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महाराष्‍ट्र के चुनावी रण में दांव पर है राजघरानों के सदस्‍यों की इज्‍जत, जानें किन पार्टियों के हैं उम्‍मीदवार

Maharashtra Assembly Election 2024: महाराष्‍ट्र विधानसभा चुनाव के लिए मतदान 20 नवंबर को होगा। इस बार के चुनाव में सत्‍तारूढ़ महायुति और विपक्षी महाविकास अघाड़ी के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। इस बार के चुनाव में राजनीति पार्टियां आगामी विधानसभा चुनावों में जीत हासिल करने के लिए राज्‍य के पूर्व शाही परिवारों पर निर्भर पर नजर आ रहे हैं।

इस चुनाव में शाही परिवारों के उम्‍मीदवार चुनाव मैदान में होने के कारण कई सीटों पर चुनावी मुकाबला बड़ा रोचक हो चुका है। पूर्व शाही परिवार के उममीदवारों की हार-जीत पर सभी की निगाहें टिकी हुई है।

Maharashtra Election

भाजपा के बैनर तले सतारा सीट से छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशज शिवेंद्रराजे भोसले चुनाव लड़ रहे हैं। यह उनका पांचवां चुनावी मुकाबला है। याद रहे शिवेंद्रराजे के पिता अभय सिंहराजे भोसले कांग्रेस, एनसीपी और जनता पार्टी सहित विभिन्न दलों से छह बार विधायक के रूप में जीत चुके हैं। 2019 के राज्य चुनावों से पहले भाजपा में शामिल हो गए थे। उनके चचेरे भाई छत्रपति उदयनराजे भोसले, सतारा के राजा, सतारा लोकसभा सीट से भाजपा सांसद हैं।

फलटन सीट पर दीपक चव्हाण

वहीं सतारा के पड़ोसी निर्वाचन क्षेत्र फलटन जो अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित है, इस सीट से नाइक निंबालकर शाही परिवार के सदस्य एनसीपी विधायक दीपक चव्हाण अपने जीत के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।

छत्रपति शाहू महाराज की बहू ने नामांकन के बाद बदला फैसला

कोल्हापुर उत्तर में कांग्रेस ने शुरू में छत्रपति शाहू महाराज की बहू मधुरिमाराजे छत्रपति को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के राजेश क्षीरसागर के खिलाफ खड़ा किया था। हालांकि, नाटकीय घटनाक्रम में मधुरिमाराजे ने 4 नवंबर को अपना नामांकन वापस ले लिया। उनके पति मालोजीराजे 2004 से 2009 के बीच कोल्हापुर उत्तर के विधायक रह चुके हैं।

कांग्रेस नेता राजेश लाटकर के आंतरिक विरोध के बावजूद, पार्टी ने मधुरिमाराजे को मैदान में उतारने का फैसला किया, जिसके कारण लाटकर स्वतंत्र रूप से मैदान में उतरीं। उनके पीछे हटने से कांग्रेस को शर्मिंदगी उठानी पड़ी, जिसके बाद उसे स्वतंत्र लाटकर को समर्थन देना पड़ा।

कागज़ सीट पर लड़ रहे समरजीत सिंह घाटगे

इसके अलावा, राजनीतिक क्षेत्र में कोल्हापुर राजघराने से समरजीत सिंह घाटगे भी कागज़ सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। वे एनसीपी के मंत्री हसन मुश्रीफ को चुनौती दे रहे हैं, जो राजघरानों के सदस्यों और स्थापित राजनीतिक हस्तियों के बीच सीधे टकराव है। घाटगे राजर्षि छत्रपति शाहू महाराज के प्रतिष्ठित परिवार से ताल्लुक रखते हैं, जो राज्य की राजनीति में शाही वंशों की निरंतर भागीदारी को उजागर करता है।

अहेरी सीट पर राज परिवार के तीन सदस्‍य के बीच है मुकाबला

गढ़चिरौली जिले के आदिवासी बहुल इलाके अहेरी सीट पर एक अनोखा चुनावी तस्‍वीर देखने को मिल रहा है, जहां राजपरिवार के तीन सदस्य चुनाव लड़ रहे हैं, जिससे त्रिकोणीय मुकाबला बन गया है। एनसीपी के मंत्री धर्मराव बाबा आत्राम अपनी ही बेटी भाग्यश्री हलगेकर आत्राम के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं, जो शरद पवार की एनसीपी के बैनर तले चुनाव लड़ रही हैं। इसके अलावा, पूर्व मंत्री और राजपरिवार के सदस्य अम्बरीशराव आत्राम एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतर रहे हैं।

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