा कि सत्ता हासिल करने की होड़ में राजनीतिक मर्यादाएं लगातार कमजोर होती जा रही हैं।
जनता के मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए हो रहा ड्रामा
राज ठाकरे ने महायुति सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसे राजनीतिक ड्रामों का मकसद जनता का ध्यान असली मुद्दों से हटाना है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र इस समय कृषि संकट, बढ़ती बेरोजगारी और किसानों की आत्महत्याओं जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है, लेकिन राजनीतिक दलों का पूरा ध्यान सत्ता के गणित पर केंद्रित है। उनके मुताबिक, जनता के जीवन से जुड़े सवालों पर चर्चा करने के बजाय राजनीतिक उठापटक को प्राथमिकता दी जा रही है।
उद्वव गुट के सांसदों ने की बगावत
विवाद तब और गहरा गया जब शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के पार्टी छोड़ने की खबरें सामने आईं।, इन सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर शिंदे गुट की शिवसेना में शामिल होने की इच्छा जताई। इसके साथ ही वे उद्धव ठाकरे द्वारा बुलाई गई महत्वपूर्ण बैठकों से भी लगातार अनुपस्थित रहे, जिससे बगावत की अटकलों को और बल मिला।
उद्धव ठाकरे का भावुक संदेश: 'सैनिक साथ हैं तो मैं भी हूं'
शिवसेना के स्थापना दिवस कार्यक्रम में Uddhav Thackeray ने भी पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने उन आरोपों को खारिज किया कि वे केवल सत्ता के लिए राजनीति कर रहे हैं। उद्धव ठाकरे ने कहा कि वे सत्ता को किसी भी कीमत पर बचाए रखने की मानसिकता लेकर राजनीति में नहीं आए थे। उन्होंने कार्यकर्ताओं को भरोसा दिलाया कि जब तक बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा से जुड़े निष्ठावान शिवसैनिक उनके साथ खड़े हैं, तब तक वे संघर्ष जारी रखेंगे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जिस दिन कार्यकर्ताओं को लगेगा कि उन्हें नेतृत्व छोड़ देना चाहिए, वे बिना किसी हिचकिचाहट के पार्टी अध्यक्ष पद छोड़ने के लिए तैयार रहेंगे।













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