Opinion: सीएम शिंदे की अयोध्या यात्रा, कैडर में फूंकेगी नई जान
महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे ने अयोध्या में उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए कहा था, 'राम ने पिता को वचन देकर 14 साल का वनवास किया था। लेकिन कुछ लोगों ने सत्ता की लालच में पिता के वचन का ध्यान नहीं रखा।'

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे हाल ही में भगवान राम की नगरी अयोध्या गए। अपनी कैबिनेट के साथ 09 अप्रैल को सीएम एकनाथ शिंदे अयोध्या में रहें, उन्होंने वहां पहले रामलला के दर्शन किए और आरती की। उन्होंने राम मंदिर के निर्माण के कार्य का जायजा भी लिया। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री का पद संभालने और शिंदे की अगुवाई वाले धड़े को शिवसेना के तौर पर मान्यता देने और उसे 'धनुष और बाण' चुनाव चिन्ह मिलने के बाद सीएम शिंदे का ये अयोध्या का यह पहला दौरा था। सीएम शिंदे की अयोध्या यात्रा के कई मायने हैं।
एकनाथ शिंदे की इस अयोध्या यात्रा ने भगवा कैडर में एक नई जान फूंकी है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना से अलग होकर बीजेपी के साथ सरकार बनाने के बाद एकनाथ शिंदे बतौर मुख्यमंत्री पहली बार अयोध्या पहुंचे थे। उनके साथ शिवसेना के सभी विधायक, सांसद और लगभग हजार कार्यकर्ता भी गए थे। इस यात्रा को सोशल मीडिया पर कई लोगों ने 'धनुष बाण यात्रा' का भी नाम दिया। शिंदे के चुनाव चिन्ह के प्रतीक 'धनुष बाण' को राम की जन्मभूमि अयोध्या में महंत द्वारा नमन भी किया गया।

जिस तरह अपनी अयोध्या यात्रा में एकनाथ शिंदे ने अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया है, उससे ये तो साफ हो गया है कि वह उद्धव ठाकरे की जगह लेकर हिंदुत्व का एक नया चेहरा बनकर उभरना चाहते हैं। एकनाथ शिंदे को अक्सर हमने ये कहते सुना है कि वे बालासाहेब ठाकरे के हिंदुत्व के उन विचारों को आगे बढ़ा रहे हैं, जिन्हें उद्धव ठाकरे ने छोड़ा दिया है।
एकनाथ शिंदे और उनके खेमे के विधायकों ने ये अक्सर कहा है कि वह उद्धव ठाकरे से इसलिए अलग हो गए हैं क्योंकि उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में शामिल होकर हिंदुत्व को नजरअंदाज किया है।
एकनाथ शिंदे ने अपने अयोध्या दौरे के जरिए हिंदुत्व नेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर उभारने की कोशिश की है। एकनाथ शिंदे अपनी अयोध्या यात्रा के जरिए जिस ताकत का प्रदर्शन किया है, उससे कैंडर में एक उर्जा का संचार हुआ होगा।

अपने अयोध्या दौरे से शिंदे वो आर्शीवाद वाला धनुष बाण भी ले गए हैं। उसे दिवंगत शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे के समाधि स्थल पर उसके बाद ले जाया गया है। अयोध्या से पूजा करके लाया गया धनुष बाण' पूरे महाराष्ट्र में घुमाने की रणनीति तैयार की जा रही है। जिसको लेकर राजनीतिक हलचल बढ़ गई है।
महंत मैथिली चरण, जिन्होंने कनाथ शिंदे को धनुष बाण से आशीर्वाद दिया, उनका कहना है कि, ''बालासाहेब ठाकरे ही सिर्फ ऐसे नेता थे, जिनके नाम के पहले हिन्दूहयस्मृत' लगाया जाता था। लेकिन उनके बेटे ने कांग्रेस और एनसीपी के साथ हाथ मिलाकर हिंदू धर्म को दरकिनार कर दिया। धनुष बाण बालासाहेब ठाकरे का प्रतीक है, इसलिए हमने शिंदे को उनके हिंदुत्व विचारों को आगे बढ़ाने के लिए धनुष और बाण से आशीर्वाद दिया है।''

हालांकि दूसरी ओर ठाकरे गुट के शिवसेना का कहना है कि हमने कभी भी हिंदुत्व का साथ नहीं छोड़ा है। शिंदे के अयोध्या दौरे के बारे में आदित्य ठाकरे ने कहा है कि, 'कैसा कलियुग आ गया है। रावण राज्य के शासक अयोध्या दौरे पर गए हैं लेकिन हम आपको विश्वास दिलाते हैं कि जल्द ही राज्य में राम राज्य लाएंगे।''
कुल मिलाकर देखा जाए तो एकनाथ शिंदे का अयोध्या यात्रा, सिर्फ आध्यात्मिक और धार्मिक तीर्थयात्रा नहीं थी। इस यात्रा के हिंदुत्व की राजनीति में राष्ट्रीय स्तर पर एक नया चेहरा जोड़ने और कैडरों में नई जान फूंकने की कोशिश की गई है। इस अयोध्या यात्रा से उद्धव ठाकरे की हिंदू नेता वाली छवि को भी कमजोर करने की कोशिश की गई।
एकनाथ शिंदे का अयोध्या दौरा हिंदुत्व के मुद्दे को उठाने के लिए ही थी। अगर हिंदुत्व का मुद्दा केंद्र में रहेगा तो बाकी सारी बात उसके आगे फीकी पड़ जाती है। शिंदे की शिवसेना को आगामी चुनावों में हिंदुत्व के मुद्दे को लेकर बड़ा फायदा हो सकता है।












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