कौन हैं कांग्रेस नेता मामा पगारे? जिन्हें बीजेपी वर्करों ने साड़ी पहनाई, महाराष्ट्र में बवाल
Prakash Pagare Sari incident: मुंबई के डोंबिवली इलाके में राजनीतिक बवाल मच गया, जब कांग्रेस के वरिष्ठ कार्यकर्ता प्रकाश मामा पगारे को बीजेपी कार्यकर्ताओं ने पकड़कर साड़ी पहनाई। यह घटना सोशल मीडिया पर पगारे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की साड़ी पहने हुई मॉर्फ्ड तस्वीर शेयर करने के बाद हुई।
भाजपा कार्यकर्ताओं ने इसे सर्वोच्च नेतृत्व का अपमान बताया। इस विवाद ने इलाके में तनाव बढ़ा दिया और राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी, जबकि पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए सतर्कता बढ़ा दी।

क्या है पूरा मामला?
मुंबई के डोंबिवली और उल्हासनगर इलाके में कांग्रेस के वरिष्ठ कार्यकर्ता प्रकाश मामा पगारे ने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की साड़ी पहने हुए मॉर्फ्ड फोटो पोस्ट की। इसके साथ ही उन्होंने एक गाना भी शेयर किया, जिसे बीजेपी नेताओं ने अपमानजनक बताया। इस पोस्ट के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं में गुस्सा फैल गया और उन्होंने पगारे को पकड़कर साड़ी पहनाई। घटना के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई और दोनों पार्टियों के समर्थकों के बीच तनाव बढ़ गया।
कांग्रेस नेता का क्या था पोस्ट?
डोंबिवली में 73 वर्षीय कांग्रेस कार्यकर्ता प्रकाश मामा पगारे ने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री मोदी की मॉर्फ्ड तस्वीर पोस्ट की, जिसमें उन्हें साड़ी पहने दिखाया गया। इसके साथ एक गाना भी साझा किया गया, जिसे भाजपा नेताओं ने अपमानजनक बताया। पगारे अपने बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते हैं, लेकिन इस पोस्ट ने राजनीतिक वातावरण को गरमा दिया।
भाजपा ने जताई नाराजगी
भाजपा के कल्याण ज़िला अध्यक्ष नंदू परब ने इस पोस्ट की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की ऐसी तस्वीर साझा करना न केवल अपमानजनक है, बल्कि अस्वीकार्य भी है। परब ने चेतावनी दी कि अगर भविष्य में इस तरह की कोशिशें हुईं, तो भाजपा और सख्त कार्रवाई करेगी। विरोध प्रदर्शन के दौरान भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच सड़क पर झड़प भी हुई।
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कांग्रेस का पलटवार
कांग्रेस ने भाजपा की प्रतिक्रिया की आलोचना की। कल्याण ज़िला कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पोटे ने कहा कि पगारे वरिष्ठ कार्यकर्ता हैं और अगर उन्होंने कुछ आपत्तिजनक पोस्ट किया, तो भाजपा को उन्हें गुमराह करके साड़ी पहनाने के बजाय पुलिस में शिकायत करनी चाहिए थी। पोटे ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला करार दिया और भाजपा समर्थकों के समान व्यवहार की मांग की।
डोंबिवली में राजनीतिक तापमान गर्म
इस घटना ने डोंबिवली में राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। दोनों पार्टियों ने अपने-अपने समर्थकों को सतर्क रहने और कानून का पालन करने के निर्देश दिए हैं। सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर बहस तेज है। राजनीतिक विशेषज्ञ इसे भविष्य के चुनावी माहौल के लिए संकेतक मान रहे हैं।
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