Maharashtra Doctors Strike: महाराष्ट्र सरकार का ये फैसला क्या सच में है मरीजों के लिए खतरा?
Maharashtra Doctors Strike: महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार के एक फैसले के कारण राज्य के 1.80 लाख डॉक्टरों ने 24 घंटे की हड़ताल कर दी है। यह हड़ताल होम्योपैथिक डॉक्टरों को महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (MMC) में रजिस्ट्रेशन की अनुमति देने के विरोध में डॉक्टरों ने की है।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) महाराष्ट्र ने गुरुवार को इस राज्यव्यापी हड़ताल का आह्वान किया था, जिसके बाद बड़ी संख्या में डॉक्टर काम से दूर रहे। ओपीडी, ऑपरेशन थिएटर और अन्य नियमित स्वास्थ्य सेवाएं इस हड़ताल से बुरी तरह प्रभावित हुईं। हड़ताल पर गए डॉक्टरों ने महाराष्ट्र सरकार के इस फैसले पर नाराजगी जाते हुए इस फैसले को मरीजों के लिए खतरा करार दिया है। ऐसे में सरकार के इस फैसले पर सवाल उठ रहा है!

हालांकि यह एक जटिल मुद्दा है जिसमें कानूनी, चिकित्सा, नैतिक और सार्वजनिक नीति संबंधी कई पहलू शामिल हैं। महाराष्ट्र सरकार द्वारा होम्योपैथिक डॉक्टरों (जिन्होंने मॉडर्न फार्माकोलॉजी में एक छोटा सर्टिफिकेट कोर्स, सीसीएमपी किया है) को महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (एमएमसी) में रजिस्टर होने और कुछ एलोपैथिक (आधुनिक) दवाएं लिखने की अनुमति देने के निर्णय पर जानिए एलोपैथिक डॉक्टरों का क्या तर्क है?
डॉक्टरों का दावा- मरीजों के जीवन के साथ खिलवाड़ हो रहा
राज्य सरकार द्वारा होम्योपैथी डॉक्टरों को एमएमसी में पंजीकरण की अनुमति देने पर डॉक्टरों का तर्क है कि सरकार एलोपैथिक और होम्योपैथिक डॉक्टरों को समान दर्जा देने का प्रयास कर रही है, जो मरीजों के जीवन के साथ खिलवाड़ हो सकता है।
हड़ताल पर बैठे डॉक्टरों ने अपनी बात स्पष्ट करते हुए कहा कि एलोपैथी डॉक्टर बनने के लिए पहले NEET परीक्षा उत्तीर्ण करनी होती है, उसके बाद साढ़े चार साल की MBBS डिग्री और फिर तीन साल की मास्टर्स डिग्री (MD या MS) हासिल करनी पड़ती है. इसके अलावा, सरकारी अस्पतालों में लंबी इंटर्नशिप भी अनिवार्य होती है।
इसके विपरीत, डॉक्टरों के अनुसार, सरकार होम्योपैथिक डॉक्टरों को मात्र छह महीने का एक छोटा कोर्स करवाकर एलोपैथिक दवाएं लिखने की अनुमति दे रही है. डॉक्टरों का मानना है कि यह निर्णय बिल्कुल गलत है और मरीजों की सुरक्षा से समझौता करता है।












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