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Pune Porsche case: 'बेटे को बचाने के लिए खून का इल्जाम अपने सिर लिया', आरोपी के पिता को 22 माह बाद SC से जमानत

Pune Porsche crash case: महाराष्ट्र के चर्चित पुणे पोर्श क्रैश केस में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। केस के नाबालिग आरोपी (जो अब बालिग हो चुका है) के पिता को ज़मानत दे दी, जो कथित तौर पर अपने बेटे को बचाने के लिए सबूतों से छेड़छाड़ की साज़िश में शामिल था। अदालत ने सख्त शर्तों के साथ ज़मानत देते हुए गवाहों से किसी भी तरह का संपर्क न करने की चेतावनी भी दी है।

पिता को 22 महीने जेल के बाद मिली ज़मानत

जस्टिस बीवी नागरत्ना और उज्जल भुइयां की पीठ ने आरोपी के पिता विशाल अग्रवाल को निचली अदालत द्वारा तय की जाने वाली शर्तों पर ज़मानत देने का निर्देश दिया। अदालत ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि आरोपी पिछले 22 महीनों से जेल में बंद था, जबकि मामले के अन्य सह-आरोपियों को पहले ही ज़मानत मिल चुकी है।

Pune Porsche crash case

'बेटे को बचाने के लिए खून का इल्जाम अपने सिर लिया'

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरोप यह है कि पिता ने अपने बेटे को बचाने के लिए खून का दोष अपने ऊपर लेने की कोशिश की थी। हालांकि, केवल ऐसे आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को अनिश्चितकाल तक सीमित रखना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने दी सशर्त जमानत

सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें एक शर्त रखते हुए जमानत दी कि वह ट्रायल के दौरान जांच में पूरा सहयोग करेंगे और न तो किसी गवाह को प्रभावित करेंगे और न ही सबूतों से छेड़छाड़ करेंगे। पीठ ने स्पष्ट किया कि अगर आरोपी ने ज़मानत की शर्तों का उल्लंघन किया तो राज्य सरकार को ज़मानत रद्द कराने का अधिकार होगा। साथ ही निचली अदालत को मामले की सुनवाई जल्द पूरी करने का निर्देश भी दिया गया।

खून के नमूने बदलने की साज़िश का आरोप

जांच एजेंसियों के मुताबिक आरोपी पिता पर अन्य सह-आरोपियों के साथ मिलकर आपराधिक षड्यंत्र रचने का आरोप है। कथित तौर पर उसने अपने नाबालिग बेटे को बचाने के लिए उसके खून के नमूने बदलवाने की कोशिश की।

आरोप है कि इस काम के लिए उसने अपनी पत्नी के जरिए 5 लाख रुपये की रिश्वत का इंतज़ाम किया, ताकि अधिकारियों को प्रभावित कर साक्ष्यों से छेड़छाड़ की जा सके।

महाराष्ट्र सरकार और पीड़ित परिवार कर रहा फैसले का विरोध

सुनवाई के दौरान महाराष्‍ट्र सरकार ने आरोपी की ज़मानत याचिका का विरोध किया और कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए उसे राहत नहीं दी जानी चाहिए। पीड़ितों में से एक के पिता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत में कहा कि यह मामला केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि "न्याय के भटकाव" का गंभीर उदाहरण है। उन्होंने तर्क दिया कि घटना के तुरंत बाद आरोपी ने फोन कॉल की एक श्रृंखला कर साज़िश को अंजाम देने की कोशिश की।

सुप्रीम कोर्ट की समाज पर टिप्पणी

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना ने भारतीय समाज की मानसिकता पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यह मामला इस बात का प्रतिबिंब है कि समाज में कई लोग कानून से बच निकलने की कोशिश करते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति को केवल सामाजिक धारणा के आधार पर दोषी नहीं माना जा सकता और दोष सिद्ध होने तक व्यक्तिगत स्वतंत्रता का सिद्धांत लागू रहता है।

शिक्षा व्यवस्था पर भी उठाए सवाल

न्यायमूर्ति नागरत्ना ने यह सवाल भी उठाया कि सामाजिक मूल्यों के निर्माण में शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका क्या है। उन्होंने कहा कि अगर बच्चों को संविधान के नागरिक मूल्यों, कानून का सम्मान और ईमानदारी नहीं सिखाई जाएगी, तो समाज में ऐसी प्रवृत्तियाँ बढ़ती रहेंगी।

Pune Porsche crash case क्या था?

यह दर्दनाक हादसा 19 मई 2024 को पुणे के कल्‍याणी नगर में हुआ था। एक तेज रफ्तार Porsche Taycan ने मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी, जिसमें दो युवा सॉफ्टवेयर इंजीनियर अनीश अवधिया और अश्विनी कोष्ठा की मौत हो गई थी। जांच में सामने आया कि कार कथित तौर पर 17.5 साल के नशे में धुत किशोर द्वारा चलाई जा रही थी, जो एक बिल्डर परिवार से जुड़ा है। बाद में Sassoon General Hospital में खून के नमूनों से छेड़छाड़, रिश्वतखोरी और लीपापोती के आरोप भी सामने आए, जिससे मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया।

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